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  • जबलपुर. यहां ऑर्डिनेंस फैक्ट्री खमारिया में शनिवार शाम आग लगने के बाद 200 से ज्यादाब्लास्ट हुए। इसमेंछह से ज्यादा एम्पालॉईज के जख्मी होने की खबर है, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई है। आग बुझाने के लिए 50 फायर ब्रिगेड माैके पर पहुंचे। एंटी टैंक बमों में आग लगने की वजह सेहर दो सेकंड में एक ब्लास्ट हुआ। आसपास रहने वाले लोगों ने बताया कि ब्लास्ट से उनके घर में दरारें आ गईं। पूरी तरह नहीं बुझ सकी आग,सेना ने संभालामोर्चा... - शाम करीब 6.25 बजे हुए हुए हादसे में अचानक जोरदार धमाका हुआ। इसके बाद आग फैली और एक के बाद एक 200 से ज्यादा ब्लास्ट हुए। - हादसे में छह से ज्यादा एम्पालॉईज के जख्मी होने की खबर है, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई है। - हर दो सेकंड में ब्लास्ट और आग की ऊंची लपटों से फैक्ट्री के आसपास करीब चार किलोमीटर के एरिया में हड़कंप मच गया। धमाकों में एंटी टैंक बम फिलिंग स्टेशन के आसपास की कई बिल्डिंग भी बर्बाद हो गईं। - बताया जा रहा है कि F-3 में जहां धमाके हुए, उसी के पास NSN मैगजीन की 1800 पेटियों को पुलगांव (महाराष्ट्र) डिपो भेजने के लिए रैक पर लोड किया जा रहा था। - साथ ही पास की यूनिट में एंटी टैंक बमों की फिलिंग भी हो रही थी। ऐसे में सेना ने भी मोर्चा संभाला। - फायर ब्रिगेड की 50 गाड़ियों ने तीन घंटे की मशक्कत के बाद रात 9:15 बजे बिल्डिंग की अाग पर काबू पाया, लेकिन पूरी आग नहीं बुझ सकी है। घटना के बाद नाइट शिफ्ट में प्रोडक्शन बंद रहा। धमाकों के कारण आग बुझाने की हर कोशिश हुई नाकाम लगातार धमाकों के कारण आग बुझाने की हर कोशिश नाकाम हो रही थी। धमाकों से आसपास के इलाकों नानक नगर, मानेगांव, पिपरिया, वर्धा घाट मटामर, टाइप टू से निकलकर फैक्टरी के गेट नंबर-1 के पास पहुंच गए। नानक नगर के लोगों का कहना है कि उनके घर हिल गए और दरारें आ गईं। ब्लास्ट की 3 मुमकिन वजहें 1#.शॉर्ट सर्किट: एफ-3 में काम के दौरान शॉर्ट सर्किट हो गया हो। इससे आग बमों तक पहुंच गई। 2#. सूखी घास: जहां आग लगीवहां सूखी घास है। इसमें आग लगने की आशंका। 3#. फ्रैक्शन: मार्च में क्लोजिंग होती है। इस दौरान रिजेक्ट बमों की काउंटिंग होती है। इस दौरान कोई बम गिरा और ब्लास्ट हो गया। खमरियाऑर्डिनेंस फैक्ट्रीकेसीनियर जीएमएके अग्रवालने बताया किबिल्डिंग में लगी आग को काबू कर लिया गया है, लेकिन पूरी आग बुझाने में समय लगेगा। बिल्डिंग से लगे जंगल में आग बुझाने की कोशिश जारी हैं। नुकसान का अंदाज नहीं किया गया है। रविवार को पुणे से एक्सपर्ट की टीम आकर घटना की जांच करेगी। आंखों देखी : फायर कर्मियों नेे सबसे पहले मैगजीन की पेटियां कवर कीं - फैक्टरी के नॉन बिलिंग सेक्शन में पोस्टेड ऑफिसर अजय घई ने बताया कि दिन की शिफ्ट खत्म कर मैं 6:10 पर मेन गेट की तरफ जा रहा था। तभी 324 नंबर बिल्डिंग से तेज धमाका हुआ। -देखते-ही-देखते आग की लपटें बाहर आने लगीं। उस वक्त करीब 14 एम्पलाॅई बिल्डिंग के अंदर थे। कुछ ही सेकंड बाद फिर धमाका हुआ। -सायरन बजे तो फैक्ट्री की फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों ने उस हिस्से को सबसे पहले कवर किया, जहां मालगाड़ी का एक रैक NSN मैगजीन पुलगांव डिपो ले जाने के लिए खड़ा था। -रात की शिफ्ट में मैगजीन की 1800 पेटियां रैक में लोड करने की तैयारी थी। इनमें से 84 एमएम मैगजीन के 3-3 और 125 एमएम मैगजीन के 3-3 लाट थे। -एक के बाद एक लगातार धमाके होने लगे तो पूरी फैक्ट्री परिसर में काला धुंआ फैल गया। आग के अलावा कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। -एक तरफ से आग को काबू पान के लिए फोम टेंडर का इस्तेमाल हो रहा था, लेकिन दूसरी तरफ आग बढ़ती जा रही थी। अंधेरे में कर्मचारी एक दूसरे को आवाजें लगा कर अंधेरे में ही सुरक्षित जगह खोजते रहे। -मैं जैसे तैसे मुख्य द्वार तक पहुंच गया था। 324 नंबर बिल्डिंग के अलावा 316 नंबर बिल्डिंग भी आग की चपेट में आ चुकी थी। -करीब अाधे घंटे में अन्य सुरक्षा संस्थानों की फायर ब्रिगेड भी मौके पर पहुंच गई थी। जिन्होंने करीब पौने तीन घंटे की मशक्कत के बाद आग को बढ़ने से रोक दिया। इस बीच सेना और रेस्क्यू टीम भी फैक्टरी में पहुंच गई थी।
    Last Updated: March 26, 08:54 AM
  • देहरादून. उत्तराखंड में त्रिवेंद्र सिंह रावत की लीडरशिप वाली बीजेपी सरकार ने राज्य में 240 करोड़ रुपए के लैंड एक्विजिशन स्कैम (जमीन अधिग्रहण घोटाला) का खुलासा किया है। नेशनल हाईवे-74 के लिए कांग्रेस सरकार के समय यह अधिग्रहण हुआ था। नई सरकार ने घोटाले में संदिग्ध भूमिका पाए जाने पर SDM लेवल के 6 ऑफिशियल्स को सस्पेंड कर दिया है। साथ ही मामले की जांच सीबीआई से कराने के लिए केंद्र सरकार को लेटर लिखा है।एनएच-74 के लिए ली गई थी जमीन... - न्यूज एजेंसी के मुताबिक सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, उधम सिंह नगर जिले में 2011-2016 के बीच प्रपोज्ड एनएच-74 के लिए खेती की जमीन के अधिग्रहण में 240 करोड़ रुपए की अनियमितता सामने आई है। खास लोगों को फायदा देने के लिए खेती की जमीन को गैर कृषि भूमि दिखाकर मुआवजे की रकम पर 20 गुना ज्यादा फायदा कमाया गया। - उन्होंने कहा, सवालों के घेरे में आई ज्यादातर जमीन उधम सिंह नगर जिले के जसपुर, काशीपुर, बाजपुर और सितारगंज में है। हेरफेर की रकम का आंकड़ा अभी और बढ़ेगा। अभी सिर्फ 18 मामलों की ही जांच की गई है। राजनीतिक दल का हाथ है या नहीं, यह जांच का विषय - रावत से जब यह पूछा गया कि क्या उन्हें इसके पीछे किसी राजनीतिक दल का हाथ लगता है, इस पर उन्होंने कहा, यह जांच का विषय है और कुछ भी कहना अभी बेहद जल्दबाजी होगा। हालांकि उन्होंने यह कहा कि जो भी दोषी पाया जाएगा, फिर चाहे वह राजनीतिक रूप से कितना ही शक्तिशाली क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। 7वें ऑफिशियल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी - सीएम रावत ने कहा, 6 ऑफिशियल्स को घोटाले में उनकी कथित रोल के लिए सस्पेंड किया गया है जबकि 7वें ऑफिशियल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी जो रिटायर हो चुका है। - सीएम ने कहा, जिन ऑफिशियल्स को सस्पेंड किया गया है, उनमें दिनेश प्रताप सिंह, अनिल कुमार शुक्ला, सुरेंद्र सिंह जंगपंगी, जगदीश लाल, भगत सिंह फोनिया और एन एस नांग्याल शामिल हैं। एक अन्य ऑफिशियल हिमालय सिंह मारतोलिया के भी इस घोटाले में शामिल होने की आशंका है, लेकिन उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करनी होगी क्योंकि वह रिटायर हो चुके हैं।
    Last Updated: March 26, 08:37 AM
  • नई दिल्ली. फेमस शायर, गीतकार और स्क्रिप्ट राइटर जावेद अख़्तर अब दैनिक भास्कर के रीडर्स के लिए लिखेंगे। यह पहली बार है कि वे किसी अखबार में नियमित रूप से लिख रहे हैं। भारतीय समाज व संदर्भों को लेकर उनके अपने विचार हैं। शुरुआत समाज, सिनेमा और सेक्युलरिज़्म लेख से... समाज में दो मुसलमान हो गए। एक वह जो पर्दे पे दिखाई दे रहा है और शेरवानी पहने, गाव-तकिये से टिका, शमा के सामने कोई ख़ूबसूरत सी ग़जल गा रहा है और दूसरा, मोहल्ले की गली में रहने वाला मुसलमान जिसकी साइकिल के पंक्चर जोड़ने की दुकान है और जिसे एक भी शेर याद नहीं है। हमारे शरीर का कुछ हिस्सा कभी नहीं सोता। किडनी, लिवर, दिल और दिमाग़ हमेशा जागते रहते हैं। अपना काम करते रहते हैं। लेकिन दिमाग़ अगर काम करता रहता है, तो हम सोते कैसे हैं? क़ुदरत के पास इस सवाल का अनोखा जवाब है। ज़हन की अपनी ही अनूठी शैली है, जो आंख बंद होते ही बदल जाती है। आंख बंद होते ही वास्तविकता सपनों में तब्दील हो जाती है। सपने वास्तविकता का ही प्रतीकात्मक (सिंबॉलिक) रूप हैं। सिनेमा भी किसी सपने की तरह है। समाज की असलियत की प्रतीकात्मक शक्ल। जब भारतीय सिनेमा में धर्म निरपेक्षता का सवाल सामने आता है, तो इसका जवाब समाज की उस असलियत में भी है, जिसकी कहानी यह तस्वीरें कह रही हैं। अगर आप इन तस्वीरों के असली अर्थ तक पहुंच जाएं तो वास्तविकता की कई तहें आप के सामने खुल जाएंगी। और इसी तरह अगर आप समाज के आर्थिक, सामाजिक और धार्मिक पहलुओं पर ग़ौर करें तो पर्दे पर तैर रहे इन ख्वाबों के मतलब भी मिल जाएंगे। अब असलियत और सपनों को समझने के इस पूरे प्रोसेस में एक अहम रोल वक़्त का भी है, यानी हर सपना अपने ही दौर की असलियत बयान करता है। हिंदी सिनेमा का वजूद 1933 में बनी पहली बोलती फ़िल्म, आलम आरा, से शुरू होता है। 