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Twenty20 Worldcup2007 Twenty20 Worldcup2007 
आक्रामक विकेटकीपर बल्लेबाज महेंद्र ¨सह धोनी की अगुवाई में युवा खिलाडियों से लैस टीम इंडिया मंगलवार से दक्षिण अफ्रीका में शुरू हो रहे ट्वेंटी20 क्रिकेट विश्वकप में छुपा रस्तम साबित हो सकती है। भारतीय खिलाड़ियों के पास क्रिकेट के इस नए सरपट स्वरप का ज्यादा अनुभव तो नहीं है लेकिन टीम के युवा खिलाड़ियों के पास कुछ कर दिखाने की क्षमता है। ट्वेंटी-२क् विश्वकप के लिए भारतीय टीम में तीन दिग्गज खिलाड़ी सचिन तेंडुलकर, सौरभ गांगुली और राहुल द्रविड़ शामिल नहीं है। तीनों ने इस विश्व कप से खुद को दूर रखने का फैसला किया। इन तीन धुरंधरों की अनुपस्थिति में युवा खिलाड़ियों को अपने आपको साबित करने का सुनहरा मौका मिला है।
टवेंटी-२क् की भारतीय टीम को देखा जाए तो २९ वर्षीय अजित आगरकर टीम के सबसे वरिष्ठ खिलाड़ी हैं जबकि आक्रामक ओपनर वीरेन्द्र सहवाग २८वर्ष के और आफ स्पिनर हरभजन ¨सह २७ वर्ष के हैं। अन्य सभी खिलाड़ियों की उम्र २६ वर्ष से कम हैं। भारत की टेस्ट और वनडे टीमों से बाहर चल रहे सहवाग, हरभजन और इरफान पठान ने ट्वेंटी-२क् के जरिए भारतीय टीम में वापसी की है। ये तीनों खिलाड़ी इस विश्वकप में अच्छा प्रदर्शन कर भारत की टेस्ट और एकदिवसीय टीमों में लौटने के लिए बेताब है। भारतीय टीम का सबसे मजबूत पक्ष उसकी बल्लेबाजी है। सहवाग, राबिन उथप्पा, युवराज ¨सह और धोनी किसी भी गेंदबाजी आक्रमण की धज्जियां उड़ा सकते हैं। गौतम गंभीर, दिनेश काíतक और रोहित शर्मा भी तेज गति से रन जुटा सकते हैं। इरफान पठान, उनके भाई यूसुफ और जोगिन्दर शर्मा गेंद के साथ-साथ बल्ले से भी जोरदार हाथ दिखा सकते हैं१ युसुफ को लोग आमतौर पर इरफान के भाई के रूप में जानते हैं लेकिन उन्हें उनकी आलराउंड क्षमता के कारण ही टीम में जगह मिली। कसी स्पिन गेंदबाजी करने के अलावा गेंदों को सीमारेखा के पास पहुंचाने का दमखम रखते है। भारत की बल्लेबाजी का मुख्य दारोमदार सहवाग के कंधों पर रहेगा। भारत ने गत दिसंबर में अब तक का जो अपना एकमात्र ट्वेंटी-२क् अंतरराष्ट्रीय मैच दक्षिण अफ्रीका में खेला था उसमें सहवाग ही कप्तान थे।
भारत ने यह मैच काíतक की शानदार पारी से जीता था। सहवाग शुरआती ओवरों में काफी विस्फोटक गति से बल्लेबाजी करते हैं। वह वनडे में कुछ ही ओवरों में ३क्-४क् रन ठोक दिया करते थे लेकिन इसके बाद आउट होने की प्रवृत्ति के कारण ही उन्हें भारतीय टीम से बाहर कर दिया गया था। मगर वह इस बार ऐसी गलती नहीं दोहराने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका मानना है कि इस विश्वकप में सफलता हासिल करने के लिए किसी भी टीम को पूरे २क् ओवर खेलने चाहिए और खेल के इस स्वरूप में २क्क् का स्कोर ही सुरक्षित माना जा सकता है।