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  • जोधपुर/नई दिल्ली.संरक्षा, सुरक्षा एवं समय-पालन काे ध्येय मानने वाले रेलवे में 11 दिन में ही यात्रियों से लूट, चोरी, दुर्व्यवहार सहित अन्य 365 शिकायतें रेलवे बोर्ड में दर्ज हो चुकी हैं। गर्मी की छुट्टियां शुरू होते ही ट्रेनों में रिजर्वेशन एवं जगह न मिलने की समस्या से जूझ रहे यात्रियों के साथ 15 से 25 मई के बीच ये वारदातें हुई हैं। आम दिनों में प्रतिदिन औसतन 15 से 20 ऐसी शिकायतें रेलवे को मिलती हैं लेकिन अब यह आंकड़ा प्रतिदिन 30-35 तक पहुंच गया है। रेलवे बोर्ड पहुंची कुल 365 शिकायतों में से 245 शिकायतें मोबाइल, लैपटॉप, लगेज, गहने, पासपोर्ट चोरी होने, लुटेरों के आतंक, ट्रेन पर पत्थरबाजी होने, कर्मचारी, आरपीएफ के नशे में होने आदि की हैं। कई ऐसे मामले भी हैं जिनमें यात्रियों ने शिकायत नहीं की है। इस मामले में रेलवे बोर्ड में आरपीएफ के कार्यवाहक महानिरीक्षक (क्राइम) पीके अग्रवाल का कहना है कि शिकायतों का आंकलन कर ट्रेनों में सुरक्षा को लेकर समीक्षा करेंगे। आरपीएफ के नॉर्दर्न रीजन के आईजी संजय किशोर का कहना है कि छुट्टियों में ऐसी शिकायतें बढ़ी हैं। विशेष गाइडलाइन जारी की गई है। चोरों को पकड़ा जा रहा है। जनरल बोगी में सादी वर्दी में जवान तैनात किए गए हैं। आरपीएफ के जिन जवानों के खिलाफ ड्यूटी में कोताही की शिकायतें हैं, उनका परीक्षण करवा विभागीय कार्रवाई की जाएगी। वहीं इस मामले में रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने भास्कर से कहा कि सुरक्षा, संरक्षा संबंधी हर शिकायत पर कार्रवाई होती है। एक अलग विभाग सभी शिकायतों की निगरानी करता है। कोई भी शिकायत उस समय तक बंद नहीे होती है जब तक कि उस पर कार्यवाही अंकित न हो जाए। दुल्हन ने मंत्री को लिखा- सारे जेवर चोरी हुए, फिर भी आप आइएगा जबलपुर से 6 मई को चौकसे परिवार बेटी सोनल का विवाह करने के लिए श्रीधाम एक्सप्रेस में ग्वालियर रवाना हुआ। रास्ते में चोरों ने ट्रॉली बैग काटकर दुल्हन के मंगलसूत्र सहित 16 लाख के सारे जेवर चुरा लिए। चोर 50 हजार कैश, एटीएम व क्रेडिट कार्ड भी ले गए। इस मामले में भी अब तक जीआरपी आरोपियों का पता नहीं लगा पाई है। सोनल ने उसी दिन रेलमंत्री को ट्वीट में लिखा, मैं और मेरा पूरा परिवार इस घटना से टूट चुके हैं। बावजूद इसके हम इस आशा में कार्यक्रमों के लिए आगे बढ़ेंगे कि आप दोषियों पर कार्रवाई करेंगे। आपको शादी का कार्ड भेज रही हूं। मेरी शादी है यह बताने के लिए नहीं बल्कि आपको आमंत्रित करने के लिए। ...इस बीच 18 मई को रेलमंत्रीका ट्वीट यात्री संरक्षा-सुरक्षा को सर्वोच्च बताते हुए इसे सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाना बताया। लिखा, रिएक्टिव से प्रो-एक्टिव होने की ओर अग्रसर हैं। बेखौफ लुटेरे कर रहे हैं यात्रियों से लूटपाट-मारपीट... केस-1 शताब्दी के कोच सेबैग ले भागा चोर, आरपीएफ देखती रही दीपाली अरोड़ा ग्वालियर से शताब्दी एक्सप्रेस से दिल्ली आ रही थीं। ट्रेन पहुंचने ही वाली थी कि कोच में एक युवक आया और दीपाली का बैग ले भागा। दरवाजे पर आरपीएफ जवान था। दीपाली चिल्लाती रही लेकिन उसने चोर को पकड़ने की कोशिश नहीं की। बाहर भी आरपीएफ की मौजूदगी थी लेकिन चोर वहां से भी भागने में कामयाब हो गया। केस-2 लुटेरों ने पेंट तक उतरवा दी, छुपाकर रखे पैसे लूटे, पीटा चंडीगढ़-प्रयाग ट्रेन संख्या 14218 दिल्ली से निकलते ही दो हट्टे-कट्टे युवक जनरल कोच में आए। यात्रियों के लगेज से कीमती वस्तुएं निकालने लगे। विरोध करने वालों को फेंकने की धमकी दी। यात्री सतीशकुमार की जेब में पैसे नहीं मिले तो लगेज खोला। वहां भी पैसे नहीं मिले तो पेंट खुलवा दी। अंडरवियर में छुपाए पैसे निकालने के बाद उन्हें पीटा भी। केस-3 फोन-ट्वीट कर मांगी मदद, पूरा कोच लुटने तक कोई न आया जोधपुर-बेंगलुरू ट्रेन संख्या 16507 के एस-2 कोच के यात्री गुलाब सिंह ने शिकायत में बताया कि 19 मई तड़के 3 बजे पुणे व कराद स्टेशन के बीच लुटेरे आए व लगेज से कीमती वस्तुएं निकाल लीं। यात्री लुटेरों को देख सहम गए। यात्रियों ने सुरक्षा हेल्पलाइन पर फोन व ट्वीट किए। लुटेरे पूरा कोच लूट कर चले गए पर कोई मदद नहीं आई।
    Last Updated: May 28, 04:06 AM
  • अनंतनाग/नई दिल्ली. कश्मीर में आतंकी बेखौफ हैं, पुलिस की तरह क्रैकडाउन यानी छापामार छानबीन कर रहे हैं। जब जवान आतंकियों को घेर रहे हैं तो पत्थर बाज उन्हें भागने में मदद कर रहे हैं। सबसे ज्यादा खराब हालात हैं दक्षिण कश्मीर में। यहां 10-10 साल के बच्चे हिजबुल जिंदाबाद केनारे लगा रहे हैं। पढ़िए सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों से रिपोर्ट... दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग का बिजबिहेड़ा गांव। ठीक हाईवे पर। शकील के घर में तीसरी बार शादी की तैयारियां चल रही हैं। पहली बार सैलाब के चलते उम्मीदें बह गई थीं। पिछले साल फिर तैयारियां हुई, लेकिन आतंकी बुरहान वानी के एनकाउंटर के बाद छह महीने कर्फ्यू था। इस साल फिर तारीख तय हुई है। शादी होगी कि नहीं डर है। हुई तो भी जश्न नहीं हो सकता। आतंकियों का सख्त फरमान है कि अभी कोई भी काम