50 गानों वाली इस फ़िल्म से लेकर आज तक के दौर तक हमारी फ़िल्मों की ज़बान शुद्ध उर्दू या शुद्ध हिंदी नहीं रही बल्कि एक मिली-जुली-सी ज़बान ही फ़िल्म की ज़बान रही है, जिसे कभी हिंदुस्तानी कहा जाता था। पिछले चंद बरसों से हमारी फ़िल्मों पर हिंग्लिश का हमला हुआ है वरना अब तक तो हिंदी और उर्दू का मिश्रण ही हमेशा से हमारी फ़िल्मों की ज़बान था। पंकज मलिक के गीत के बोल देखिए, झड़ते हैं फूल फागुन के फागुन के महीने में, मैं तुमसे जुदा होता हूं इक दर्द लिए सीने में। पहली लाइन, झड़ते हैं फूल फागुन के, उत्तर भारत के किसी लोक गीत की याद दिलाती है जबकि दूसरी लाइन, मैं तुमसे जुदा होता हूं इक दर्द लिए सीने में, किसी उर्दू ग़जल की छाप लिए हुए है। बात समझ में आती है, अगर आप समाज और देश में सब तक पहुंचना चाहते हैं तो आपकी भाषा या बर्ताव, किसी एक तरफ़ का तो नहीं हो सकता। आपको वही ज़बान बोलनी होगी, जो हर वर्ग और दर्जे के इंसान के दिल को लगे। निसंदेह, भारतीय सिनेमा ने जब बोलना सीखा तो उसने इसलिए हिंदुस्तानी बोली को अपनाया कि उसे सारे हिंदुस्तान से बात करनी थी। हमें यह भी समझना होगा कि भाषा केवल शब्दों का खेल नहीं होती, भाषा वह साधन है, जिस पर तहज़ीब, संस्कार और ज़िंदगी के बहुत से मूल्य सफर करते हैं। अगर ज़बान दो ज़बानों का मिश्रण है तो फिर उसकी तहज़ीब, और संस्कार भी दो तहज़ीबों और दो संस्कारों का मिश्रण होंगे। इसी संस्कृति, इसी तहज़ीब को हमेशा से गंगा-जमनी कहा गया है। तीस और चालीस के दशक की ब्लैक एंड व्हाइट फ़िल्में अगर आप देखेंगे तो उनमें बहुत से ठाकुर साहब और तिवारीजी भी आपको आदाब अर्ज़ कहते हुए मिलेंगे। आज बहुत कम लोग जानते होंगे कि आदाब शब्द, अदब शब्द का बहुवचन है। अदब के मानी हैं सम्मान, क्योंकि यह सलाम धार्मिक नहीं है, इसलिए अवध में हिंदू और मुसलमान, दोनों ही में आम था। मुझे याद है कि जब मैं छोटा था, तो लखनऊ में लिबरल मुस्लिम्स सलामो अलयकुम कहने के बजाय, आदाब अर्ज़, कहना ही पसंद करते थे, क्योंकि यह एक सेक्युलर सलाम है। अगर समाज के यह संस्कार थे तो कोई हैरत की बात नहीं, कि वहीं बहुत से मुस्लिम शायरों ने राम, कृष्ण और शिव पर कविताएं लिखीं। होली, दिवाली और बसंत पर अनगिनत गीत लिखे, तो वहीं ऐसे हिंदू शायर भी थे जिन्होंने इस्लामिक रीत-रिवाज पर न जाने कितनी नज़्में लिखी हैं। मेरे पिता, श्री जांनिसार अख़्तर ने हिंदुस्तान हमारा, नाम से दो वॉल्यूम कंपाइल किए थे, जिसमें ऐसी बहुत-सी शायरी मिल सकती है। हिंदुस्तान हमारा अब भी बाज़ार में अवेलेबल है। जो बात नहीं समझ में आने वाली है, वह यह कि वह सिनेमा जो इस सेक्युलरिज़्म को दर्शा रहा था वह 1947 में भारत विभाजन जैसे बड़े हादसे को दर्शाने में क्यों झिझक गया। बरसों तक भारतीय सिनेमा एक इतनी बड़ी ट्रेजडी पर पूरी तरह चुप साधे रहा। देश के दो टुकड़े हो गए, कोई तेरह लाख लोग मारे गए। खेतों के बीच में सरहदें खींच दी गईं, और एक भी फ़िल्म मेकर यह देखने, या शायद दिखाने की हिम्मत नहीं कर सका। शायद इसका कारण यह है कि जो तेरह लाख मारे गए थे, उनमें हिंदू भी थे मुसलमान भी। अब इस हत्या का दोष फिल्म मेकर देता भी तो किसको देता? दोनों ही उसके ऑडियंस थे। इतना ज़रूर हुआ कि बरसों तक कोई ऐसी फ़िल्म नहीं बनी, जिसे आज हम लोग मुस्लिम सोशल कहते हैं। वे फिल्में, जो मुस्लिम सोशल कहलाती हैं, आज़ादी के बारह साल बाद यानी 1959 में एेसी पहली फ़िल्म, चौदहवीं का चांद, रिलीज़ हुई और सुपर हिट हो गई। उसके बाद मेरे महबूब, मेरे हुज़ूर, और बहू बेगम, जैसी और कई फ़िल्में आईं और इन्होंने हिंदुस्तानी मुसलमान की एक ऐसी सुंदर छवि दिखाई, जो सच्चाई से कोसों दूर थी। मेरा सारा बचपन लखनऊ में गुज़रा है, मैंने किसी को अपने बाप को अब्बा हुज़ूर कहते नहीं सुना। इन मुस्लिम सोशल के हीरो या तो कोई शायर या नवाब होते थे। और सिर्फ़ शायराना ज़बान में बात करते थे। इन फ़िल्म्स के चरित्र बड़ी-बड़ी हवेलियाें में रहते थे। हर चिलमन के पीछे एक बेहद ख़ूबसूरत हीरोइन ग़रारा पहने, दुपट्टा सिर पर रखे, कोई शेर पढ़ रही होती थी। बड़े-बड़े शीशे के फ़ानूस, सफ़ेद गाव-तकिये, जलती हुई शम्अ और जिंदगी में सिर्फ़ एक समस्या, जिसका नाम है मुहब्बत। यह फ़िल्में उतनी झूठी थीं, जितनी हॉलीवुड की काउ बॉय फ़िल्में। सच यह है कि काउ बॉय अमेरिका के ग्वाले थे, जिनकी कमर पर दो पिस्तौलें बांध के उन्हें क्या से क्या बना दिया गया। मेरे छोटे भाई डॉ. सलमान अख़्तर, अमेरिका में रहते हैं। वह एक बार किसी पार्टी में गए जहां उन्हें कुछ हिंदुस्तानी मिले। उनमें से एक को जब यह पता चला कि यह डॉ. सलमान अख़्तर हैं और लखनऊ के रहने वाले हैं तो उसने बड़ी हैरत और ख़ुशी से पूछा-वाह साहिब! लखनऊ में तो आपके घर में रोज़ मुजरे होते होंगे!!! यह असर था मुसलमानों की उस छवि का जो भारतीय सिनेमा ने गढ़ दी थी। तो इस तरह से समाज में दो मुसलमान हो गए। एक वह जो पर्दे पे दिखाई दे रहा है और शेरवानी पहने, गाव-तकिये से टिका, शम्अ के सामने कोई ख़ूबसूरत सी ग़जल गा रहा है और दूसरा, मुहल्ले की गली में रहने वाला मुसलमान जिसकी साइकिल के पंक्चर जोड़ने की दुकान है, और जिसे एक भी शेर याद नहीं है। बात अगर फिर यहीं तक रह जाती कि लोगों को पर्दे पर वह शायर या नवाब मुसलमान तो अच्छा लगता और साइकिल की दुकान वाला नहीं, तो भी कोई अच्छी बात न होती, लेकिन बात इससे आगे गई। हुआ यह कि साइकिल की दुकान वाले को भी य़कीन हो गया कि यह सारी हवेलियां, गाव-तकिये, चिलमनें और शम्अ उसके अतीत का हिस्सा हैं, जो कुछ लोगों ने उससे छीन ली हैं, यानी, दोनों ही तरफ़ लोग सच्चाई से दूर हो गए। लेकिन इस घाटे के सौदे में भी कुछ फ़ायदा था। हुआ यूं कि वक्त के साथ एक अच्छा मुस्लिम रोल हमारी दूसरी फ़िल्मों में भी आ गया। वह जंजीर, रोटी, कपड़ा और मकान, का पठान हो, जो दोस्ती के लिए जान दे सकता था या शोले, का इमाम, जो एक बेटे को खोने के बाद भी गांव के लिए, जो यहां देश का सिंबॉल है, और भी बलिदान देने को तैयार था। यह कहानियां और यह रोल्स, जब मैं और सलीम साहब लिख रहे थे, तो हमारे ध्यान में ऐसी कोई बात नहीं थी, लेकिन अब जब पलटकर देखता हूं तो समझ में आता है कि हम, जो कि समाज का हिस्सा थे, वैसे ही सोच रहे थे जैसे समाज सोच रहा था। एक बात और बड़ी अजीब और दिलचस्प है। भारतीय कमर्शियल सिनेमा में धर्मनिरपेक्षता की ज़िम्मेदारी हमेशा हिंदू किरदार ही की रही। आपने कई बार फ़िल्मों में देखा होगा कि कोई हिंदू किरदार क़ुरआन को सिर-माथे से लगाकर चूमता है या किसी दरगाह से उड़कर आई हरी चादर हिंदू हीरो की जान बचाती है। लेकिन आपने कभी किसी मुसलमान किरदार को गीता या रामायण को माथे लगाते नहीं देखा होगा। मैंने तो आज तक किसी फ़िल्म में किसी मुसलमान को होली खेलते हुए नहीं देखा। जबकि सच यह है कि भारत में हर साल न जाने कितने मुसलमान होली खेलते हैं। नेशनल आर्ट गैलरी देहली में मैंने एक बार जहांगीर के दरबार के एक चित्रकार, मंसूर, की पेंटिंग देखी थी जिसमें जहांगीर को होली खेलते दिखाया गया है। जहांगीर होली खेलता ही होगा वरना उसके दरबारी पेंटर की हिम्मत तो नहीं हो सकती कि वह कुछ ऐसा दिखाए। मुश्किल यह है कि इन दिनों जो मुसलमान होली खेलते हैं वह आम इंसान हैं, बादशाह नहीं, वरना शायद उनकी भी तस्वीर बन