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इंग्लैंड-भारत की टीमें कमजोर

Nasir-Hussainडरबन में इंग्लैंड ने न्यूजीलैंड को हराने का एक सुनहरी मौका गवा दिया। दिन के खेल में किंग्समीड जिसकी बाउंड्रीज ज्यादा दूर नहीं है और न्यूजीलैंड के 164 रन के सामान्य स्कोर के सामने इंग्लैंड को आसानी से पहुंच जाना चाहिए था। मेरे ख्याल में इंग्लैंड टीम फ्लिंटॉफ के चोटिल होने के दुख से उबर नहीं पाई। अगर सच पूछा जाए तो मैं कहूंगा कि इंग्लैंड और भारत की टीमें इस टूर्नामेंट के सुपर-8 दौर में कमजोर टीमें हैं।

इन दोनों का मुकाबला डरबन में हुआ। भारत और इंग्लैंड के पास कोई इतनी अच्छी बैटिंग लाइनअप नहीं है जितनी अच्छी साउथ अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के पास है। यह दोनों टीमें अपने पहले बल्लेबाजों पर ज्यादा निर्भर करती हैं। जब यह बल्लेबाज आउट हो जाते हैं तो इन टीमों के पास जोरदार स्ट्रोक लगाने वाले बल्लेबाजों की कमी हो जाती है। इस टूर्नामटें ने यह साबित किया है। कि आपके टेस्ट और एकदिवसीय मैचों के खिलाड़ी ट्वेंटी-20 क्रिकेट में भी बेहतरीन प्रदर्शन कर सकते हैं।

टीमों को किसी भी खिलाड़ी पर टेस्ट या वनडे खिलाड़ी का लेबल नहीं लगाना चाहिए। श्रीलंका के सनथ जयसूर्या इसकी उदाहरण है। पहले वह एकदिवसीय मैचों के माहिर माने जाते थे लेकिन उन्होंने ट्वेंटी-20 में भी अच्छा प्रदर्शन किया है। भारतीय टीम जब इंग्लैंड दौरे पर थी तब राहुल द्रविड़ ने मुझ से कहा था कि आप भारतीय टीम के कोच बनना पसंद करेंगे तो मैंने कहा था क्यों नहीं। लेकिन मैं स्काई स्पोट्र्स के साथ अपनी नौकरी को छोड़ना नहीं चाहता। भारतीय एकदिवसीय टीम के नये कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी से काफी उम्मीदें है।





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