ज्यूरी सदस्यों के बीच हुए खुले मतदान में एंट्री की हकदार धर्म दरकिनार कर दी गई। यह खुद ज्यूरी अध्यक्ष विनोद पांडे ने फोन पर कहा। क्या यह नियमों के अनुकूल है? नियम कहता है कि गुप्त मतदान हो। इस नियम को क्यों तोड़ा गया? और ज्यूरी अध्यक्ष होने के नाते क्या यह पांडे का कर्तव्य नहीं था कि वे एक बेहतर फिल्म, जिसे वे एंट्री का हकदार मानते हैं, के समर्थन में खड़े हों?
भावना ने सुधीर मिश्रा पर भी निशाना साधा : अगर मिश्रा कहते हैं कि एकलव्य तकनीकी दृष्टि से ज्यादा अच्छी फिल्म है तो प्लीज उसे टैक्निकल श्रेणी में ऑस्कर के लिए नामांकन हेतु भेजें। मैंने एकलव्य देखी थी और उस फिल्म ने सिवाय बोर करने के कुछ और नहीं किया। मैं किसी भी चरित्र से जुड़ाव महसूस नहीं कर सकी। उसका अंत क्या था? फिल्म कहना क्या चाह रही थी?
संयोजन एवं संपादन : भवेश दिलशाद |