जाती। हिंदुस्तानी फ़िल्म इंडस्ट्री ने आपको छुआछूत, या बाल विवाह और विधवा विवाह जैसे मुद्दों पर तो बड़ी बहादुरी से फ़िल्में दीं, और खुल के ग़लत धार्मिक प्रथाओं के बारे में बात की, लेकिन आप कभी किसी अल्पसंख्यक की किसी ग़लत प्रथा पर बनी फ़िल्म नहीं देखेंगे। निकाह, नाम की एक फ़िल्म आई तो ज़रूर थी लेकिन वह एक ख़ास किरदार और उसके तलाक़ पर बात करती है। सुजाता या अछूत कन्या की तरह बुनियादी ढांचे पर सवाल नहीं करती। अगर आप ध्यान से देखें तो समाज में भी हालात कुछ ऐसे ही हैं। भारत में मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत मुसलमानों को कुछ विशेष अधिकार दिए गए, उनमें से कुछ ऐसे अधिकार भी हैं, जो उन्हें अक्सर मुस्लिम देशों में भी नहीं मिलते, मगर इन विशेष अधिकारों और क़ानूनों को कोई हाथ भी नहीं लगाता। शायद इस डर से कि अल्पसंख्यक वर्ग की धार्मिक भावनाएं आहत हो जाएंगी। लेकिन, एक सेक्युलर देश में तो ऐसा नहीं होना चाहिए। यह तो हुई एक तरफ़ की बात। आइए, अब दूसरी तरफ चलते हैं। हमारा समाज विरोधाभासों से भरा हुआ है। यहां एक तरफ़ इस देश के मुसलमानों को कुछ ऐसे विशेष अधिकार हैं, जो बांग्लादेश और पाकिस्तान के मुसलमानों के पास भी नहीं हैं। वहीं 1959 में विभाजन के बाद जबलपुर में हुए पहले मुस्लिम विरोधी दंगे से लेकर आज तक हज़ारों मुस्लिम विरोधी दंगे हुए हैं, जिनमें न जाने कितने लोग मारे गए हैं, िकतने घर और दुकान जलाई गई हैं। कितनी इज़्ज़तें लूटी गई हैं। और हर बार न्याय करने के बजाय एक कमीशन बैठा दिया गया है। फिर उस कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में दंगे के जिम्मेदारों की तरफ़ अंगुली भी उठाई है, मगर उस रिपोर्ट का नसीब हर बार रद्दी की टोकरी ही बना है। एक बात और देखने वाली है। समाज, अल्पसंख्यकों के प्रति,संवेदनशीलता दिखाने को तो तैयार है, लेकिन अपनी शर्तों पर। क्या यह सिर्फ एक इत्तेफ़ाक है कि अछूत कन्या, सुजाता, जूली, बॉम्बे, वीर-ज़ारा फ़िल्मों में जब इंटर कम्यूनल या इंटर कास्ट विवाह की बात आती है तो लड़का हमेशा ऊंची जाति के हिंदू परिवार से ही होता है। इसका संदेश साफ़ है कि आप अगर इतनी एकता और समानता चाहते हैं तो यह हमारी शर्तों पर ही होगा। देश की राजनीति में जैसा भी मौसम आता है उसका असर हमें फ़िल्मों में भी दिखाई देता है। पचास की दहाई में फ़िल्मिस्तान ने एक फ़िल्म बनाई थी बाबर। बाबर, उस फ़िल्म का हीरो था क्या आज आप ऐसा सोच सकते हैं। 60 और 70 की दहाई में शंकर हुसैन, और, अमर अकबर एंथोनी, जैसे नामों की फ़िल्में बनीं। और 80 की दहाई में जहां एक तरफ़ आडवाणीजी, राजनीति की दुनिया के सुपरस्टार बन गए, वहीं सोशल फ़िल्मों के टाइटल कुछ ऐसे हुए जो पहले सिर्फ धार्मिक फ़िल्मों के होते थे जैसे, राम-लखन, जय शिव शंकर, यह नाम बहुत अच्छे हैं, मगर यह भी सच है कि 50, 60 और 70 की दहाई में यह नाम सोशल फ़िल्मों के नहीं, धार्मिक फ़िल्मों के होते थे। यह भी 80 के दशक में ही हो सकता था कि पहली बार किसी मुस्लिम किरदार को विलेन दिखाया गया। तेज़ाब, का लोटिया पठान, भारतीय सिनेमा का पहला मुस्लिम विलेन था। मैंने उस फ़िल्म के गीत लिखे थे, उसके निर्माता-निर्देशक एन. चंद्रा, मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं, और बहुत अच्छे इंसान। मुझे यकीन है कि उन्होंने इस किरदार का नाम सिर्फ़ इसलिए रखा होगा कि यह एक रोचक किरदार है, लेकिन सोचने वाली बात यह है कि यह रोचक किरदार इससे पहले क्यों वजूद में नहीं आया। इस वक्त मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि ऐसी कोई बात न उनकी सोच में होगी और न मुझे इस बात का खयाल आया था। होता यह है जो समाज में हो रहा है वह चुपके से फ़िल्मों में भी आ जाता है, कब और कैसे हमें पता भी नहीं चलता। यह मानना पड़ेगा कि हिंदी फ़िल्में एक ज़माने तक ईसाई समुदाय की तरफ ज़्यादा संवेदनशील नहीं रही हैं। पर्दे पर आने वाली ईसाई जूली, मोना और रीटा होती थीं। जो या तो किसी गैंग की लड़की होती थी या कैबरे डांसर। मगर जब से फ़िल्म की इज्ज़तदार हीरोइन शीतल, सुनीता और रोमा ने वही कपड़े पहनने शुरू कर दिए, जो जूली और मोना पहनती थीं तो फिर उनकी ज़रूरत नहीं रही। जो ईसाई पुरुष किरदार होते थे वह या तो रॉबर्ट, या पीटर नाम के गैंगस्टर या अच्छे दिल के शराबी होते थे। हमने स्क्रीन पर सच्चे और बहादुर सिख तो कई बार देखे हैं मगर कोई सिख सर्जन नहीं देखा। क्यों नहीं देखा यह आप भी सोचिए। मुझे लगता है कि बरसों तक हिंदी सिनेमा ने सेक्युलरिज़्म का जो रूप अपनाया है वह समाज के सेक्युलरिज़्म की ही तस्वीर था। ख़ुशी की बात यह है कि आगे चल कर सरफ़रोश, रंग दे बसंती, जैसी फ़िल्में भी बनीं, जिन्होंने कुछ ऐसे सवाल उठाए, जो उठाए जाने चाहिए। मुझे एक छोटी-सी फ़िल्म, इकबाल, बड़ी अच्छी लगी थी। जहां इकबाल नाम का एक गूंगा-बहरा मुस्लिम लड़का क्रिकेटर बनना चाहता है। उसका पिता कोई शायर या नवाब या दबंग पठान नहीं है, एक मामूली सा किसान है। उतना ही साधारण, जैसे भारत के हर किसान होते हैं। उस फ़िल्म में इकबाल बड़ा खिलाड़ी बन सकेगा कि नहीं, इस बारे में उसके टेलेंट की बात होती है। कहीं इस बात का न कोई महत्व है और न बखान कि इस लड़के का नाम इक़बाल है और यह मुसलमान है। इक़बाल अच्छा खिलाड़ी है और वह फ़िल्म के ख़त्म होते-होते कामयाबी हासिल कर लेता है। मैं ऐसा विश्वास रखता हूं कि भविष्य में हमारी पीढ़ी ऐसी ही फ़िल्में बनाएगी, जहां कहानी के किरदार अपने धर्म, जाति और रंग से नहीं पहचाने जाएंगे बल्कि उस चरित्र से जाने जाएंगे, जो सिर्फ़ उनका अपना है। जावेद अख्तर -Twitter @Javedakhtarjadu
    Last Updated: March 26, 08:14 AM
  • नई दिल्ली/जोधपुर. नोएडा सेक्टर 18 में रहने वाले फैज़ अहमद सिद्दीकी कुछ दिन पहले पिता बने हैं। उनकी वाइफ को जुड़वा बेटियां हुई हैं। प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं। कंपनी ने उन्हेंछुट्टी नहीं दी, लिहाजाउनकी पत्नी को दोनों बेटियों की देखरेख अकेले करनी पड़ रही है। दरअसल, हाल ही में लोकसभा में पास हुए मैटरनिटी बेनिफिट (अमेंडमेंट) 2016 बिल में महिलाओं के लिए मैटरनिटी लीव 12 हफ्ते से बढ़ाकर 26 हफ्ते (6 महीने) कर दी गई है, लेकिन इसमें पिता के लिए एक भी दिन छुट्टी देने का कोई प्रोविजन नहीं किया गया है। यह बिल अब कानून की शक्ल लेगा। देश में पैटरनिटी लीव को लेकर कानून नहीं... - नोएडा का केस तो केवल एक बानगी है, देश में पैटरनिटी लीव को लेकर कोई कानून नहीं होने के कारण नवजात शिशुओं को उनके पिता का साथ शुरुआती समय में बेहद कम मिल पाता है। -DainikBhaskar ने इस बारे में जब भारतीय मजदूर संघ से बातचीत की तो उसके अध्यक्ष बैजनाथ राय ने बताया कि बच्चे के जन्म के समय पिता को छुट्टी मिलना बेहद जरूरी है, क्योंकि अब ज्वाइंट फैमिली का ट्रेंड खत्म हो रहा है। मैटरनिटी बेनिफिट (अमेंडमेंट) बिल को लेकर हमसे चर्चा हुई थी। हमने बिल ड्राफ्ट होते समय मंत्रालय में चर्चा के दौरान मिनिस्टर और सेक्रेटरी को एक महीने के वैतनिक पैटरनिटी लीव का भी सुझाव दिया था, लेकिन दुर्भाग्य से हमारा सुझाव माना नहीं गया। -सातवें वेतन आयोग के प्रेसिडेंट और सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस अशोक माथुर ने भी बताया कि हमने अपनी सिफारिशों में यह कहा था कि पिता को बच्चे के जन्म के समय 3 से 6 हफ्ते की छुट्टी मिलनी चाहिए। क्या था इस सलाह का मकसद? - बिल में इस प्राेविजन को रखने की सलाह देने के पीछे अहम मकसद यह था कि छोटे परिवार में रहने वाली महिलाओं को ऐसे समय में पति का मदद मिल सके। विदेशों और मल्टी नेशनल कंपनियों में इसी मकसद से पैटरनिटी लीव दी जाती है। इसलिए नहीं किया गया ये प्रोविजन - बिल ड्रॉफ्ट के समय लेबर एंड इम्प्लॉयमेंट मिनिस्ट्री के सेक्रेटरी रहे शंकर अग्रवाल कहते हैं कि हमने इंडस्ट्री, देश और सोशल व कल्चरल एक्टिविटीज को ध्यान में रखते हुए पैटरनिटी