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मुंबई: अहम मौकों पर अपनी भावनाओं पर काबू रखकर श्रेष्ठता की शिखर पर पहुंचे टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को भी लगा था कि मिसबाह उल हक का स्कूप सीमा रेखा के पार जा चुका है और भारत हार चुका है। हालांकि इसे सीमा रेखा के पार जाने से पहले काफी पहले ही फाइन लेग में खड़े श्रीसंथ ने लपक लिया था।
पाकिस्तान को विश्वकप जीतने के लिए अंतिम चार गेंदों पर 6 रन की ही दरकार थी। जोगिंदर के इस अंतिम ओवर की तीसरी गेंद पर मिसबाह उल हक ने पुर्वनिर्धारित स्कूप शॉट खेलकर गेंद को फाइन लेग के बाहर छह रनों के लिए भेजने का प्रयास किया। लेकिन यह गेंद वहां खड़े श्रीसंथ के सुरक्षित हाथों में पहुंच गई।
उस वाकये को याद करते हुए धोनी ने कहा कि उस समय एक क्षण के लिए मुझे लगा कि गेंद श्री के पीछे गिरेगी। उन्होंने कहा कि उस समय वे श्री को नहीं उनके हाथों को देख रहे थे कि गेंद उनके उनके हाथों में आ रही है या नहीं या फिर वे उसे कैच कर पाएंगे या नहीं।
श्री के मिजाज पर टिप्पणी करते हुए धोनी ने कहा कि इसके चलते उन्हें थोड़ी नहीं वरन बहुत परेशानी हुई।