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सफलता मिली तो विवाद भी लता से जुड़े

मुंबई. सफलता के साथ विवादों का चोली-दामन का साथ होता है या यूं भी कहा जाता है कि सफल लोगों के पीछे बहुत से असफल किस्से होते हैं। लताजी भी इस तरह के विवादों से बच नहीं सकीं। समय-समय पर उनके साथ कुछ विवाद, कुछ अफवाहें या फिर कुछ ऐसी बातें जुड़ती रहीं जो उन्हें सुर्खियों में तो ले आईं लेकिन उनकी छवि के न तो अनुकूल रहीं और न ही उनकी छवि के लिए कोई खतरा बन सकीं।

1. लता-आशा-नैयर मामला
यह तो सभी जानते हैं कि मशहूर संगीतकार ओपी नैयर के निर्देशन में लताजी ने काम नहीं किया। इसके पीछे कारण क्या रहा, अब तक इसको लेकर तरह-तरह की बातें होती हैं। हालांकि लताजी इंटरव्यू में कह चुकी हैं कि वे नैयर साहब की बहुत इज्जत करती थीं और वे उनकी लेकिन उनकी आवाज उनके संगीत के माकूल न होने के कारण दोनों ने साथ काम नहीं किया।

फिर भी, यह बात भी उतनी ही शिद्दत से कही जाती रही है कि आशा भोंसले और ओपी नैयर के कथित प्रेम प्रसंग के कारण लताजी खफा रहीं और इसीलिए एक लंबे अरसे तक उनका आशा से भी अनबोला रहा। आशा भोंसले ने इंटरव्यू में कहा था कि जब उन्होंने युवावस्था में प्रेम विवाह किया था तो दीदी नाराज थीं और काफी समय तक दोनों में कोई बातचीत नहीं हुई थी लेकिन यह नैयर साहब के सिलसिले में उन्होंने नहीं कहा था। खैर बातें चाहे जो हों पिछले लंबे समय से सब ठीक हो चुका है और दोनों बहनों के बीच कोई दुराभाव नहीं है।

2. रॉयल्टी विवाद
60 के दशक में बेहतरीन गायक मोहम्मद रफी के साथ लताजी का मतभेद हुआ। दरअसल रफी साहब का कहना था कि फिल्ममेकर अगर गायक को गाने की कीमत अदा कर देता है तो गायक फिर कोई दावा नहीं कर सकता लेकिन लताजी का मानना था कि फिल्म निर्माता को गीत की रॉयल्टी का एक हिस्सा गायकों को देना चाहिए।

इसी बात को लेकर दोनों के बीच वाकयुद्ध चलता रहा और माया फिल्म के गीत तस्वीर तेरी दिल में.. की रिकॉर्डिग के समय लता रफी पर बिगड़ गईं। संगीत निर्देशक सलिल चौधरी द्वारा लता की तरफदारी किए जाने से रफी बेहद निराश हुए। इसके बाद लताजी ने साफ तौर पर घोषणा कर दी कि वे रफी के साथ नहीं गाएंगी। तब भी रफी साहब ने यही कहा कि वे पहले की तरह अब भी उनके साथ गाने की तमन्ना रखते हैं। फिर करीब तीन साल बाद संगीतकार एसडी बर्मन ने दोनों को साथ गाने के लिए प्रेरित किया और ज्वैल थीफ में दिल पुकारे.. गीत कंपोज किया लेकिन दोनों के बीच व्यक्तिगत संबंध मधुर नहीं हो सके।

3. गिनीज बुक विवाद
1982 में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में लताजी को 1948 से 1974 के बीच 25 हजार से ज्यादा गीतों में आवाज देने के लिए शामिल किया गया था। इस पर काफी विवाद हुआ और अब तक काफी चर्चा हो चुकी है। आशा भोंसले ने लता से ज्यादा गीतों में उनकी आवाज होने का दावा किया। वहीं कथित रूप से मोहम्मद रफी ने भी दावा किया था कि उन्होंने 1944 से 1980 के बीच के समय में 28 हजार गीत रिकॉर्ड किए हैं। प्रशंसकों द्वारा आशा और रफी के पक्ष में लता की आवाज वाले गीतों की संख्या कम बताए जाने का सिलसिला जारी है।

4. अन्य विवाद :
1999 में लताजी को जब राज्यसभा का सदस्य चुना गया तो वे सदन के सत्र में अनुपस्थित रहीं और इस पर नजमा हेपतुल्ला, प्रणब मुखर्जी और शबाना आजमी द्वारा उनकी आलोचनाएं भी की गईं। लताजी ने इसका कारण अस्वस्थ होना बताया। इसके अलावा एमपी होने के नाते उन्होंने न तो कभी वेतन लिया, न ही भत्ता और न ही दिल्ली में कोई मकान। इसके अलावा वर्ष 2000 में मुंबई में पैडर रोड के अन्य निवासियों के साथ लताजी ने क्षेत्र में फ्लाईओवर के निर्माण का विरोध किया और मामला बढ़ने पर उन्होंने फ्लाईओवर बनने की सूरत में शहर छोड़ देने की बात भी कह डाली। लताजी द्वारा समय-समय पर दिए गए बयानों पर भी काफी हंगामा होता रहा और उस पर तरह-तरह की बातें जारी रहीं। जैसे :- हमारे क्रिकेटर विज्ञापनों पर कुछ ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।- पुराने गीतों का रीमिक्स वर्जन सही नहीं है।





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