लीव नहीं दिया है। किसी कंपनी में पति-पत्नी काम कर रहे हैं तो ऐसी स्थिति में दोनों को छुट्टी मिलने में मुश्किल भी होती है। फ्यूचर में कभी जरूरत होती है तो फिर पैटरनिटी लीव दिया जा सकता है। वैसे जरूरत होने पर इम्प्लॉइज को छुट्टी तो मिलती ही है। सिर्फ मैटरनिटी लीव दिया जाए तो महिलाओं को होगी ये मुश्किल -इस बारे में देश की सबसे बड़ी ह्यूमन रिसोर्स सर्विस कंपनी टीमलीज़ सर्विसेज़ की वाइस प्रेसिडेंट सोनल अरोरा कहती हैं, मैटरनिटी बिल में पैटरनिटी लीव को शामिल करना चाहिए था। - मौजूदा स्थिति में सरकार की अच्छी मंशा है कि महिला इम्प्लॉइज को फायदा हो, लेकिन इसका उल्टा भी हो सकता है क्योंकि अगर सिर्फ मैटरनिटी लीव ही दिया जाएगा तो महिलाओं को इम्प्लॉयमेंट हासिल करने में भी मुश्किल होगी क्योंकि नौकरी देने वाली कंपनी भी हिचकेगी। - ज्वाइंट फैमिली न होने के चलते बच्चे को पालने में पिता का भी अहम रोल हो गया है। वैसे देश में प्राइवेट सेक्टर में मल्टी नेशनल कंपनियोंके साथ ही प्राइवेट कंपनियां भी तीन से सात दिन तक की छुटटी दे रही हैं। लेकिन इसका फायदा बहुत छोटे से हिस्से को ही मिल रहा है। एक वक्त में मां और बच्चा जब तक हॉस्पिटल में हैं, तब तक ही छुट्टी मिल जाती है, लेकिन बच्चे के घर आते ही पिता जॉब पर चला जाता है। यहां मिलती है देश में सबसे लंबी पैटरनिटी लीव -देश में सबसे लंबी पैटरनिटी लीव देने वाली कंपनी कमिन्स इंडिया के डायरेक्टर प्रदीप भार्गव कहते हैं, हमने मैटरनिटी बेनिफिट बिल आने के पहले ही अपने इम्प्लॉइज को एक महीने का पैटरनिटी लीव देना शुरू कर दिया है। चूंकि अभी ज्यादातर परिवार में बच्चे के लिए सिर्फ मां और पिता ही होते हैं इसलिए यह जरूरी है। आज के दौर में मां को भी इमोशनल सपोर्ट की जरूरत होती है। बच्चे के जन्म के पहले महीने में हॉस्पिटल की भागदौड़, टीका की भी जरूरत होती है। -कोअचीव कंपनी के डायरेक्टर मधु दामोदरन कहते हैं, फैक्टरी एक्ट या शॉप एंड कमर्शियल इस्टेबलिशमेंट एक्ट के तहत भी किसी भी राज्य में पैटरनिटी लीव नहीं दिया जाता है। हालांकि प्राइवेट सेक्टर मेंमल्टी नेशनल कंपनियां, आईटी और इससे जुड़े सेक्टर में पैटरनिटी लीव दिया जा रहा है। तीन से 10 दिन तक की छुट्टी देती हैं कंपनियां -ज्यादातर कंपनियों में तीन से 10 दिन तक की छुट्टी दी जाती है। वैस देश में कई कंपनियां अब ऐसी स्थिति में माता-पिता को घर से काम करने की भी छूट दे रही हैं। -इस बारे में महिंद्रा एंड महिंद्रा के एक्जीक्यूटिव वाइस प्रेसीडेंट (ग्रुप ह्यूमन कैपिटल एंड लीडरशिप डेवलपमेंट) डॉ. प्रिंस अगस्तिन कहते हैं, हम किसी भी इम्प्लॉई को, चाहे वो ऑफिस वर्क करता हो या कारखाने में, हम पैटरनिटी लीव देते हैं। चूंकि ऑफिस में फाइव डे वीक होता है इसलिए अफसरों-इम्प्लॉइज को 5 दिन की छुट्टी दी जाती है। वहीं फैक्टरी में सिक्स डे वीक होता है इसलिए उन्हें छह दिन की छुट्टी दी जाती है। इस दौरान अगर शनिवार और रविवार जैसे छुट्टी के दिन या कोई अन्य छुट्टी का दिन आ जाता है तो उसे इसमें नहीं गिनते हैं। - इसके अलावा हम सात दिन घर से काम करने की फैसिलिटीज भी देते हैं। छुट्टी और घर से काम करने की फैसिलिटी इम्प्लॉइज बच्चे के जन्म से तीन महीने पहले या तीन महीने बाद के छह महीने के दौरान ले सकते हैं। बिल में दूसरी कमी ये - इस बिल में दूसरी कमी यह रह गई है कि इसमें अनऑर्गेनाइज्ड क्षेत्र में काम करने वाली वुमन इम्प्लॉइज के बारे में कुछ भी नहीं है। जबकि कुल वुमन इम्प्लॉइज में 90% तो अनऑर्गेनाइज्डक्षेत्र से ही हैं। 2015 में इंडियन लॉ कमीशन ने भी सुझााव दिया था कि 1961 के एक्ट के प्रोविजंस में अनऑर्गेनाइज्ड वुमन वर्कर्स सहित सभी वुमन इम्प्लॉइज को शामिल किया जाना चाहिए। मैटरनिटी बिल में ये है खास - पहले सरकारी और प्राइवेट संस्थानों में नौकरीपेशा महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान 12 हफ्ते का मैटरनिटी लीव दिया जाता था। इस बिल में इसे बढ़ाकर 26 हफ्ते किया गया है। हालांकि दो या इससे अधिक बच्चे पहले से होने पर केवल 12 हफ्ते लीव का प्रोविजन है। - अभी तक तीन महीने से कम उम्र वाले बच्चे को गोद लेने या कमीशनिंग करने वाली महिलाओं के लिए मैटरनिटी लीव का प्राेविजन नहीं था। अब ऐसी महिलाओं को भी 12 महीने की छुट्टी मिलेगी। - 50 या 50 से अधिक इम्प्लॉइज जिस संस्थान में काम करते हैं, उन संस्थानों को एक तय दूरी के अंदर क्रेश की फैसिलिटी देनी होगी। महिला वर्कर्स को वहां अपने बच्चे के पास चार बार जाने की इजाजत होगी। - कंपनियों को नई वुमन इम्प्लॉइज अप्वाइंट करने से पहले उन्हें लिखित या इलेक्ट्रॉनिक मीडियम से मैटरनिटी बेनिफिट के बारे में बताना होगा। 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों में भी पैटरनिटी लीव की सलाह इसके लिए पहले हमें प्राइवेट सेक्टर से बात करनी पड़ेगी - लेबर एंड इम्प्लॉयमेंट मिनिस्टर बंडारू दत्तात्रेय ने कहा, पैटरनिटी लीव में कॉस्ट जुड़ी हुई है। इसके लिए पहले हमें प्राइवेट सेक्टर से बात करनी पड़ेगी। अभी इसमें तुरंत हम कुछ नहीं कर रहे हैं। इससे जुड़े पक्षों की राय जानने के बाद ही कुछ कह सकते हैं। हमने कहा था- पिता को 3-6 हफ्ते की छुट्टी मिलनी चाहिए - 7वें वेतन आयोग के अध्यक्षजस्टिस अशोक माथुर ने कहा, हमने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों में कहा था कि 3 से 6 हफ्तों की पैटरनिटी लीव मिलनी चाहिए। ऐसे समय पर महिलाओं को पति की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। इसलिए ये जरूरी है। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें, दुनियाभर में सरकारें कितना पैटरनिटी लीव दे रही हैं...
    Last Updated: March 26, 07:52 AM
  • नई दिल्ली. पिछले हफ्ते राजा रवि वर्मा की पेंटिंग 11.09 करोड़ रु. में बिकी है। दमयंती नाम के इस पोर्ट्रेट के 4.58 करोड़ रुपए में बिकने का अनुमान था। जानते हैं भारत की सबसे महंगी 5 पेंटिंग्स और इन्हें बनाने वाले कलाकारों के बारे में, जो हर बार नया रिकॉर्ड बनाती हैं।राजा रवि वर्मा की पेंटिंग से कीमती हैं ये पांचपेंटिंग... 1# वीएस गायतोंडे की29.3 करोड़ रुपए की पेंटिंग - गायतोंडे की 1995 में बनाई यह देश की सबसे महंगी पेंटिंग है। गुमनाम खरीदार ने इसे फोन पर 2015 में खरीदा था। -कीमत के मामले में देश की तीन सबसे महंगी पेंटिंग्स में से दो गायतोंडे की बनाई हुई हैं। 2013 में उनकी एक अॉइल पेंटिंग 23.7 करोड़ में बिकी थी। 2# 26.9 करोड़ रुपए में बिकी थी बर्थ नाम की पेंटिंग -एफएन सूजा ने बर्थ नाम की पेंटिंग 1955 में बनाई थी। गोवा में जन्मे सूज़ा 1950 में लंदन चले गए थे। -पिछली बार यह पेंटिंग 2015 में बिकी थी। इसके पहले 2008 में टीना अंबानी के हार्मनी आर्ट्स फाउंडेशन ने इसे 11.25 करोड़ में खरीदा था। 3# 19.7 करोड़ रुपए में बिकी थीमहिषासुर पेंटिंग -तैयब मेहता ने महिषासुर पेंटिंग 1994 में बनाई। आखिरी बार यह 2013 में बिकी। इसके पहले 2008 में 8 करोड़ में बिकी थी। -इस पेंटिंग की इन्सपिरेशन उन्हें शांतिनिकेतन की यात्रा के बाद मिली। मेहता ने कॅरिअर के शुरू में फिल्म लेबोरेटरी में काम किया। एक फिल्म भी बनाई। 4# ग्रीक लैंडस्केप -ग्रीक लैंडस्केप नाम की यह पेंटिंग सबसे पहले 1960 में कृष्णन खन्ना ने सिर्फ 1000 रु. में खरीदी थी। -अकबर पद्मसी ने इसे 23 की उम्र में बनाया था। 89 साल के पद्मसी ने 2016 में इस पेंटिंग की नीलामी के बाद कहा था कि मैंने इसे 60 साल से नहीं देखा था। ये 19.1 करोड़ रुपए में बिकी। 5# सैयद हैदर रजा की लातेरी -एसएच रजा की इस पेंटिंग का नाम है- लातेरी। 1973 में बनाया था। 2014 में 18.6 करोड़ और 2008 में 10.87 करोड़ में बिकी थी। -रज़ा ने 12 साल की उम्र में पेंटिंग करना शुरू कर दिया था। 1950 में 28 की उम्र में वे पेरिस चले गए। छह दशक तक फ्रांस में रहे। आगे की स्लाइड्स में देखें- भारत की पांच सबसे महंगी पेंटिंग्स...