धूम-धाम से नहीं कर सकते। कम से कम साउथ कश्मीर में तो नहीं ही। कारण हर दूसरी गली में किसी की मौत हुई है। कोई पत्थर बाजी में तो कोई एनकाउंटर में। और आतंकियों ने खुशियां मनाने पर पाबंदी लगा दी है। उत्सव हुआ तो उन्हें निशाना बनाया जा सकता है। जबकि कहते हैं कश्मीरी ताउम्र सिर्फ घर बनाने और शादियों पर खर्च करने के लिए ही कमाते हैं। यहां शादियों में 3 क्विंटल मीट एक दावत में लग जाता है। शामियाने और रोशनी तो देखने लायक होती है। लेकिन अब आतंक के साए में सब मना है। अब हम कभी स्कूल नहीं जाएंगे बिजबिहेड़ा से कुछ ही दूर पर त्राल है। शनिवार सुबह की ही बात है। यहां रहने वाले ताहिर वानी के बच्चे स्कूल के लिए तैयार हो गए थे। अचानक खबर आई कि पास ही के गांव में एनकाउंटर चल रहा है। लोग घरों से आकर एनकाउंटर रोकने के लिए पत्थर बाजी भी कर रहे हैं। स्कूल दुकानें सब बंद कर दी गई हैं।बच्चों ने चिड़चिड़ाते हुए बस्ता फेंका और अम्मी से कहा- हर दूसरे दिन स्कूल बंद हो जाता है, अब हम कभी स्कूल नहीं जाएंगे। पिछले साल भी पूरे छह महीने बंद था स्कूल। इस बार टुकड़ों में प्रोटेस्ट हो रहा है। आबिद कहते हैं कश्मीरियों को कर्फ्यू और बंद में भी कारोबार करना आ गया है। हम घाटे में हैं लेकिन घाटी में हैं। हफ्ते में भले दो दिन ही कारोबार होता है लेकिन गुजारा हो जाता है। जैसे ही कुछ देर के लिए हालात सामान्य होते हैं लोग फटाफट जरूरत का सामान खरीद लाते हैं। महीनों का राशन जमा करना यूं भी कश्मीरियों की परंपरा है। सबसे ज्यादा खौफ पॉलिटिकल वर्कर और पुलिसवालों के परिवारों को है। दक्षिण कश्मीर में पिछले हफ्ते की घटना है। आधी रात पुलवामा में आतंकी आए और एक गांव की घेराबंदी की। वैसी घेराबंदी जैसी क्रैकडाउन या छानबीन के लिए सुरक्षाबल करते हैं। नेता या मंत्री से मिलना हो तो छिपकर मिलता है आतंकियों के निशाने पर वो पॉलिटिकल वर्कर थे जिन्हें वो पुलिस-सरकार का इनफॉर्मर मानते हैं। आतंकियों ने उन लोगों को खूब मारा। अचानक सुरक्षाबल पहुंचे तो आतंकी भाग निकले। दुर्भाग्य ऐसा कि स्थानीय लोगों ने सुरक्षाबलों पर पथराव कर आतंकियों को निकालने में मदद की। लोग कहते हैं पुलिस वाले या सेना उन्हें बेवजह नहीं मारेगी। लेकिन आतंकियों को किसी नियम कायदे की परवाह नहीं। इसलिए डर आतंकवादियों का ज्यादा है। अब दक्षिण कश्मीर में पॉलिटिकल काम ठप्प है। किसी कार्यकर्ता को अपने नेता या मंत्री से मिलना हो तो छिपकर मिलता है। यूं खुले आम कोई खुद को किसी भी पार्टी का नहीं कहता। यही नहीं मुख्यमंत्री और मंत्री भी दक्षिण कश्मीर के गांवों में अब आ जा नहीं सकते। अधिकारियों-मंत्रियों के दौरे, निरीक्षण सब बंद है। एक स्थानीय नेता तो लगभग भागकर पूरी रात पैदल चलकर अनंतनाग से श्रीनगर पहुंचे क्योंकि वह आतंकियों के टारगेट पर थे। दक्षिण कश्मीर वो इलाका है जिसमें घाटी के 10 में से 4 जिले कुलगाम, शोपियां, अनंतनाग और पुलवामा आते हैं। यानी लगभग घाटी का 45 फीसदी इलाका। तब से आतंकी कुछ डरे हैं कश्मीर में पुलिसवालों के परिवार वाले वो लोग हैं जो न वहां रह पा रहे हैं न ही छोड़कर जा सकते हैं। डर ऐसा कि बच्चों को जम्मू के स्कूलों-होस्टलों के सहारे पढ़ा रहे हैं। जो यहां कश्मीर में रह रहे हैं उन्हें हर दिन आतंकियों की धमकियों का खौफ। वो अब बस चुप रहते हैं। पिछले दिनों पुलिसवालों के परिवारों को आतंकियों ने टारगेट करना शुरू किया था। हालात ऐसे कि जम्मू कश्मीर पुलिस को अपने जवानों को एडवायजरी जारी करना पड़ी कि घर मत जाओ, पुलिस कैम्पस में रहो। हालात और बिगड़े तो पुलिस ने आतंकियों को चेतावनी दी तुम हमारे परिवारों को टारगेट करोगे तो हम तुम्हारे। तब से आतंकी कुछ डरे हैं। जफर कहते हैं कश्मीर ट्रेंड के मुताबिक चलता है। हर बार एक नया ट्रेंड। एक एसटीडी की दुकान खोलेगा तो सब वही करेंगे। एक आतंकी बनेगा तो सब बनने जाएंगे। एक लड़की पत्थर बाजी करेगी तो सारा कॉलेज करने लगेगा। इस बार बैंक लूटने और हथियार छीनने का ट्रेंड चला है। 10-10 साल के बच्चों को सिखा दिए हैं हिजबुल-पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी बुरहान वानी को मरे हुए कई महीने हो गए हैं, लेकिन उसकी हिंसक सोच पूरे कश्मीर के लोगों पर सिर चढ़कर बोल रही है। 10-10 साल के बच्चे भी हिजबुल के नारे लगा रहे हैं। दक्षिण कश्मीर के श्रीनगर से चल कर पहले पुलवामा आता है और उसके आगे शोपियां जिला शुरू हो जाता है। इन दिनों पुलवामा और शोपियां दो जिले ऐसे है, जहां हालात बेहद बिगड़ चुके हैं। कश्मीर की आजादी के नारे लगा रहे हैं यहां आतंकियों का साथ देने वाले लोग कश्मीर की आजादी के नारे लगा रहे हैं। भास्कर की टीम जब शोपियां जिला के उस मालादेरा गांव में पहुंची जहां का शेख इरफानलहक हिज़बुल का कमांडर है, तो वहां का नजारा देख दंग रह गई। गांव में पहुंचते ही हमारा सामना 10 साल के करीब की उम्र के बच्चों के साथ हुआ। ये बच्चे एक छोटे से ग्राउंड में वॉलीबॉल खेल रहे थे। इस ग्राउंड के साथ लगती दीवारें थीं, उन पर लिखा हुआ था- गो बैक इंडिया गो बैक और एक दीवार पर लिखा गया था कि यह गांव शहीदों का गांव हैं। वहीं एक और दीवार पर लिखा था- बुरहान अभी जिंदा है। जब हमने इन