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कैसे मनाएं नवरात्र

>> नवरात्र के दौरान उपवास रखने के समय एक बार ही भोजन लें और एक ही बार में पूरा खाना समाप्त करें। भोजन शुद्ध शाकाहारी होना चाहिए और इसे बनाने के समय लहसुन और प्याज का उपयोग नहीं करना चाहिए। सर्वप्रथम भक्तगण प्रार्थना कर सकते हैं और माता रानी को भोजन अर्पित कर फिर प्रसाद के रूप में इसे पा सकते हैं।

भोजन शुरू और अंत के समय जय माता दी का उच्चरण 9 बार करना चाहिए। ज्यादा अच्छा होता है कि भोजन सूर्यास्त के बाद ग्रहण किया जाए। पूरे दिन भक्तगण फलाहार, जूस, दूध और खीर का सेवन कर सकते हैं।

हालांकि कुछ लोग पूरे दिनभर फल और तरल पदार्थो का सेवन कर ही रह जाया करते हैं। यह मामला पूरी तरह से भक्तों के विवेक पर ही निर्भर करता है।

>> नवरात्र के पूरे समय भक्तों को अपने दिमाग, शरीर और विचार को शुद्ध रखना आवश्यक होता है। प्रयास यह होना चाहिए कि भक्त रोज मां भवानी के मंदिर में जाए और प्रार्थना करे। प्रत्येक दिन आरती में शामिल होना भी अच्छा माना जाता है। आप प्रार्थना की शुरुआत गणोश जी का नाम लेकर गणोश वंदना के साथ कर सकते हैं।

>> मां की प्रतिमा या तस्वीर के सामने ज्योति अवश्य जलाएं। माता रानी को जोतांवाली भी कहा जाता है क्योंकि ज्वालामयी प्रकाश या आंच में उनका वास माना जाता है।

>> इस पूरी अवधि के दौरान जमीन पर दरी बिछाकर सोना श्रेयस्कर माना जाता है।

>> इस दौरान दाढ़ी, बाल या नाखून बनाना वर्जित माना जाता है।

>> उपवास के दौरान चमड़े और काले कपड़ों का प्रयोग निषिद्ध है।

>> इन्द्रिय विषयक विकारों और जनन या प्रसव से दूर रहना चाहिए।

>> माता रानी को प्रसाद के रूप में हलवा, पूरी और चने का भोग लगाना चाहिए।

>> अगर संभव हो तो कन्या को इस दौरान रोज खिलाना चाहिए। उपवास के अंत में 9 कन्याओं को एक साथ भी खिलाया जा सकता है। अगर ये दोनों संभव ना हो तो कन्याओं के बीच में ताजे फलों और ड्राई फ्रूटस का वितरण कर देना चाहिए।

>> मांस, मदिरा और अंडों से दूर रहना चाहिए। अगर आपको स्वास्थ्य संबंधी कुछ शिकायतें हैं तो किसी प्रकार की दवा या भोजन से परहेज नहीं करना चाहिए।





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