    Last Updated: March 26, 07:52 AM
  • धर्मशाला.डेब्यू मैच खेल रहे कुलदीप यादव(4/68 विकेट) की शानदार परफॉर्मेंस के बाद भारत ने चौथे टेस्ट मैच के पहले दिन ऑस्ट्रेलिया को पहली इनिंग में 300 रन पर ऑलआउट कर दिया। मेहमान टीम के लिए कप्तान स्टीव स्मिथ ने सेन्चुरी तो वहीं वॉर्नर और वेड ने फिफ्टी लगाई। जवाब में पहले दिन स्टम्प्स तक भारत ने एक ओवर में कोई रन नहीं बनाया था। लोकेश राहुल और मुरली विजय क्रीज पर थे। कैसा रहा पहले दिन का खेल... - ऑस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीव स्मिथ ने मैच में टॉस जीतकर पहले बैटिंग करने का फैसला किया। - कंगारू टीम की शुरुआत बिल्कुल भी अच्छी नहीं रही, दूसरे ही ओवर में 10 रन के कुल स्कोर पर मैट रेनशॉ आउट हो गए। - इसके बाद वॉर्नर और स्मिथ ने मिलकर दूसरे विकेट के लिए 134 रन की पार्टनरशिप कर टीम को संभाल लिया। - पहला सेशन खत्म होने तक मेहमान टीम बहुत मजबूत स्थिति में थी,लंच तक उसका स्कोर 131 रन था और केवल 1 विकेट गिरा था। - लेकिन दूसरे सेशन में मैच पूरी तरह पलट गया।इस दौरान मेहमान टीम ने केवल 77 रन बनाए और 5 विकेट गंवा दिए। टी तक उसका स्कोर 61 ओवर में 208/6 रन हो गया था। - इसके बादतीसरे और आखिरी सेशन में ऑस्ट्रेलिया के बाकी 3 विकेट 92 रन जोड़कर पवेलियन लौट गए। पूरी टीम पहली इनिंग में 88.3 ओवर में ऑलआउट हो गई - भारत की ओर से कुलदीप ने 4, उमेश ने 2 तो वहीं अश्विन, जडेजा और भुवनेश्वर ने 1-1 विकेट लिया। डेब्यू मैच में छा गए कुलदीप - इस मैच में चोटिल विराट की जगह चाइनामैन बॉलर और ऑलराउंडर कुलदीप यादव को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया और डेब्यू मैच में ही उन्होंने कमाल कर दिया। - मैच के पहले ही दिन कुलदीप ने 68/4 विकेट ले लिए। इस दौरान उन्होंने डेविड वॉर्नर, पीटर हैंड्सकॉम्ब, ग्लेन मैक्सवेल और पेट कमिंस को आउट किया। अश्विन ने तोड़ा डेल का वर्ल्ड रिकॉर्ड - आर. अश्विन एक क्रिकेट सीजन में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले बॉलर बन गए हैं। - ये कामयाबी उन्होंने स्टीव स्मिथ का विकेट लेकर हासिल की। ये इस सीजन (2016-17) का उनका 79th विकेट था। - इससे पहले ये रिकॉर्ड साउथ अफ्रीका के डेल स्टेन (78 विकेट) के नाम पर था, जिन्होंने साल 2007-08 में इतने विकेट लिए थे। स्मिथ ने लगाई सेन्चुरी - इस मैच में स्टीव स्मिथ ने टेस्ट करियर की 20वीं सेन्चुरी लगाई। वहीं इस सीरीज में ये उनकी तीसरी सेन्चुरी रही। - वे 173 बॉल पर 111 रन बनाकर आउट हो गए। अपनी इनिंग में उन्होंने 14 चौके भी लगाए। - स्टीव स्मिथ ने डेविड वॉर्नर के साथ मिलकर दूसरे विकेट के लिए 134 रन की पार्टनरशिप की थी। - इस सेन्चुरी को लगाते ही स्मिथ बतौर कप्तान भारत के खिलाफ भारत में तीन टेस्ट सेन्चुरी लगाने वाले दूसरे विदेशी कप्तान बन गए हैं। - उनसे पहले एलिस्टर कुक ने साल 2012-13 में भारत दौरे पर तीन सेन्चुरी लगाई थी। वॉर्नर और वेड ने लगाई फिफ्टी - पहला विकेट जल्दी गिरने के बाद डेविड वॉर्नर ने स्टीव स्मिथ के साथ टीम की इनिंग को संभाल लिया। - डेविड वॉर्नर इस मैच में टेस्ट करियर की 24वीं और भारत के खिलाफ 3rd फिफ्टी लगाई। वे 87 बॉल पर 56 रन बनाकर आउट हो गए। - वहीं 5 विकेट गिरने के बाद बैटिंग करने आए मैथ्यू वेड ने भी मैच के पहले दिन फिफ्टी लगाई। - वेड ने इस मैच में टेस्ट करियर की चौथी फिफ्टी लगाई। वे 125 बॉल पर 57 रन बनाकर आउट हो गए। विराट बन गए वाटर बॉय - भारतीय कप्तान विराट कोहली कंधे की चोट की वजह से इस मैच में नहीं खेल रहे हैं। रांची में तीसरे टेस्ट के दौरान उनके दाएं कंधे में चोट लगी थी जो अबतक पूरी तरह ठीक नहीं हुई है। - 55 टेस्ट बाद ऐसा मौका आया है जब विराट कोई टेस्ट नहीं खेल रहे हैं। उनकी जगह पर अजिंक्य रहाणे इस मैच में कप्तानी कर रहे हैं। - मैच नहीं खेलने के बाद भी 6th ओवर के दौरान विराट कोहली मैदान पर नजर आए। उस वक्त वे वाटर बॉय के रूप में मैदान पर आए थे। - दरअसल विराट टीम मेंबर्स से कुछ बात करना चाहते थे, इसलिए वे ड्रिंक्स लेकर मैदान पर आ गए। इस दौरान उन्होंने प्लेयर्स से बात करते हुए उन्हें अपनी ओर से टिप्स दिए। - जब विराट ड्रिंक्स लेकर आए थे उस वक्त ऑस्ट्रेलिया का एक विकेट गिर चुका था और क्रीज पर स्टीव स्मिथ के साथ डेविड वॉर्नर थे। कैसे आउट हुए ऑस्ट्रेलियाई प्लेयर - ऑस्ट्रेलिया ने टॉस जीतकर पहले बैटिंग करने का फैसला किया। मैच की पहली ही बॉल पर डेविड वॉर्नर को जीवनदान मिला, जब भुवनेश्वर कुमार की बॉल पर स्लिप में करुण नायर ने उनका कैच छोड़ दिया। - पहले ओवर में डेविड वॉर्नर को मिले जीवनदान की भरपाई अगले ही ओवर में उमेश यादव ने पूरी कर दी। दूसरे ओवर की चौथी बॉल पर यादव ने मेट रेनशॉ (1) को बोल्ड कर दिया। इस वक्त टीम का स्कोर 10 रन था। - दूसरे विकेट के लिए भारतीय बॉलर्स को लंबा इंतजार करना पड़ा। अगला विकेट 34.1 ओवर में गिरा, जब कुलदीप यादव नेडेविड वॉर्नर (56) को रहाणे के हाथों कैच कराया। - ऑस्ट्रेलिया का तीसरा विकेट 37.4 ओवर में गिरा, जब उमेश यादव ने नए बैट्समैन के तौर पर आए शॉन मार्श (4) को साहा के हाथों कैच करा दिया। - इसके बाद चौथा विकेट भी जल्द ही गिर गया, जब 44.5 ओवर में कुलदीप ने हैंड्सकॉम्ब (8) को बोल्ड कर दिया। इस वक्त टीम का स्कोर 168/4 रन था। - 10 रन बाद ही ऑस्ट्रेलिया का पांचवां विकेट भी गिर गया। जब कुलदीप यादव ने 48.6 ओवर में मैक्सवेल (8) को बोल्ड कर दिया। - छठा विकेट अश्विन को मिला। 59.5 ओवर में उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई कप्तान को रहाणे के हाथों कैच करा दिया। - 245 रन पर ऑस्ट्रेलिया का सातवां विकेट गिरा, जब कुलदीप ने अपनी ही बॉल पर पेट कमिंस (21) को कैच कर लिया। - आठवां विकेट स्टीव ओकीफे का रहा। टीम का स्कोर जब 269 रन था, तब वे रन आउट हो गए। - रवींद्र जडेजा ने 87.4 ओवर में मैथ्यू वेड (57) को बोल्ड कर मेहमान टीम को नौवां झटका दिया। पहली इनिंग में ऑस्ट्रेलिया का स्कोर बोर्डः बैट्समैन रन बॉल 4 6 डेविड वॉर्नर कै. रहाणे बो. कुलदीप यादव 56 87 8 1 मैट रेनशॉ बो. उमेश यादव 1 6 0 0 स्टीव स्मिथ कै. रहाणे बो. अश्विन 111 173 14 0 शॉन मार्श कै. साहा बो. यादव 4 14 0 0 पीटर हैंड्सकॉम्ब बो. कुलदीप यादव 8 23 1 0 ग्लेन मैक्सवेल बो. कुलदीप यादव 8 17 1 0 मैथ्यू वेड बो. जडेजा 57 125 4 1 पैट कमिंस कै. बो. कुलदीप यादव 21 40 3 1 स्टीव ओकीफे रन आउट 8 16 2 0 नाथन लियोन कै. पुजारा बो. भुवनेश्वर कुमार 13 28 2 0 जोश हेजलवुड नॉट आउट 2 2 0 0 आगे की स्लाइड्स में देखें, मैच के फोटोज...