बच्चों के फोटो लेना चाहा तो बच्चों ने सवाल किया कि यह तस्वीर आप कहां पर इस्तेमाल करेंगे। थोड़ा बताने पर ही वहां मौजूद सभी बच्चों ने हमारे कैमरे के सामने एक तराना गाया। जिसमें यह साफ कहा जा रहा था कि हम हैं हिजबुल मुजाहिदीन और पाकिस्तान जिंदाबाद, रगड़ा- रगड़ा हिंदुस्तान। इनमें से कोई बच्चा ऐसा नहीं था, जिसकी उम्र 10 साल से ज्यादा की हो और साथ ही यह कह रहे थे कि बुरहान तुम कदम बढ़ाओ, हम तुम्हारे साथ हैं। कारोबार ही तबाह हो गया जब हम पुलवामा पहुंचे तो पूरा बाजार बंद था। बस थोड़ी सी देर पहले ही पत्थर बाजी थमी थी। और दुकानदार अपनी दुकान के शटर बंदकर बाहर बैठे हुए थे। इस दौरान हमने कुछ दुकानदारों से बात करनी चाही तो उन्होंने पहले अपना नाम बताने से मना कर दिया। यहां ऐसे हालात हैं कि जब हमने बताया कि हम मीडिया से हैं तो उन्होंने और भी दूरी बना ली। बाद में एक दुकानदार ने अपना दुखड़ा सुनाते हुए बताया कि हमारा तो कारोबार ही तबाह हो गया है। सुबह से लेकर शाम तक कई बार शटर खुलता है और कई बार बंद होता है। उसने कहा कि हम लोग तो पत्थर बाजों का विरोध भी नहीं कर सकते हैं। पत्थर बाजोंमें रोज वही चेहरे होते हैं बस कपड़े बदलते हैं, भड़काते हैं जवाहर टनल को पार करते ही साउथ कश्मीर का इलाका शुरू हो जाता है। यहां की हर सरकारी इमारत की दीवार पर भारत विरोधी नारे लिखे थे। इन्हें कई जगहों से मिटाया गया है तो कई जगहों पर ये साफ लिखे दिखते हैं। ड्यूटी कर रहे सीआरपीएफ के जवान मिथिलेश कुमार करीब एक साल से कश्मीर में तैनात हैं। वो बताते हैं कि मैं सालभर में कई बार बवाल देख चुका हूं। बवाल सिर्फ कुछ इलाकों में होता है और पूरी प्लानिंग के साथ। वे बताते हैं कि प्रदर्शन में बार-बार वही चेहरे देखने को मिलते हैं। वही युवक हाथों में पत्थर लेकर आते हैं। फर्क सिर्फ इतना होता है कि हर रोज उनके कपड़े बदले होते हैं। ये लोग ही स्कूल के छात्रों और दूसरे युवाओं को भड़काते हैं। ये मुंह छिपाने के लिए हर रोज एक ही कपड़े का इस्तेमाल करते हैं। हम इन्हें मुंह के कपड़े से पहचानते हैं। कश्मीर के युवा वर्ग को साधने में अलगावादी सफल हो रहे है। पुलवामा के कॅालेज से शुरू हुए प्रदर्शन को पूरे कश्मीर में फैला दिया गया है। ज्यादातर प्रदर्शन साउथ कश्मीर में हो रहे हैं। लेकिन सेंट्रल तथा नाॅर्थ कश्मीर भी पीछे नहीं हैं। कश्मीर के स्कूलों, कॅालेजों के छात्र-छात्राएं कक्षाओं को छोड़कर सड़कों पर भारत विरोधी नारेबाजी कर रहे हैं। अब तो स्कूल के बच्चे भी प्रदर्शनों में जाने लगे हैं। पुलिस की तरफ से कुछ दिन पहले ही बयान दिया गया था। जिसमें कहा गया था कि कुछ शरारती तत्व बच्चों से प्रदर्शन करवा रहे हैं। इस तरह से कश्मीर में माहौल को खराब किया जा रहा है। जिस दिन से बच्चों का प्रदर्शन शुरू हुआ है। उस दिन से कश्मीर में बाकी प्रदर्शन कम हो गए हैं। बाकी प्रदर्शन सिर्फ शुक्रवार को हो रहे है। कालेज में सुरक्षाबलों का आना गलत था पुलवामा में डिग्री कालेज के छात्रों से बात करने पर उनका साफ तौर पर कहना था कि उनके कालेज में सुरक्षाबलों का आना गलत था। वो अपनी गलती नहीं मानते है। उनका कहना था कि वह अपने प्रदर्शन को जारी रखेंगे। इस कालेज के छात्र जाहिर खान, इसरार वानी, मोहम्मद असलम और आरिफ अहमद का कहना है कि वे लड़ते रहेंगे। इसके लिए वह सड़कों पर भी आएंगे, लाठियां भी खाएंगे और पत्थर भी चलाएंगे। इसी रोड पर स्थित महिला कॅालेज की छात्राओं के भी वैसे ही बयान थे। उनका कहना था कि कश्मीर के हर छात्र के हक के लिए वह अपनी लड़ाई को जारी रखेंगे। ऐसा पहली बार हुआ है कि जब उनके काॅलेज की छात्राएं सड़कों पर आ गईं और आगे भी ऐसा ही जारी रहेगा। नाॅर्थ कश्मीर में भी प्रदर्शन हुए। कुपवाड़ा तथा बारामूला के कॅालेजों में ही नहीं बल्कि स्कूलों के बच्चों ने भी प्रदर्शन किए। सुरक्षाबलों पर पथराव किया गया।
    Last Updated: May 28, 03:53 AM
  • नई दिल्ली.देश में बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आने से नई नौकरियां पैदा होंगी, लोगों में इस बात का भ्रम है। एफडीआई और जॉब क्रिएशन का कोई सीधा संबंध नहीं है। यह बात भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह नेdainikbhaskar.comसे बातचीत में कही। उन्होंने कहा कि इकोनॉमिक ग्रोथ से जॉब्स का संबंध है और सरकार इन्फ्रास्ट्रक्चर और दूसरे सेक्टर्स पर फोकस कर नई जॉब्स पैदा करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि अगले दो साल में सरकार नई जॉब्स पैदा करने पर फोकस करेगी। शाह ने शुक्रवार को मोदी सरकार के तीन साल पूरे होने के एक मौके पर अनौपचारिक बातचीत में यह बात कही। 4 लाख करोड़ रुपए का एफडीआई आया इससे पहले पावर मिनिस्टर पीयूष गोयल ने मोदी सरकार के 3 साल के कामकाज पर प्रजेंटेशन देते हुए बताया कि देश में पिछले एक साल में रिकॉर्ड लगभग 4 लाख करोड़ रुपए का एफडीआई आया है और भारत एफडीआई की दृष्टि से दुनिया का सबसे आकर्षक देश बना हुआ है। 13 करोड़ लोगों को मिली सोशल सिक्युरिटी उन्होंने बताया कि मोदी सरकार ने जनधन स्कीम के तहत 28.50 करोड़ खाते खोले गए और इसमें 13 करोड़ लोगों को सोशल सिक्योरिटी से जोड़ा गया है। सोशल सिक्योरिटी के तौर पर लोगों को बीमा कवर मुहैया कराया गया। 