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दौरा करती हैं लक्ष्मी शरद पूर्णिमा के दिन

दीपावली के ठीक 15 दिन पहले शरद पूर्णिमा आती है। इस समय तक दशहरा समाप्त हो जाता है। मस्ती करने वालों का पूरा ध्यान दीवाली की मिठाइयों और पटाखों पर चला जाता है। मूलत: यह त्योहार फसलों से संबंधित है।

कहा जाता है कि इस रात धन और उन्नति की देवी लक्ष्मी सारे घरों का दौरा करती है और साथ ही सारे बच्चों, बूढ़ों और जवान को अच्छी किस्मत के लिए गुडलक कहती है।

इस विशेष रात को कोजागिरी भी कहा जाता है। इस रात को बर्फ और केसरियायुक्त दूध पिया जाता है। इस पूरे चंद्रमा वाली रात को नवन्ना पूर्णिमा कहा जाता है। ऐसा आभास होता है कि नए भोजन के स्वागत के लिए चांदनी रात अपना दामन पसारे हुए है।

इस अवसर पर भगवान को नया उपजाया हुआ चावल भेंट करते हैं और पूर्ण रूप से खिले चांद के सामने लैम्प जलाते हैं।

शरद पूर्णिमा किसानों की जिंदगियों में दो तरह का महत्वपूर्ण संदेश लाती है। पहला जो कड़ी मेहनत करेगा भगवान उसे अवश्य फल प्रदान करेगा और दूसरा यह कि प्रभु मनुष्य के द्वारा की जा रही सारी गतिविधियों पर नजर रखता है।

बहुत सारे दुर्गा मंदिरों में शरद पूर्णिमा के शुभ अवसर पर गीत संगीत से मां दुर्गा को जगाया जाता है। इसके पीछे ऐसी मान्यता है कि मां दुर्गा नौ दिनों तक महिषासुर से लड़कर थकने के बाद सो गई थीं।





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