साहिर किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। ‘पल दो पल’ के इस शायर ने साहित्य और फ़िल्म की दुनिया के आक़ाश में एक ऐसी चमक क़ायम कर दी जो सदियों तक आबाद रहेगी। साहिर एक क्रांतिकारी शायर थे। इसकी पूरी झलक इनके ग़ीतों और शायरी में नजर आती है। जो ज़िंदग़ी पे गुज़री उसे शब्दों में ढालते गए। |