90 हजार ग्राम पंचायत ऑप्टिकल फाइबर से जुड़ी गोयल ने बताया कि डिजिटल इंडिया के तहत 90 हजार ग्राम पंचायतों को अब तक ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ा जा चुका है। अब तक 2.5 लाख किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर बिछाया जा चुका है। जबकि पिछली सरकार में केवल 358 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर ही बिछाया गया था। 1 लाख मेगावाट पावर कैपेसिटी बढ़ी उन्होंने बताया कि सरकार ने पावर सेक्टर की ओर विशेष ध्यान दिया और तीन साल के दौरान 1 लाख मेगावाट पावर जनरेशन कैपेसिटी बढ़ाई गई। क्योंकि जब मोदी सरकार आई तो कई पावर प्लांट बंद पड़े थे, हमने इन प्लांट को चालू कराया और अब इन कैपेसिटी इतनी बढ़ गई है कि देश के सरप्लस पावर हो चुकी है। एन्वायरमेंट क्लियरेंस का समय कम किया मोदी सरकार ने एन्वायरमेंट क्लियरेंस देने की समय सीमा 180 दिन तय कर दी है, जबकि पिछली सरकार में 600 दिन में इन्वायरमेंट क्लियरेंस मिलती थी। हमारी कोशिश है कि इसे और कम किया जाए।
    Last Updated: May 27, 22:41 PM
  • अहमदाबाद.वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) ने भारत में जीका वायरस के तीन मामलों की पुष्टि कर दी है। ये तीनों ही मामले अहमदाबाद के हैं। तीन पेशेंट्स में से दो प्रेग्नेंट महिला हैं।, जिसका लैब टेस्ट जनवरी में किया गया था। बता दें कि जीका वायरस मच्छर से फैलता है। आमतौर पर यह वायरस नवजात बच्चों में होता है। इस बीमारी से बच्चों का सिर छोटा रह जाता है। उनका ब्रेन भी पूरी तरह डेवलप नहीं हो पाता।प्रेग्नेंट महिलाएं और बच्चे सुरक्षित... - एएनआई न्यूज एजेंसी ने हेल्थ मिनिस्ट्री के सूत्रों के हवाले से बताया कि जिन तीन लोगों में यह वायरस मिला है, उनमें दोप्रेग्नेंट महिलाएं हैं। महिलाएं-बच्चे सुरक्षित हैं। - हेल्थ मिनिस्ट्री का कहना है कि भारत में सर्विलांस सिस्टम अच्छा है। हम ऐसे केस का पता लगाने में सक्षम है। हेल्थ डिपार्टमेंट सभी स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल फॉलो कर रहा है। कब-कब सामने आए ये केस पहला केस: पिछले साल 10 से 16 फरवरी के बीच एक्यूट फर्बाइल इलनेस (एएफआई) सर्विलांस के तहत अहमदाबाद के बीजे मेडिकल कॉलेज में कुल 90 हजार ब्लड सैंपल लिए गए थे। एक सैंपल 64 साल के एक शख्स का था। इसका टेस्ट पॉजिटिव पाया गया था। दूसरा केस: 9 नवंबर 2016 को 34 साल की एक महिला ने बीजे मेडिकल कॉलेज में एक बच्चे को जन्म दिया था। डिलीवरी के बाद हॉस्पिटल में रहने के दौरान उसे हल्का बुखार हुआ। यहां के वायरल रिसर्च और डायग्नॉस्टिक लैबोरेट्री (वीआरडीएल) में एक सैंपल डेंगू के टेस्ट के लिए दिया गया। बाद में उसमें जीका वायरस पॉजिटिव पाया गया। तीसरा केस: इस साल 6 से 12 जनवरी के बीच एंटेनैटल क्लीनिक (एएनसी) सर्विलांस चला था। 111 खून के सैंपल उसमें लिए गए थे, जिसमें 22 साल की एक प्रेग्नेंट में जीका वायरस की पुष्टि हुई थी। QA में जानें क्या है जीका वायरस और क्या होता है इसका असर Q. क्या है जीका वायरस? A. जीका, एडीस ऐजिप्टी नाम के मच्छर से फैलने वाले वायरस का नाम है। यह वही मच्छर है जो यलो फीवर, डेंगू और चिकनगुनिया फैलाने के लिए भी जिम्मेदार है। Q. अब इतनी चर्चा क्यों? A. ब्राजील में 2015 में जीका वायरस के मामले अचानक बढ़े। पिछले साल जनवरी में हालात इतने खराब हो गए कि चार लैटिन अमेरिकन व कैरिबियन देशों ने महिलाओं को प्रेग्नेंट ना होने की सलाह दे दी। Q. किन देशों मे असर ज्यादा? A. सेंट्रल और साउथ अमेरिका के बोलिविया, इक्वाडोर, गुयाना, ब्राजील, कोलंबिया, एल सल्वाडोर, फ्रेंच गुईआना, ग्वातेमाला, हॉन्डुरस, मेक्सिको, पनामा, पराग्वे, सूरीनेम और वेनेजुएला। अमेरिका ने इन देशों में ट्रैवल ना करने की एडवाइजरी भी जारी की थी। Q. वायरस का क्या असर? A. वायरस की वजह से बच्चे नॉर्मल से छोटे सिर (माइक्रोसेफैली) के साथ पैदा होते हैं। माइक्रोसेफैली, न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम है। ब्रेन पूरी तरह डेवलप नहीं हो पाता। Q. जीका वायरस की चपेट में आएं तो क्या करें? A. WHO के मुताबिक, पूरी तरह आराम करें। जितना संभव हो फ्लूड्स (तरल पदार्थ) हैं। कॉमन मेडिसिन के जरिए बुखार और दर्द पर कंट्रोल किया जाए। Q. क्या रोकथाम मुमकिन है? A. फिलहाल, जीका को पूरी तरह रोकने वाला और WHO सर्टिफाइन वैक्सीन नहीं है। हालांकि, मच्छरों पर काबू करके खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। घर या आसपास मच्छर ना होने दें। जीका वायरस अफेक्टेड इलाके या देशों से आने वाले लोगों का टेस्ट कराएं। बुखार के साथ तेज दर्द या चकते पड़ने पर फौरान डॉक्टर को दिखाएं। ब्लड टेस्ट जरूर कराएं। क्या कहते हैं एक्सपर्ट? - गांधीनगर में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ (IIPH) के प्रोफेसर दीपक सक्सेना ने कहा- अब हमें बहुत सतर्क हो जाना चाहिए। जीका और डेंगू के वायरस एक जैसे ही होते हैं। लिहाजा, जीका वायरस भी जल्दी फैल सकता है। - प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए ये बेहद खतरनाक है। इससे बच्चे को जिंदगीभर के लिए परेशानी पैदा हो सकती है। वो अपनी उम्र के बाकी बच्चों से पिछड़ सकता है। सिर काफी छोटा रह जाता है। ब्रेन भी प्रॉपरली डेवलप नहीं होता।
