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Mothers Day Mothers Day पूजनीय मां,
सादर चरण स्पर्श।
खुशी पूर्वक रहते हुए आशा करता हूं कि आप भी सकुशल होंगी। दूर परदेश में बैठे हुए मेरा मन अचानक तुम्हारे पास अक्सर चला जाता है। तुम्हारे साथ बिताए हुए हर पल यादों के मंजर में इस तरह समाए हुए है कि जब भी याद करता हूं आंखे छलछला जाती हैं। वो छुटपन की बातें , तुम्हारा प्यार दुलार सब मन के किसी कोने में कैद है। मां छोटा सा था जब तुमसे दूर चला गया था, बहाना वही पढ़ाई का, एक अदद इंसान बनने का। यही वह बात थी ना जिसके कारण नानी मुझे भोपाल लेकर चली आई थीं और उसके बाद तो जैसे मैं इस शहर का होकर रह गया था। साल में बस स्कूल की छुट्टियों के दिनों में तुमसे मिलना हो पाता था ज्यादा से ज्यादा 1 माह के लिए। लेकिन इस एक माह में ऐसा लगता था जैसे मैंने कई पल जी लिए हों। उसके बाद फिर वही स्कूल के दिन, दोस्तों का मेला और तुम्हारी यादों के सहारे हंसता मुस्कुराता मेरा बचपन।
कभी कभी जिंदगी के बारे में सोचता हूं तो बडा़ अजीब लगता है बचपन के 6 वषों को छोड़ दूॅ तो पिछले २२ सालों से मेरी जिंदगी में बस साल के कुछ दिन ही तो ऐसे थे जब मैं तुम्हारे पास रह पाया हूं। और अब तो ऐसा लगता है कि अकेले रहने की आदत सी हो गयी है। कभी कभी लगता है कि मुझसे ज्यादा खुशनसीब तो मेरे छोटे भाई बहन रहे कम से कम उनको तुम्हारें साथ रहने का मौका तो मिला। मां मुझे याद है बचपन में जब भी आपकी याद आती थी तो मैं सबके सामने तो कभी नहीं रोया लेकिन जब भी अकेला होता था तो अक्सर अांखों से ऑसू छलक जाते थे। वैसे मेरा बचपन शानदार रहा है लेकिन ऐसा लगता है कि आपसे दूर रहकर मैंने बहुत कुछ खोया है जिसकी भरपाई किसी बात से नहीं हो सकती।
जब भी घर आता हूं तो आप हर बार यही कहती हो कि मैं पहले की अपेक्षा और कमजोर हो गया हूं और फिर मैं बोल पड़ता हूं मां आप हर बार तो यही कहती हो। लेकिन मैं जानता हूं आप सच कहती हो। दरअसल अकेले रहते हुए समय पर खाना कम से कम मेरे बस की बात तो नहीं है। अजीब सी जिंदगी जीता हूं मां आपके बिना। पर जैसा भी हूं खुश रहता हूं यह सोचकर कि अगर मैं खुश रहूं गा तो मेरी मां भी हमेशा खुश रहेगी। मां आप मेरे लिए अनमोल हो।
तुम्हारा बेटा
राजेश यादव
पत्र लेखक राजेश यादव भास्कर डॉट काम में उपसंपादक के पद पर कार्यरत है।