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सचिन की राह पर चले द्रविड़

sachinb>मुंबई: इंग्लैंड में 21 साल बाद टेस्ट सीरीज जीतने के बाद कप्तान राहुल द्रविड़ का अचानक कप्तानी छोड़ना टीम इंडिया और प्रशंसकों के लिए एक करारा आघात है। हालांकि भारतीय क्रिकेट में इस तरह की घटनाएं नई नहीं है। पहले भी कई बार प्रमुख खिलाड़ियों ने अचानक कप्तानी छोड़कर टीम को मझधार में डाला था। पिछले 18 सालों से टीम की बल्लेबाजी की रीढ़ सचिन तेंडुलकर और महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर खुद ऐसा कर चुके हैं।

सचिन के बतौर कप्तान दूसरे कार्यकाल मंे चयनकर्ताओं के साथ संबंध काफी खराब हो गए थे। वे अपने बल्लेबाजी क्रम पर अनावश्यक विचार से नाराज हो गए थे। उन्होंने कप्तानी छोड़ने के लिए जो समय चुना था। वह भी द्रविड़ की तरह बिलकुल अनुपयुक्त था। दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेलने भारत आई दक्षिण अफ्रीका की टीम तीन दिवसीय वार्म अप मैच खेल रही थी। इसी बीच सचिन ने सार्वजनिक रूप से यह घोषणा कर डाली कि वे टेस्ट सीरीज के बाद कप्तानी छोड़ देंगे। इसके बाद ताबड़तोड़ बोर्ड ने सौरव गांगुली को अफ्रीका के खिलाफ 5 वन डे इंटरनेशनल की सीरीज में कप्तान बनाया था। यही गांगुली आगे चलकर भारत के सबसे कामयाब कप्तान साबित हुए। उन्हें 2005 में अपमानजनक ढंग से टीम और कप्तानी दोनों से दरकिनार कर दिया गया।

विवादों के बीच भारतीय टीम की कप्तानी की बागडौर संभालने वाले द्रविड़ भी गांगुली की राह पर आगे बढ़ रहे थे। उन्होंने कुल 25 टेस्ट और 79 वन डे इंटरनेशनल में कप्तानी की। इस दौरान वे वेस्टइंडीज और इंग्लैंड में टेस्ट सीरीज के साथ दक्षिण अफ्रीका में टेस्ट मैच जीतने वाले पहले कप्तान बने।

सुनील ने भी यही किया था: द्रविड़ और सचिन के पहले भारत के सर्वकालिक महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने भी इसी तरह अचानक कप्तानी छोड़ी थी। वे 1984-85 में इंग्लैंड के खिलाफ घरु सीरीज के दौरान कपिल के साथ हुए विवाद से नाराज थे। इसके चलते कपिल को अपने कैरियर में पहली बार कलकत्ता टेस्ट में बाहर बैठना पड़ा था। उन पर दिल्ली टेस्ट के दौरान जानबुझकर गलत शॉट खेलने का आरोप था। भारत यह टेस्ट मैच हार गया था। इस सीरीज में भारत की हार से उपजी आलोचनाओं से दुखी गावस्कर को ऑस्ट्रेलिया में होने वाली बेंसन एंड एशेज कप के लिए कप्तान बनाया गया था, लेकिन उन्होंने पहले ही घोषणा कर दी कि वे इस सीरीज के बाद कप्तानी छोड़ देंगे। उन्होंने भारत की इस वर्ल्ड सीरीज में जीत के बाद भी टस से मस न होते हुए कप्तानी से तौबा कर ली। इसके बाद गावस्कर अपने शेष कैरियर में कपिल की कप्तानी में खेले।



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