    Last Updated: May 27, 22:10 PM
  • नई दिल्ली. इलेक्शन कमीशन ने आम आदमी पार्टी को साफ कर दिया है कि 3 जून को इलेक्शन कमीशन की तरफ से EVM चैलेंज ऑर्गनाइज किया जा रहा है और ये हैकॉथन नहीं है। इलेक्शन कमीशन ने कांग्रेस से कहा है कि EVM के मदरबोर्ड में किसी तरह के चेंज की इजाजत नहीं दी जाएगी। कमीशन ने कहा- हैकॉथन का वादा कभी नहीं किया गया था। लिहाजा, इससे पीछे हटने का भी सवाल पैदा नहीं होता। और क्या कहा कमीशन ने... - शनिवार को इलेक्शन कमीशन की तरफ से आप और कांग्रेस को सफाई दी गई। आप ने आरोप लगाया था कि इलेक्शन कमीशन अपने वादे से मुकर रहा है। - कमीशन ने साफ किया कि ये EVM चैलेंज है, हैकाॅथन नहीं। इसलिए ये कहना कि कमीशन पीछे हट रहा है, बेबुनियाद है। - कमीशन ने ये भी साफ कर दिया कि EVM चैलेंज उन्हीं रूल्स के मुताबिक किया जाएगा जो सिक्युरिटी प्रोटोकॉल के तहत आते हैं और जो एडमिनिस्ट्रेटिव बॉडी द्वारा तय किए गए हैं। क्योंकि, इन्हीं रूल्स के तहत फील्ड में EVM भेजी जाती हैं। EVM तक हर कोई नहीं जा सकता - कमीशन ने कहा- EVM तक कोई अनऑर्थराइज्ड (अनाधिकृत) शख्स नहीं पहुंच सकता। चाहे वो इलेक्शन के पहले, बाद या पोलिंग के दौरान क्यों ना हो। इसलिए इन्हें टेम्पर किए जाने का सवाल भी नहीं उठता। - EC ने कहा- EVM में दूसरा इंटरनल सर्किट का मतलब है कि वो मशीन ही EVM की तरह दिखने वाली दूसरी मशीन हो जाएगी। फिर इलेक्शन कमीशन इस बात की गारंटी कैसे दे सकता है कि वो सही नतीजे देगी। इसलिए, EVM चैलेंज में मदरबोर्ड चेंज करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। ये रूल्स के खिलाफ है। - बता दें कि कमीशन ने EVM चैलेंज के लिए जो वक्त तय किया था, उसमें सिर्फ एनसीपी और सीपीआई (एम) ने ही अप्लाई किया, उन्हें मंजूरी भी मिली। क्या है EVM चैलेंज - चुनाव आयोग ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVMs) में हैकिंग के आरोपों को साबित करने के लिए 3 जून से ओपन चैलेंज रखा है। नवंबर 1998 में EC ने एक्सपेरिमेंट के तौर पर देश की 16 विधानसभा सीटों पर ईवीएम का इस्तेमाल किया था। उसके बाद यह पहला मौका है जब आयोग ने इस तरह का ओपन चैलेंज दिया है। - सभी नेशनल या स्टेट पॉलिटिकल पार्टीज 26 मई तक इसके लिए रजिस्ट्रेशन करा सकती हैं। वे तीन लोगों को नॉमिनेट कर सकती हैं। किसी भी पोलिंग स्टेशन में इस्तेमाल 4 EVMs को चुन सकती हैं। ये चैलेंज चुनाव आयोग के हेडक्वार्टर्स में ही होगा। पॉलिटिकल पार्टीज दो कंडीशंस में चैलेंज में हिस्सा ले सकती हैं। हैकिंग साबित करने के लिए उन्हें 4 घंटे का वक्त मिलेगा। ये हैं दो कंडीशंस... 1) जिन मशीनों में रिजल्ट पहले से स्टोर है - चैलेंज किसके लिए:उन पार्टीज के लिए जिन्होंने इसी साल हुए पांच राज्यों के चुनाव में हिस्सा लिया था। इनमें यूपी, पंजाब, मणिपुर, गोवा और उत्तराखंड शामिल हैं। - किन EVMs का इस्तेमाल कर सकेंगे :ऐसी 4 मशीनें जाे हाल ही में पांच राज्यों में हुए चुनाव में किसी भी पोलिंग स्टेशन पर इस्तेमाल हुई थीं। ये मशीनें किसी एक असेंबली सेगमेंट की हो सकती हैं या अलग-अलग सेगमेंट की हो सकती हैं। जो मशीनें किसी अदालत के आदेश पर सील हो गई हैं, उनका इस्तेमाल नहीं हो सकेगा। क्या साबित करना होगा? - मान लीजिए कि वोटिंग हो चुकी है और वोटर्स ने अपना फैसला दे दिया है। लेकिन चैलेंज मंजूर करने वाले दलों को साबित करना होगा कि वे वोटिंग होने के बाद भी किसी एक कैंडिडेट या पॉलिटिकल पार्टी को फायदा पहुंचाने के लिए पहले से स्टोर वोट को कंट्रोल यूनिट्स में जाकर बदल सकते हैं। - ये साबित करना होगा कि नतीजों को तब बदला जा सकता है जब EVM स्ट्रॉन्ग रूम में है या वोटों की काउंटिंग चल रही है। 2) जिन मशीनों का इस्तेमाल वोटिंग के लिए होने वाला हो - चैलेंज किसके लिए:सभी राजनीतिक दलों के लिए। - किन EVMs का इस्तेमाल कर सकेंगे :जो EC के पास हैं और जिनका इस्तेमाल वोटिंग में होने वाला हो। EVM पर विवाद कब शुरू हुआ? - इसी साल 5 राज्यों में आए चुनावी नतीजों के बाद EVM के इस्तेमाल पर मायावती, हरीश रावत, अखिलेश यादव और अरविंद केजरीवाल जैसे नेताओं ने सवाल उठाए। इन राज्यों में से यूपी और उत्तराखंड में बीजेपी को भारी बहुमत मिला। खासकर केजरीवाल और मायावती ने आरोप लगाया कि यूपी में इस्तेमाल हुई EVM में भारी गड़बड़ी हुई थी। इसी वजह से नतीजे बीजेपी के फेवर में आए थे। VVPAT को इस्तेमाल किए जाने की मांग उठी। क्या है VVPAT? - यह वोटिंग के वक्त वोटर्स को फीडबैक देने का एक तरीका है। इसके तहत ईवीएम से प्रिंटर की तरह एक मशीन अटैच की जाती है। वोट डालने के 10 सेकंड बाद इसमें से एक पर्ची निकलती है, जिस पर सीरियल नंबर, नाम और उस कैंडिडेट का इलेक्शन सिम्बल होता है, जिसे आपने वोट डाला है। यह पर्ची मशीन से निकलने के बाद उसमें लगे एक बॉक्स में चली जाती है।
    Last Updated: May 27, 21:58 PM