    Last Updated: March 26, 07:40 AM
  • लंदन. ब्रिटेन के प्रिंस जॉर्ज सितंबर में स्कूल जाएंगे। वह जिस स्कूल में जा रहे हैं वहां पढ़ने की पहली शर्त है दयालु होना। इसी नियम के चलते स्कूल में बेस्टफ्रेंड चुनने की मनाही है। ताकि बाकी बच्चों को बुरा न लगे और कोई एक आपको लेकर पजेसिव न हो जाए। स्कूल का नाम थॉमस बैटरसी है। किंगस्टन पैलेस ने अपने ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट पर यह जानकारी दी है। रॉयल फैमिली का कोई मेंबर को-एड स्कूल में पढ़ने जा रहा है... - पहला मौका है कि रॉयल फैमिली का कोई मेंबर को-एड स्कूल में पढ़ने जा रहा है। - अब तक प्रिंस जॉर्ज के पापा (प्रिंस विलियम), चाचा (प्रिंस हैरी) और दादा (प्रिंस चार्ल्स)-परदादा (प्रिंस फिलिप) सिर्फ ऑल बॉयज स्कूल में पढ़े हैं। - हर साल जॉर्ज की स्कूल फीस चार लाख 60 हजार रु. होगी। जिस नर्सरी में वो अभी पढ़ रहे हैं उसकी हर दिन की फीस ढाई हजार रु. है। - उनका ये स्कूल 40 साल पहले खुला था। इसमें 4 से 13 साल उम्र के 540 लड़के-लड़कियां पढ़ते हैं। स्कूल में एक काउंसलर भी है। जो वहां पढ़नेवाले स्टूडेंट्स के इमोशनल रिस्पांस का रिकॉर्ड रखता है। - यहां आर्ट, बैले, ड्रामा, फ्रैंच, म्यूजिक और फिजिकल एजुकेशन पहले दिन से सिखाया जाता है। - स्कूल में बच्चा चार साल की उम्र में भर्ती होता है और 11 या 13 साल की उम्र में बाहर निकलता है। रॉयल फैमिली ने बदले नियम - पढ़ाई को लेकर रॉयल फैमिली में कुछ बदलाव हुए हैं लेकिन उन्हें बड़े बदलाव नहीं माना जा सकता। - रॉयल फैमिली के लिए घर पर पढ़ने का बंदोबस्त किया जाता था। खासकर लड़कियों के लिए। प्रिंस जॉर्ज की परदादी (क्वीन एलिजाबेथ II) भी होम स्कूल में पढ़ी थीं। - उनके दादा के लिए बकिंघम पैलेस में ही ब्लैकबोर्ड और डेस्क लगवाई गई थी। - प्रिंस चार्ल्स अपने आठवें बर्थडे से पहले शाही नियम को तोड़ पहली बार स्कूल गए थे। उनके दोस्तों को महल का स्वीमिंग पूल इस्तेमाल करने को मिला था क्योंकि राजकुमार के लिए पब्लिक स्वीमिंग पूल का इस्तेमाल गलत माना जाता था। क्या कहना है स्कूल का? - थॉमस स्कूल का कहना है कि ये उनके लिए गर्व की बात है कि प्रिंस जॉर्ज के लिए उनके स्कूल को चुना गया। - ड्यूक एंड डचेस (प्रिंस जॉर्ज के माता-पिता) ने साफ कर दिया है कि वो नहीं चाहते प्रिंस जॉर्ज के लिए स्कूल में कोई भी बदलाव किया जाए। - थॉमस बैटरसी स्कूल किंगस्टन पैलेस से कुछ ही दूरी पर है। - जॉर्ज जुलाई में 4 साल के होने जा रहे हैं। जबकि उनकी बहन प्रिंसेस शार्लोट मई में दो साल की हो जाएंगी और वो गर्मियों में नर्सरी जाना शुरू करेंगी। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें: नर्सरी के पहले दिन केट ने खींची थी बेटे की तस्वीर...
    Last Updated: March 26, 07:38 AM
  • नई दिल्ली. नरेंद्र मोदी ने अगले हफ्ते शिवसेना चीफ उद्धव ठाकरे को डिनर पर बुलाया है। गुड़ी पड़वा के मौके पर एनडीए की सहयोगी पार्टियों के नेता इसमें शामिल होंगे। माना जा रहा है कि इस दौरान राष्ट्रपति चुनाव को लेकर स्ट्रैटजी तैयार की जा सकती है। शिवसेना ने कहा कि बीजेपी शिकायत का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहती है इसलिए पहले ही आम राय बनाने की कोशिश की जा रही है। प्रेसिडेंट प्रणब मुखर्जी का टेन्योर जुलाई में खत्म होगा।ये मोदी की डिनर डिप्लोमैसी... - शिवसेना के सूत्रों ने न्यूज एजेंसी को बताया कि, पीएम ने गुड़ी पड़वा के बाद मीटिंग बुलाई है। जो संभवत: 29 मार्च को रखी गई है। हमारे पार्टी चीफ भी इसमें शामिल होंगे। यह नरेंद्र मोदी की डिनर डिप्लोमैसी है। जिसमें प्रेसिडेंट इलेक्शन के लिए नाम पर सहमति बनेगी। - लोकसभा के अलावा ज्यादातर राज्यों में बीजेपी पॉवर में है। इसलिए वह अपनी सहयोगी पार्टियों को किसी तरह की शिकायत का मौका नहीं देना चाहती है। BJP नेता ने किया था 4 नामों का दावा - हालांकि, एक सीनियर बीजेपी नेता दावा कर चुके हैं कि लालकृष्ण आडवाणी, सुमित्रा महाजन, सुषमा स्वराज और झारखंड के गवर्नर द्रौपदी मुरमु में से किसी एक नाम पर प्रेसिडेंट पोस्ट के लिए आम राय बन सकती है। - बता दें कि यूपीए सरकार के दौरान 25 जुलाई, 2012 को प्रणब मुखर्जीप्रेसिडेंट चुने गए थे। उनका टेन्योर इसी साल जुलाई में खत्म होगा। प्रेसिडेंट इलेक्शन के लिए लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों के अलावा सभी राज्यों के विधायक वोट करते हैं।
    Last Updated: March 25, 22:50 PM
  • रांची. झारखंड में एंटी रोमियो कैम्पेन की आड़ में कपल से बदसलूकी और लूटपाट की गई। लड़का-लड़की रामगढ़ में देवी मंदिर के दर्शन कर लौट रहे थे। इसी दौरान कुछ बदमाशों ने उन्हें घेर लिया। एंटी रोमियो स्क्वॉड का डर दिखाकर 5000 रुपए छीन लिए। घटना गुरुवार की बताई जा रही है, लेकिन इसका वीडियो अब सामने आया है। आला पुलिस अफसरों को ऐसी घटनाएं रोकने के ऑर्डर जारी किए गए हैं।हाथ जोड़कर जाने की मिन्नतें कर रही थी लड़की... - वीडियो में लड़की बदमाशों के हाथ जोड़ती और कई बार छोड़ने की मिन्नतें करती नजर आ रही है। वह वीडियो नहीं बनाने की भी गुहार लगाती है, लेकिन वहां मौजूद आरोपी उन पर गलत हरकतों के आरोप लगाते रहे। - पुलिस के मुताबिक, लड़का-लड़की गुरुवार को देवी मंदिर में पूजा करने के लिए गए थे। बाइक से लौटते वक्त कुछ बदमाशों ने उन्हें रोक लिया और बदसलूकी करने लगे। - आरोपियों ने पुलिस से शिकायत का डर दिखाकर कपल से वसूली की कोशिश की। उन्होंने पैसे नहीं दिए तो मंदिर में दान के नाम पर 5 हजार रुपए लूट लिए। मोबाइल में घटना का वीडियो बनाकर वायरल भी कर दिया। गंभीरता से काम करे एंटी रोमियो स्क्वॉड: ADG - एडीजी अजय भटनागर ने रामगढ़ एसपी को कड़ी कार्रवाई के ऑर्डर दिए हैं, जिसके बाद पुलिस ने मंदिर के एक गांव से 4 लड़कों को हिरासत में लिया। उनसे पूछताछ की जा रही है। - भटनागर ने कहा , पुलिस का एंटी रोमिया स्क्वायड गंभीरता से ड्यूटी करे। ताकि पुलिस की आड़ में शरारती लोग कपल्स को परेशान ना कर पाएं। हमने रेंज के डीआईजी और एसपी को ऐसी घटनाएं रोकने के ऑर्डर जारी किए हैं। - बता दें कि यूपी में बीजेपी सरकार आने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने कॉलेज, मार्केट और पब्लिक प्लेस पर छेड़खानी करने वालों पर कार्रवाई के लिए एंटी रोमियो स्क्वॉड बनाने की बात कही थी। यूपी में पुलिस एक्शन भी ले रही है।
    Last Updated: March 25, 22:32 PM
  • लखनऊ. शारजाह की एअर अरेबिया एअरलाइंस की फ्लाइट की लखनऊ में इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी। इस प्लेन में 182 पैसेंजर्स बैठे थे। एअरलाइन के स्पोक्सपर्सन ने बताया कि एयरक्राफ्ट से परिंदा टकराने की वजह से इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी। काठमांडू से शारजाह जा रही थी फ्लाइट... - स्पोक्सपर्सन ने बताया, 24 मार्च को एअर अरेबिया की फ्लाइट G9-532 काठमांडू से शारजाह जा रही थी। काठमांडू एयरपोर्ट से उड़ान भरने के थोड़ी ही देर बाद फ्लाइट से परिंदा टकरा गया। - परिंदा टकराने के बाद फ्लाइट को लखनऊ के अमौसी एयरपोर्ट की तरफ डायवर्ट करना पड़ा। फ्लाइट लखनऊ में सुरक्षित लैंड हुई, जहां फ्लाइट का रुटीन मेंटेनेंस चेक किया गया। पैसेंजर्स की सुरक्षा सबसे ऊपर - एयरलाइंस ने कहा, लखनऊ में फ्लाइट के सभी पैसेंजर्स को होटल में ठहराया गया है। जब तक उनकी यात्रा दोबारा शुरू नहीं होती, उनकी सहूलियत और सुरक्षा का ध्यान रखना एयरलाइंस की प्राथमिकता है। एअर इंडिया के प्लेन से भी टकराया था परिंदा - इसी हफ्ते अहमदाबाद से लंदन जा रहे एअर इंडिया के प्लेन से भी परिंदा टकरा गया था। प्लेन अहमदाबाद से नेवार्क होते हुए लंदन जा रहा था,लेकिन परिंदा टकराने के बाद उसकी लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग करवानी पड़ी। - परिंदा विमान के सामने वाले हिस्से से टकराया था, जिससे रडार और एंटिना डैमेज हो गया। इसके चलते रिटर्न फ्लाइट भी कैंसल करनी पड़ी।
