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श्रीलंका ट्वंटी20 में भी विश्व रिकार्ड

15twantजोहानिसबर्ग: एक समय क्रिकेट की दुनिया में पिछड़े देशों की सूची में शुमार की जाने वाली श्रीलंका की टीम ने 1996 का विश्वकप जीतने के बाद से ही लगातार अपना प्रदर्शन सुधारा है। उनका पिछले दस साल का रिकार्ड इस बात की गवाही देता है। सनथ जयसूर्या की अगुवाई में लंकाई बल्लेबाजों ने एक के बाद एक कई रिकार्ड अपने नाम किए हैं। ट्वंटी20 विश्वकप के अपने पहले मैच में कीनिया के खिलाफ 6 विकेट पर 260 रन बनाए। यह क्रिकेट की फटाफट विधा में एक नया विश्व कीर्तिमान है। इससे पहले यह रिकार्ड ऑस्ट्रेलिया के नाम था। उसने 9 जनवरी 2007 को इंग्लैंड के खिलाफ सिडनी में 221 रन बनाए थे।

इससे पहले टेस्ट और वन डे में भी एक पारी में सर्वोच्च रनों का रिकार्ड लंका के नाम है। उसने 2-6 अगस्त 1997 में भारत के खिलाफ प्रेमदासा स्टेडियम, कोलंबो में खेले गए मैच में बाद में बल्लेबाजी करते हुए सनथ जयसूर्या(340) के शानदार तिहरे शतक और रोशन महानामा(225) के दोहरे शतक की मदद से 6 विकेट पर 952 रन बनाकर इंग्लैंड का 59 साल पुराना रिकार्ड(903/7) भंग किया था।

वर्तमान में प्रदर्शन के लिहाज से भारतीय उपमहाद्वीप की टीम नंबर वन लंका के ही नाम वन डे में भी एक पारी में सर्वोच्च रन बनाने का रिकार्ड है। उसने 4 जुलाई 2006 को एम्स्टेविन(हालैंड) में एक अत्यंत लो प्रोफाइल मैच में हालैंड के खिलाफ यह रिकार्ड बनाया था। इस रिकार्ड में भी सनथ जयसूर्या का प्रमुख योगदान रहा। उन्होंने इस मैच में 104 गेंदों में 157 रनों की धुआंधार पारी खेली थी।

ट्वंटी20 वर्ल्डकप में शुक्रवार को इस टीम ने क्रिकेट की इस तीसरी अंतर्राष्ट्रीय विधा में भी विश्व रिकार्ड अपने नाम कर लिया। सनथ जयसूर्या के शानदार 88 और कप्तान जयवर्धने के 67 रनों की बदौलत लंका ने कीनिया के खिलाफ 20 ओवरों में 260 रनों का अविश्वसनीय सा स्कोर बनाकर 9 जनवरी 2007 में ऑस्ट्रेलिया द्वारा इंग्लैंड के खिलाफ सिडनी में बनाया गया 221 रनों का रिकार्ड भंग कर दिया।

यह भी एक संयोग है कि इन तीनों कीर्तिमानों में सनथ जयसूर्या का अहम योगदान रहा। इस खिलाड़ी को मुथैया मुरलीधरन के साथ लंकाई क्रिकेट को फर्श से अर्श में ले जाने का प्रमुख श्रेय जाता है।





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