  • लंदन. कम्प्यूटर सिस्टममें गड़बड़ी के बाद शनिवार को ब्रिटिश एयरवेज नेहीथ्रो एयरपोर्ट से अपनीसभी उड़ानें रद्द कर दीं। एयरवेज ने इस फैसले के बाद अपने सभी पैसेंजर्स से माफी मांगी है। साथ ही एयरलाइन ने जल्द इस प्रॉब्लम के समाधान का भरोसा दिलाया। कितनी उड़ानों पर असर हुआ इसका पता नहीं... - हीथ्रो एयरपोर्ट की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि ब्रिटिश एयरवेज केकम्प्यूटर सिस्टम में तकनीकी खराबी आने की वजह से सारी सर्विसेज बंद कर दी गई हैं। एयरलाइन इस इश्यू को समाधान करने में जुटी है। - हालांकि, ब्रिटिश एयरवेज के इस फैसले से कितनी उड़ानों पर असर हुआ। इसकी जानकारी नहीं मिली है। हीथ्रो, गैटविक और बेलफास्ट एयरपोर्ट से पैसेंजर्स की उड़ानों को लेकर शिकायतों की जानकारी मिली। - हीथ्रो एयरपोर्ट की ओर से साफ किया गया कि ब्रिटिश एयरवेज की उड़ानों के अलावा दूसरी सारी एयरलाइन अपने समयानुसार चल रही हैं।ब्रिटिश एयरवेज के पैसेंजर्स को स्टेटस चेक करते रहने की सलाह दी गई है। पैसेंजर्स नेसोशल मीडिया पर निकाली भड़ास - पैसेंजर्स ने सोशल मीडिया पर अपनी भड़ास निकाली। उन्होंने कहा वे एयरलाइन की वेबसाइट और ऐप का इस्तेमाल करने में सक्षम नहीं हैं। - पैसेंजर्स ने कहा कि उन्हें इस बारे में पहले से जानकारी न होने कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वे लंबी कतारों में खड़े-खड़े थक चुके हैं, लेकिन एयरवेज की तरफ से कोई जवाब नहीं दिया जा रहा है। पिछले साल भी आई थी समस्या - पिछले साल जुलाई और सितंबर में भी ब्रिटिश एयरवेज के पैसेंजर्स को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। तब ब्रिटिश एयरवेज की ऑनलाइन चेकिंग सिस्टम में दिक्कत आई थी। - बता दें कि यह ब्रिटेन की सबसे बड़ी एयरलाइन है। हालांकि, पैसेंजर्स ट्रैवल के लिहाज से देश की दूसरी सबसे बड़ी एयरलाइन है। इजीजेट इस मामले में पहले नंबर पर है। एयरपोर्ट पर अचानक बढ़ी भीड़ - द टेलिग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक हीथ्रो एयरपोर्ट पर अचानक भीड़ बढ़ गई। ब्रिटिश एयरवेज के तमाम पैसेंजर्स पहले से ही अपनी फ्लाइट का इंतजार कर रहे थे। वहीं, फ्लाइट्स रद्द होने की जानकारी नहीं मिलने की वजह से पैसेंजर्स एयरपोर्ट पर जुटने गए।
    Last Updated: May 27, 21:26 PM
  • श्रीनगर. जम्मू-कश्मीर के त्राल में शनिवार को सिक्युरिटी फोर्सेज ने एक एनकाउंटर में आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के टॉप कमांडर सब्जार अहमद भट को मार गिराया। इसके मरने के बाद घाटी में कई जगह हिंसा भड़क गई। लोगों ने आर्मी पर पत्थर बरसाने शुरू कर दिए। इस दौरान 1 सिविलयन की मौत हो गई और कई लोग जख्मी हो गए। एहतियात के तौर पर ट्रेन और इंटरनेट सर्विसेज सस्पेंड कर दी गई हैं। 2 ऑपरेशन के दौरान 10 आतंकी मारे गए... - न्यूज एजेंसी के मुताबिक आतंकी सब्जार को पुलवामा जिले के त्राल में सुबह ढेर किया गया। वह बुरहान वानी का उत्तराधिकारी था। बुरहान को सिक्युरिटी फोर्सेस ने पिछले साल 8 जुलाई को मार गिराया था। बुरहान के मारे जाने के बाद भी घाटी 90 दिनों तक हिंसा की चपेट में रही थी। उस दौरान 90 सिविलियंस की मौत हुई थी, 15 हजार से ज्यादा लोग जख्मी हुए थे। हिंसा में 2 सिक्युरिटी पर्सनल भी शहीद हुए थे और 4000 से ज्यादा घायल हुए थे। - जम्मू-कश्मीर में शनिवार को सिक्युरिटी फोर्सेज ने 2 एनकाउंटर ऑपरेशन्स को अंजाम दिया। एक ऑपरेशन रामपुर सेक्टर तो दूसरा त्राल में चलाया गया। 24 घंटे में आर्मी ने 10 आतंकी मारे गए, इनमें सब्जार भी शामिल है। ट्रेनों की आवाजाही रद्द - कश्मीर में हिंसा को देखते हुए ट्रेन सर्विस सस्पेंड कर दी गई है। रेलवे के एक ऑफिशियल ने बताया, नॉर्थ कश्मीर में श्रीनगर-बडगाम और बारामुला के बीच ट्रेनों की आवाजाही फिलहाल रोक दी गई है। इसी तरह बडगाम-श्रीनगर-अनंतनाग-काजीगुंड से बनिहाल तक जाने वाली ट्रेनें भी रद्द कर दी गई हैं। सुरक्षा वजहों से ये कदम उठाया गया है। - हालांकि शनिवार सुबह तक घाटी में ट्रेन रूट नॉर्मल था। बता दें कि पिछले साल बुरहान वानी के मारे जाने के बाद भी हिंसा के चलते घाटी में ट्रेन सर्विस करीब 6 महीने लगातार सस्पेंड करनी पड़ी थी। मोबाइल इंटरनेट सर्विस पर रोक - सब्जार के मारे जाने के बाद एहतियात के तौर पर पूरे कश्मीर में मोबाइल इंटरनेट सर्विसेज पर भी रोक लगा दी गई है। एक ऑफिशियल ने बताया कि हालांकि BSNL की ब्रॉडबैंड सर्विस नॉर्मल तरीके से चालू है। किसी तरह की अफवाहें न फैलें, इसलिए ये कदम उठाया गया है। - बता दें कि इससे पहले राज्य सरकार ने घाटी में 22 सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर बैन लगा दिया था, जो करीब एक महीने तक जारी रहा था। हालांकि हाल ही में बैन हटा दिया गया था। घाटी में स्कूल-कॉलेजभी बंद - कश्मीर में शनिवार को ज्यादातर कॉलेज और स्कूलों को बंद कर दिया गया और लोगों को फोन कर अपने बच्चों को घर ले जाने को कहा गया। इनमें प्राइवेट इंस्टीट्यूशन भी शामिल हैं। एक ऑफिशियल ने बताया कि सब्जार के मारे जाने के बाद भड़की हिंसा में स्टूडेंट्स भी शामिल न हो जाएं, इसलिए ये फैसला लिया गया।
    Last Updated: May 27, 19:16 PM