    Last Updated: March 25, 22:18 PM
  • ग्वालियर. बीएसएफ के 51 साल के इतिहास में पहली बार कोई महिला कॉम्बैट अफसर बनी है। 25 साल की तनुश्री पारीक ने टेकनपुर के बीएसएफ एकेडमी में पासिंग आउट परेड में हिस्सा लिया। इस सेरेमनी में होम मिनिस्टर राजनाथ सिंह भी मौजूद थे। बीएसएफ एकेडमी कैंप में पासिंग आउट सेरेमनी के दौरान तनुश्री ने 67 ट्रेनी ऑफिसर्स की परेड को लीड किया।सेरेमनी के दौरान तनुश्री के कंधों पर होम मिनिस्टर राजनाथ सिंह ने रैंक स्टार्स लगाए। तनुश्री की पोस्टिंग पंजाब में होगी, जहां वो इंडिया-पाकिस्तान बॉर्डर पर एक यूनिट को कमांड करेंगी। राजस्थान की हैं तनुश्री, फिल्म देख BSF ज्वाइन करने की सोची... - तनुश्री पारीक ने हाल ही में DainikBhaskar.com को बताया, मैं जब चार साल की थीं, बीकानेर में बॉर्डर फिल्म की शूटिंग हो रही थी। इसमें BSF का अहम रोल था। पापा शूटिंग के फोटो दिखाकर इन्स्पायर करते। बस वहीं से ठान लिया था कि वर्दी वाली सर्विस में ही जाना है। - बीकानेर में BSF के कामकाज के तरीके को देखा। तब समझ में आया कि आर्मी की तरह ये ऐसी फोर्स है जो 24 घंटे देश की बॉर्डर को महफूज रखती है। - मैंने नौकरी के लिए नहीं, पेंशन के लिए BSF को चुना। साथ ही मेरा फोर्स में जाना तभी मायने रखेगा, जब दूसरी लड़कियां भी BSF ज्वाइन करना शुरू करेंगी। लड़कियां सूरज से बचने के लिए सनस्क्रीन लगाना छोड़ें, धूप में तपकर खुद को साबित करें। मुझे गर्व है कि मैं देश की पहली महिला कॉम्बैट अॉफिसर हूं। एनकाउंटर में आंख गंवाने वाले जवान के साथ राजनाथ के किया लंच - पासिंग आउट परेड में राजनाथ को बीएसएफ के ऑफिसर्स ने एक असिस्टेंट कमांडेंट संदीप मिश्रा के बारे में बताया,जिन्होंने असम में एक एनकाउंटर के दौरान अपनी आंखें गंवा दी थीं। - आंख गंवाने के 4 साल बाद 2000 में संदीप की शादी हुई थी, उनकी 9 साल की बेटी है। राजनाथ संदीप मिश्रा के घर गए और उनके परिवार से मिले। संदीप ने साथ में लंच की रिक्वेस्ट की तो राजनाथ ने उनकी बात नहीं टाली। राजनाथ ने यहां करीब एक घंटा बिताया। - राजनाथ ने कहा, ये देश के लिए प्यार ही है, जिसने संदीप और उनकी पत्नी इंद्राक्षी दोनों को एक किया है। मुझे उनके घर पर लंच करके बहुत खुशी हुई। संदीप को अपनी पत्नी से ताकत मिलती है, जिसने आंखों की रोशनी न होने के बाद भी संदीप के साथ शादी की। शेरा ने किया एकेडमी में होम मिनिस्टर का वेलकम - बीएसएफ एकेडमी में राजनाथ सिंह नेशनल ट्रेनिंग सेंटर फॉर डॉग्स का भी दौरा किया। यहां उनका स्वागत शेरा ने किया। शेरा ट्रेंड डॉग है, ट्रेनिंग सेंटर का हिस्सा है। इस दौरान सिंह ने बीएसएफ की विजिटर्स बुक में भी साइन किया।
    Last Updated: March 25, 21:04 PM
  • गोरखपुर. यूपी का सीएम बनने के बाद योगी आदित्यनाथपहली बार शनिवार को गोरखपुर आए। एमपी इंटर कॉलेज में वेलकम सेरेमनी में उन्होंने कहा- हम प्रधानमंत्रीजी के सबके साथ, सबके विकास के नारे पर काम करेंगे। महजब-जाति के नाम पर किसी से भेदभाव नहीं होगा। विकास सबका होगा, तुष्टीकरण किसी का नहीं होगा, ये मैं भरोसा देता हूं। करीब 25 मिनट की स्पीच में उन्होंने मोदी का 14 बार नाम लिया। वहीं, अमित शाह का 6 बार नाम लिया। स्पीच के आखिर मेंजयश्री राम कहा... कब-कब लिया मोदी और अमित शाह का नाम 1) यह नागरिक अभिनंदन मेरा नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की 22 करोड़ जनता का है, जिसने भारतीय जनता पार्टी और दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता, इस देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर और बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह के नेतृत्व में यूपी में हमें प्रचंड बहुमत दिया है। 2) हम सभी के सामने महती जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्रीजी की भावनाओं के अनुरूप ही देश में जिस तरह बाकी बीजेपी सरकारें लोक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचा रही हैं, वो जिम्मेदारी आज हम सभी के ऊपर भी आई है। स्वाभाविक रूप से मेरे साथ आप सभी की भी जिम्मेदारी बढ़ जाती है। 3) जब प्रधानमंत्रीजी ने पूर्वांचल में फर्टिलाइजर कारखाने और एम्स की नींव रखी थी तो वह पूर्वांचल के विकास की नींव थी। पूर्वांचल ने तब पहली बार देखा था कि विकास क्या होता है। 4) हमारे सामने उदाहरण प्रधानमंत्रीजी का है जिन्होंने नेतृत्व दिया। आदरणीय अमित शाहजी के नेतृत्व में हमें 300 से ज्यादा सीटें मिलीं। यह महती जिम्मेदारी है। यह पद नहीं है। यह कर्तव्य है। 5) प्रधानमंत्रीजी का नेतृत्व हमें सदैव मार्गदर्शन देता है। 6) हमें प्रधानमंत्रीजी, राष्ट्रीय अध्यक्षजी और पार्टी के संसदीय बोर्ड के प्रति आभार व्यक्त करना चाहिए। 7) मुझे केवल कुछ बातें कहनी हैं। आज हम प्रधानमंत्रीजी के सबके साथ, सबके विकास के नाम काम करेंगे। महजब-जाति के नाम पर किसी से भेदभाव नहीं होगा। विकास सबका होगा, तुष्टीकरण किसी का नहीं होगा, ये मैं भरोसा देता हूं। 8) हमारे आदर्श और मार्गदर्शक के रूप में प्रधानमंत्रीजी मौजूद हैं। 9) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी की अंतिम मंशा है कि शासन की योजना का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना ही चाहिए। 10) एक बड़ी योजना के साथ हम कार्य प्रारंभ करने वाले हैं, जिससे सबका विकास होगा। विकास की राह जो प्रधानमंत्रीजी ने गोरखपुर और पूर्वी उत्तर प्रदेश को दिखाई है, वो वास्तविकता में बदलेगी। 11) केंद्र में नरेंद्र मोदीजी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद जितनी भी योजनाएं आईं, उसने हमंे नई राह दिखाई। हमें यही काम पूरे उत्तर प्रदेश में करना है। 12) प्रधानमंत्रीजी और राष्ट्रीय अध्यक्षजी ने एक अवसर दिया कि अब केवल पूर्वी उत्तर प्रदेश में सीमित ना रहूं और यूपी की पूरी 22 करोड़ की जनता के लिए सेवा करूं। 13) प्रधानमंत्रीजी और अमित शाहजी का हमारे सामने आदर्श मौजूद है। 14) जनअपेक्षाओं पर खरा उतरने में पूरा प्रयास करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी, अमित शाहजी और कार्यकर्ताओं का अभिनंदन-वंदन करता हूं। आप सभी को शुभकामनाएं। जयश्री राम। भगवा रंग में रंगा शहर - सीएम के वेलकम के लिए पूरा शहर भगवा रंग में रंगा देखा गया। जगह- जगह होर्डिंग, बैनर और भगवा झंडे लगाए गए। - मंदिर कैम्पस के दुकानदारों ने पूरे मंदिर को गुब्बारों और फूल से सजाया दिया। मंदिर के मेन गेट को फूल की 800 लड़ियों से सजाया गया। कैलाश मानसरोवर - योगी ने यहां एक कॉलेज में दी स्पीच में कहा, आप सभी को खुशखबरी देना चाहूंगा कि आप में से जो लोग कैलाश मानसरोवर की यात्रा करना चाहते हैं और स्वस्थ हैं तो हम उन्हें एक लाख रुपए का अनुदान देंगे। लखनऊ, गाजियाबाद या नोएडा में से किसी एक स्थान पर मानसरोवर भवन शुरू करेंगे ताकि वहां से लोग आगे यात्रा बढ़ा सकें। 15 जून तक यूपी की सभी सड़कें गड्ढा मुक्त करने का टारगेट - योगी ने कहा, आज ही मैंने पीडब्ल्यूडी से कहा है कि 15 जून तक यूपी से सभी सड़कें गड्ढा मुक्त हो जानी चाहिए। आपसी सहमति से बात कर रहे युवक-युवतियों को ना राेका जाए - योगी ने कहा, मुझे कई माताओं-बहनों के फोन आए। मुझे बताया गया कि बालिकाएं स्कूल जाना छोड़ रही हैं क्योंकि मनचले उन्हें तंग करते हैं। हमने प्रशासन से कहा है कि कई ऐसे तत्वों पर कड़ाई बरती जाए जो मनचले और शोहदे किस्म के हैं।मैं प्रशासन से स्पष्ट कहूंगा कि राह चलते नौजवानों और सहमति के साथ बैठे युवक-युवतियों, आपसी सहमति से बात कर रहे हैं तो उन्हें कतई ना रोका जाए। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें.... योगी की पूरी स्पीच...