  • श्रीनगर. जम्मू-कश्मीर में शनिवार को सिक्युरिटी फोर्सेस ने 2 एनकाउंटर ऑपरेशन्स को अंजाम दिया। एक ऑपरेशन रामपुर सेक्टर तो दूसरा त्राल में चलाया गया। 24 घंटे में आर्मी ने 10 आतंकी मार गिराए। त्राल के एनकाउंटर में हिजबुल मुजाहिदीन का टॉप कमांडर सब्जार अहमद भट भी मारा गया। आतंकियों के मारे जाने के बाद घाटी में कई जगह लोगों ने आर्मी पर पथराव किया।बता दें किइंडियन आर्मी ने शुक्रवार को पाकिस्तान बॉर्डर एक्शन टीम (BAT)के 2 आतंकियों को मार गिराया था। ये उड़ी सेक्टर में एलओसी के पास आर्मी की पैट्रोलिंग टीम पर अटैक की प्लानिंग कर रहे थे। बुरहान का उत्तराधिकारी था सब्जार... - सब्जार बुरहान वानी का उत्तराधिकारी था। बुरहान को सिक्युरिटी फोर्सेस ने पिछले साल 8 जुलाई को मार गिराया था। बुरहान को कश्मीर में पोस्टर ब्वॉय माना जाता था। वह युवाओं की आतंकी संगठन में भर्ती करता था। - जम्मू-कश्मीर के डीजीपी एसपी वैद के मुताबिक, त्राल में शनिवार को हुए एनकाउंटर में 2 आतंकी मारे गए। इनमें बुरहान का उत्तराधिकारी सब्जार अहमद भट भी है। - एक पुलिस अफसर के मुताबिक, सिक्युरिटी फोर्सेस ने त्राल के सोइमो गांव में सर्च ऑपरेशन चलाया था। यहां हिजबुल आतंकियों को छिपे होने की सूचना मिली थी। - अफसर ने ये भी बताया कि शुक्रवार रात को आर्मी पैट्रोलिंग पार्टी पर फायरिंग की थी। इसके बाद सर्चिंग शुरू की गई।सिक्युरिटी फोर्सेस ने 4 एके-47 राइफलें भी बरामद की हैं। - आतंकियों के मारे जाने के बाद लोगों ने पुलवामा और अनंतनाग में आर्मी पर पथराव किया। - आर्मी के मुताबिक, बीते 24 घंटे में हमने 10 आतंकी मार गिराए। रमजान के महीने में कश्मीर में अशांति फैलाने की पाक की कोशिशें नाकाम कर दी गईं। कौन था सब्जार? - सब्जार बुरहान का बचपन का दोस्त था। बुरहान के मारे जाने के बाद सब्जार ही उसका उत्तराधिकारी बना। - बता दें कि बुरहान के मारे जाने के बाद कश्मीर में कई महीनों तक हिंसा हुई थी। इसके चलते कर्फ्यू लगा दिया गया था। स्कूल-कॉलेज बंद - आतंकियों के मुठभेड़ में मारे जाने के बाद बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन की आशंका को देखते हुए एहतियातन श्रीनगर में प्राइवेट इंस्टीट्यूशन समेत ज्यादातर स्कूलों और कॉलेजों में क्लालेस को सस्पेंड कर दिया गया। इंटरनेट सर्विस भी बंद कर दी गई हैं। गुलहाटा पोस्ट के पास हुआ था एनकाउंटर - डिफेंस मिलिट्री स्पोक्सपर्सन कर्नल राजेश कालिया ने बताया था- बारामूला के उड़ी सेक्टर में गुलहाटा पोस्ट के पास शुक्रवार सुबह भारी हथियार से लैस आतंकी देखे गए। ये पैट्रोलिंग पार्टी पर हमला करने की कोशिश में थे। इंडियन जवानों ने उन्हें रोकने की कोशिश की। तभी फायरिंग शुरू हो गई। जवानों ने इन्हें मार गिराया। - बाद में इनकी पहचान पाकिस्तान बॉर्डर एक्शन टीम के मेंबर्स के तौर पर हुई। - न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि इन आतंकियों की बॉडी नो मेन्स लैंड में देखी गई। यह वह इलाका होता जो भारत-पाक की सीमा के बीच है। जहां किसी का कब्जा नहीं है। पुंछ मेंघात लगाकर आर्मी की टुकड़ी पर किया था अटैक - 1 मईकृष्णा घाटी में पाकिस्तान ने पहले रॉकेट और भारी हथियारों से हमला किया था। भारत की तरफ से भी जवाब दिया गया था। इस दौरान दो पोस्ट के बीच भारतीय जवानों की एक टुकड़ी एलओसी पर लगी तारों की फेंसिंग पार कर लैंड माइन्स की चेकिंग के लिए आगे गई थी। पाकिस्तान की BAT वहां पहले से घात लगाकर बैठी थी। उसकी फायरिंग में हमारे दो जवान शहीद हो गए। इसके बाद BAT ने शहीदों के शवों के साथ बर्बरता की। उनके सिर काट दिए गए। - वहीं, आर्मी के एक सीनियर अफसर ने बताया- यह सोचा-समझा हमला था। पाकिस्तान आर्मी की बीएटी टीम एलओसी पार कर भारतीय सीमा में करीब 250 मीटर तक घुस आई थी। ये काफी देर से हमले को अंजाम देने का इंतजार कर रहे थे। सोमवार सुबह पाक ने रॉकेट और मोर्टार से हमला किया। भारतीय पोस्ट पर तैनात जवानों को उलझाए रखा। इसके बाद उनका टारगेट 7 से 8 मेंबर वाली पैट्रोलिंग पार्टी थी, जो पोस्ट से बाहर चेकिंग के लिए आई थी। BAT ने दो जवानों के सिर काट दिए थे - पाक के हमले में 22 सिख इन्फैंट्री के नायब सूबेदार परमजीत सिंह और बीएसएफ की 200वीं बटालियन के हेड कॉन्स्टेबल प्रेम सागर शहीद हो गए। वहीं, बीएसएफ के कॉन्स्टेबल राजेंद्र सिंह जख्मी हो गए थे। बता दें कि शहीद प्रेम सागर यूपी के देवरिया के रहने वाले थे। क्या है BAT ? - BAT का पूरा नाम पाकिस्तान बॉर्डर एक्शन टीम है। इसके बारे में सबसे पहले पांच और छह अगस्त 2013 की दरमियानी रात को पता लगा था। तब इसने एलओसी पर पैट्रोलिंग कर रही भारतीय सेना की टुकड़ी को निशाना बनाया था। - BAT हकीकत में पाकिस्तान की स्पेशल फोर्स से लिए गए सैनिकों का ग्रुप है। हैरानी की बात ये है कि BAT में सैनिकों जैसी ट्रेनिंग पाए आतंकी भी हैं। ये एलओसी में 1 से 3 किलोमीटर तक अंदर घुसकर हमला करने के लिए तैयार किया गया है। - BAT को स्पेशल सर्विस ग्रुप यानी एसएसजी ने तैयार किया है। यह पूरी प्लानिंग के साथ अटैक करती है। ये टीम पहले खुफिया तौर पर ऑपरेशनों को अंजाम देती थी, लेकिन बाद में मीडिया की वजह से खबरों में रहने लगी। आगे की स्लाइड्स में देखें-पाक ने पहले भी किया था हमारे सैनिकों का अपमान...