    Last Updated: March 25, 20:33 PM
  • नई दिल्ली. अरुण जेटली के मानहानि केस में शनिवार को कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल समेत 6 आप लीडर्स के खिलाफ आरोप तय कर दिए। दिल्ली के सीएम समेत दूसरे आप लीडर्स को अब 20 मई से ट्रायल का सामना करना पड़ेगा। बता दें कि आप नेताओं ने DDCA (दिल्ली एंड डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन) में कथित घोटाले का आरोप लगाया था। इसमें जेटली के शामिल होने का दावा किया था। जेटली ने आप लीडर्स पर सिविल और क्रिमिनल मानहानि के दो केस दर्ज कराए हैं। जेटली 13साल तक DDCA के प्रेसिडेंट रहे। 2013में उन्होंने पोस्ट छोड़ दी थी।कोर्ट में मौजूद नहीं थे जेटली... - शनिवार को कोर्ट में सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों को वकीलों में जेटली की गैरहाजिरी को लेकर तीखी बहस हुई। - केजरीवाल ने कहा कि उन्हें खतरा है। इसके बाद सुनवाई के दौरान सभी लोगों को कोर्ट रूम से बाहर कर दिया गया। सिर्फ वही लोग मौजूद थे, जिनका केस से ताल्लुक था। - कोर्ट में केजरीवाल, आशुतोष, कुमार विश्वास, संजय सिंह, राधव चड्डा और दीपक वाजपेयी ने आरोप कबूल नहीं किया। - इसके बाद चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट सुमित दास ने इन सभी पर आरोप तय कर दिए। - इसी केस को लेकर 30 जनवरी को केजरीवाल ने कोर्ट में पिटीशन फाइल की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था। दिल्ली हाईकोर्ट में भी जेटली ने 10 करोड़ की मानहानि का केस दाखिल किया है। क्या है मामला? - दिसंबर 2015 में दिल्ली के सीएम ऑफिस में सीबीआई की रेड के बाद आप नेताओं ने जेटली के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। तब केजरीवाल ने दावा किया था कि उनके ऑफिस में DDCA के कथित घोटालों से जुड़ी फाइल आई थी। इसे रेड के दौरान सरकार ने सीबीआई के जरिए गायब करा दिया। - आप नेताओं ने आरोप लगाया था कि यह घोटाला जेटली के DDCA प्रेसिडेंट रहते हुआ। जेटली का कहना है कि इससे उनकी मानहानि हुई। - इसके पहले वेटरन क्रिकेटर बिशन सिंह बेदी और कीर्ति आजाद ने भी DDCA में आर्थिक गड़बड़ियों के आरोप लगाए थे। इसके चलते आजाद ने बाद में बीजेपी से इस्तीफा दे दिया। हाईकोर्ट में जेठमलानी ने पूछे थे जेटली से 52 सवाल - सिविल मानहानि केस की सुनवाई के लिए जेटली 7 मार्च को हाईकोर्ट में पेश हुए। यहां केजरीवाल के वकील राम जेठमलानी ने उनसे 52 सवाल पूछे। जिरह दो घंटे तक चली थी। - जेठमलानी ने जेटली से पूछा, बताएं कैसे आपकी इमेज खराब हुई? जिसकी भरपाई नहीं हो सकती और इसे आंका भी नहीं जा सकता। - जेटली ने कहा, लगातार 5 दिनों तक मेरे ऊपर सवाल उठाए गए। मेरी इमेज को खराब करने की कोशिश की गई। - जेठमलानी ने कहा, केंद्रीय मंत्री को किसी तरह का आर्थिक नुकसान नहीं हुआ, इसीलिए वह कह रहे हैं कि इसे मापा नहीं जा सकता। पार्टी की पॉलिसीज पर लड़े जाते हैं इलेक्शन: जेटली - लोकसभा इलेक्शन में जेटली की हार का जिक्र करते हुए जेठमलानी ने कहा, जो शख्स इलेक्शन हार चुका हो, उसे रेपुटेशन की बात नहीं करनी चाहिए। - इस पर जेटली ने कहा, 2014 में केजरीवाल भी चुनाव हारे थे। इलेक्शन पार्टी की पॉलिसीज पर लड़े जाते हैं, पर्सनल रेपुटेशन के लिए नहीं। - जेटली ने कहा, मेरे ओहदे, बैकग्राउंड और इमेज को देखें तो सम्मान को बहुत नुकसान पहुंचा है। इसे आंका नहीं जा सकता। किसी बदनाम शख्स को दिमागी तनाव होता है। यही मेरे साथ भी हुआ। - जेठमलानी ने पूछा, मुकदमा दायर करने में आपको एक हफ्ते का वक्त क्यों लगा? इस पर जेटली ने कहा कि वो कई दिनों तक केजरीवाल के आरोपों को खारिज करते रहे।
    Last Updated: March 25, 20:20 PM
  • गोरखपुर. सीएम बनने के बाद पहली बार अपने क्षेत्र पहुंचे योगी आदित्यनाथ ने कई एलान किए। उन्होंने एंटी रोमियो स्क्वॉड और अवैध बूचड़खाने बंद करने के नई सरकार के कॉन्ट्रोवर्शियल फैसलों का जिक्र किया। साथ ही यह भी कहा कि कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाने वालों को यूपी सरकार 1 लाख रुपए का अनुदान देगी। योगी ने कहा कि उनकी सरकार में विकास सभी का होगा, लेकिन तुष्टीकरण किसी का नहीं होगा। पढ़ें योगी की स्पीच की से जुड़े एलान... 1) कैलाश मानसरोवर - योगी ने यहां एक कॉलेज में दी स्पीच में कहा, आप सभी को खुशखबरी देना चाहूंगा कि आप में से जो लोग कैलाश मानसरोवर की यात्रा करना चाहते हैं और स्वस्थ हैं तो हम उन्हें एक लाख रुपए का अनुदान देंगे। लखनऊ, गाजियाबाद या नोएडा में से किसी एक स्थान पर मानसरोवर भवन शुरू करेंगे ताकि वहां से लोग आगे यात्रा बढ़ा सकें। 2) 15 जून तक यूपी की सभी सड़कें गड्ढा मुक्त करने का टारगेट - योगी ने कहा, आज ही मैंने पीडब्ल्यूडी से कहा है कि 15 जून तक यूपी से सभी सड़कें गड्ढा मुक्त हो जानी चाहिए। 3) बेटियां स्कूल जाना छोड़ रही थीं, इसलिए बनाया एंटी रोमियो स्क्वाड - योगी ने कहा, मुझे कई माताओं-बहनों के फोन आए। मुझे बताया गया कि बालिकाएं स्कूल जाना छोड़ रही हैं क्योंकि मनचले उन्हें तंग करते हैं। हमने प्रशासन से कहा है कि कई ऐसे तत्वों पर कड़ाई बरती जाए जो मनचले और शोहदे किस्म के हैं। उन पर कड़ाई होनी चाहिए। हमने बीजेपी के संकल्प पत्र की तर्ज पर एंटी रोमियो स्क्वॉड को एक्टिव कर दिया है। - मैं प्रशासन से स्पष्ट कहूंगा कि राह चलते नौजवानों और सहमति के साथ बैठे युवक-युवतियों, आपसी सहमति से बात कर रहे हैं तो उन्हें कतई ना रोका जाए। लेकिन ये ध्यान रखें कि भीड़-भाड़ वाली जगह या स्कूलों के बाहर ऐसा होता है जिससे बच्चियों को खतरा होता है तो अराजक तत्वों को ना छोड़ें। - रात 12 बजे भी बालिका सड़क पर चल रही है तो वह खुद को सुरक्षित महसूस करे, वह व्यवस्था होनी चाहिए। 4) अवैध बूचड़खानों का मुद्दा NGT ने उठाया था - योगी ने कहा, NGT ने यूपी की पिछली सरकार से कई बार कहा था कि अवैध बूचड़खानों को हटाओ। प्रदूषण फैला रहे और स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे बूचड़खानों को कोई छूट न दी जाए। हम NGT के आदेश पर ही काम कर रहे हैं। 5) किसान और खाद्य सुरक्षा - आदित्यनाथ ने कहा, हम किसान के लिए योजना बना रहे हैं। हमने यूपी से एक टीम बाहर भेजी है। छत्तीसगढ़ में खाद्य सुरक्षा किस तरह लागू है, यह देखने के लिए हमारी टीम में दो मंत्री और चार अधिकारी वहां गए हैं। हम किसानों के शत प्रतिशत गेहूं को खरीदेंगे और पैसा उनके खाते में डालेंगे। 6) भ्रष्ट कहीं भी बैठा होगा, उसे निकाल बाहर करेंगे - सीएम ने कहा, हम भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं करेंगे। शासन में कहीं भी भ्रष्ट बैठा होगा तो उसे निकाल बाहर करेंगे। यूपी के विकास के लिए काम करेंगे। 7) विकास सबका होगा, तुष्टीकरण किसी का नहीं होगा - आदित्यनाथ ने कहा, हम प्रधानमंत्रीजी के सबके साथ, सबके विकास के नारे पर काम करेंगे। महजब-जाति के नाम पर किसी से भेदभाव नहीं होगा। विकास सबका होगा, तुष्टीकरण किसी का नहीं होगा, ये मैं भरोसा देता हूं।
    Last Updated: March 25, 19:10 PM
  • लखनऊ. अखिलेश यादव ने सीएम हाउस का शुद्धिकरण करवाए जाने के बाद योगी पर कमेंट किया। अखिलेश ने कहा, 2022 में हम आएंगे तो फायर ब्रिगेड में भरकर गंगाजल लाएंगे और 5 केडी (CM हाउस) को धुलवाएंगे। मुझे शुद्धिकरण से कोई तकलीफ नहीं है। मैं उम्मीद करता हूं कि योगीजी मोर का ख्याल रखेंगे, जो वहां रहते हैं। हमारे शेर भूखे, नजदीक मत जाना- अखिलेश... - स्लॉटर हाउस बंद किए जाने पर अखिलेश यादव ने योगी आदित्यनाथ पर कमेंट किया कि हमारे शेर बहुत भूखे हैं, नजदीक मत जाना। उन्होंने कहा कि योगी उम्र में भले ही बड़े होंगे, लेकिन काम में बहुत पीछे हैं। अखिलेश शनिवार को पार्टी की नेशनल एक्जिक्यूटिव मीटिंग के बाद मीडिया से बात कर रहे थे। मालूम होता तो हम भी अधिकारियों से झाड़ू लगवाते - अखिलेश ने कहा, हमें नहीं मालूम था कि हमारे अधिकारी इतनी अच्छी झाड़ू लगाते हैं। मालूम होता तो हम भी खूब झाड़ू लगवाते। - मुझे अब उस दिन का इंतजार है कि जब आप लोग यूपी में होने वाली हत्या-रेप की घटनाओं पर उसी तरह योगीजी की फोटो के साथ खबरें दिखाएंगे, जैसे मेरी दिखाया करते थे। - एक जाति विशेष के अधिकारियों को ट्रांसफर और सस्पेंड किया जा रहा है। लेकिन, आप लोग उसकी खबर नहीं लगाएंगे. 30 सितंबर से पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव - अखिलेश ने कहा, हार का रिव्यू हमने किया है और अभी ये चल रहा है। 15 अप्रैल से हमारा सदस्यता अभियान शुरू होगा और पूरे यूपी में चलाया जाएगा। 30 सितंबर से पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव होगा।
    Last Updated: March 25, 18:03 PM

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