    Last Updated: May 27, 18:44 PM
  • सहारनपुर. राहुल गांधी शनिवार को पुलिस और जिला एडमिनिस्ट्रेशन की इजाजत न मिलने के बाद भी यूपी के हिंसा प्रभावित जिले सहारनपुर पहुंचे। पुलिस ने उन्हें सरसावा गांव में ही रोक दिया। राहुल ने यहीं पर दलित परिवारों से मुलाकात की, लेकिनशब्बीरपुर नहीं जा पाए। उन्होंने कहा, राज्य सरकार यूपी में लॉ एंड ऑर्डर लागू करने में फेल रही है। देश का हर शख्स जो पावरफुल नहीं है, वह डरा हुआ है। सरकार चलाने का ये तरीका ठीक नहीं है। बाद में राहुल वापस दिल्ली रवाना हो गए। बता दें कि 5 मई को शब्बीरपुर गांव में दलितों और ठाकुरों के बीच झगड़ा हो गया था। इसमें एक ठाकुर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद जारी हिंसा में अब तक 2 लोगों की मौत हो चुकी है। राहुल ने कहा- मैं लौटकर फिर आऊंगा... - राहुल गांधी ने कहा, मुझे एडमिनिस्ट्रेशन ने कहा है इसलिए मैं वापस जा रहा हूं, जैसे ही यहां समस्या ठीक होगी, वो मुझे गांव में ले जाएंगे।सहारनपुर जाना चाहता था, मुझे जाने नहीं दिया गया, दरअसल उन्होंने मुझे यूपी बॉर्डर पर रोक दिया था, मैं उठ के यहां आ गया। - जम्मू-कश्मीर में जब शांति होती है हिंदुस्तान को फायदा होता है, हिंसा होती है तो पाक को फायदा होता है। ये काम मोदी जी कर रहे हैं। आज के हिंदुस्तान में गरीब, कमजोर के लिए जगह नहीं है, दलितों को दबाया जा रहा है। ये पूरे हिंदुस्तान में हो रहा है। - इससे पहले, यूपी के एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) आदित्य मिश्रा ने कहा कि राहुल गांधी को सहारनपुर बॉर्डर पर रोक दिया जाएगा। उधर,जिला प्रशासन ने अखिलेश यादव को भीशब्बीरपुर गांव जाने की इजाजत नहीं दी। -राहुल के सहारनपुर आने के सवाल पर ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने कहा, राहुल गांधी एंड कंपनी फ्रस्टेशन में है। वो ट्रेजडी टूरिस्ट हैं, जहां ट्रेजडी होती है जरूर जाते हैं। सहारनपुर में क्या हुआ, QA में समझें Q. कैसे शुरू हुआ विवाद? A. सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में 5 मई को महाराणा प्रताप शोभायात्रा के दौरान डीजे बजाने को लेकर ठाकुरों और दलितों के बीच झगड़ा हो गया था। इसमें ठाकुर पक्ष के एक शख्स की मौत हो गई थी। Q. कैसे भड़की हिंसा? A. इस घटना के बाद दलितों के 60 से ज्यादा मकान जला दिए गए थे और कई गाड़ियों में आग लगा दी गई। इस घटना का दलितों की भीम आर्मी ने विरोध किया। - 9 मई को सहारनपुर में दलित इकट्ठा हुए। पुलिस ने उन्हें समझाने की कोशिश की, तो वो भड़क गए। जिले में 9 जगह हिंसा हुई। दुकानों और गाड़ियों में आग लगा दी गई। 21 मई को दलितों ने बड़ी तादाद में दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट किया। Q. मायावती का क्या रोल? A. 23 मई को मायावती 5 मई को हुई हिंसा के विक्टिम्स के परिवार वालों से मिलने शब्बीरपुर गांव पहुंचीं। उन्होंने दलित विक्टिम्स को पार्टी फंड से 25 से 50 हजार रुपए तक की मदद देने का एलान किया। वहां एक सभा भी की। - यहां से घर लौट रहे दलितों पर रास्ते में हमला कर दिया गया। इसमें एक शख्स की मौत हो गई, कई लोग घायल हो गए। इसके बाद दलितों ने अपर कास्ट के लोगों के 2 घरों में आग लगा दी। Q. सीएम योगी ने क्या किया? A. हालात काबू करने के लिए सीएम योगी ने 23 मई की रात ही स्टेट प्लेन से 4 अफसरों की एक टीम लखनऊ से सहारनपुर भेजी। गाजियाबाद, मेरठ, अलीगढ़ और आगरा से 5 PAC के कमाडेंट भी भेजे गए। - बुधवार देर शाम सहारनपुर के डीएम एनपी सिंह और एसएसपी सुभाष चंद्र दुबे को सस्पेंड कर दिया गया। डिविजनल कमिश्नर एमपी अग्रवाल और डीआईजी जेके शाही का भी ट्रांसफर कर दिया गया। प्रमोद कुमार पांडेय को नया डीएम बनाया गया है। बबलू कुमार सहारनपुर के नए एसएसपी बनाए गए हैं। Q. पुलिस ने क्या किया? A. इस मामले में अब तक 25 लोगों को अरेस्ट किया गया है। भीम आर्मी फाउंडर चंद्रशेखर को नामजद किया गया है। गांव में ऐसा माहौल कभी नहीं देखा: बुजुर्ग - दलित बिरादरी के शौराज और 102 साल की सुंदर देवी का कहना है कि गांव में ऐसा माहौल कभी नहीं देखा। सब मिल-जुलकर रहते थे। नफरत फैलाने वालों को सजा मिलनी चाहिए। दोनों ही पक्षों का कहना है कि इस हिंसा में शामिल लोग दूसरे गांवों से आए थे। दलित बिरादरी के लोगों ने यह भी कहा कि जबसे बीजेपी की योगी सरकार आई है, तब से दलितों पर अत्याचार बढ़ रहे हैं। - जबकि ठाकुर बिरादरी के ब्रहमसिंह कहते हैं कि प्रदेश सरकार दलितों का पक्ष ले रही है। दलित बिरादरी की महिला ओमवती और नीता ने कहा कि उपद्रवियों ने उनके जेवर तक लूट लिए। वैसे तो गांव में 24 घंटे पुलिस के जवान तैनात हैं, पर लोग सहमे हुए हैं। रात में सो भी नहीं पा रहे हैं। भीम आर्मी के नक्सलियों से जुड़े होने का शक: पुलिस अफसर - सहारनपुर में हिंसा के बाद सस्पेंड किए गए एसएसपी सुभाष चंद दुबे ने कहा, भीम आर्मी गैरकानूनी संगठन है। इसके मेंबर पर्सनल बैंक खातों में चंदा जमा करते हैं। इसके तीन पर्सनल बैंक खाते मिले हैं। संगठन से जुड़े लोग अराजकता फैला रहे हैं। इनके नक्सलवादियों से भी जुड़े होने के संकेत मिल रहे हैं। जांच चल रही है। क्या है भीम आर्मी? - यह संगठन सहारनपुर के 700 गांवों में एक्टिव है। 2013 में बनी भीम आर्मी दलितों को लीड करती है। इसका चीफ एडवोकेट चंद्रशेखर आजाद है। वो फिलहाल फरार है। दावा है कि हर गांव में भीम आर्मी के 8 से 10 युवा मेंबर हैं। ये सभी अपने सिर पर नीला कपड़ा बांधते हैं। बता दें कि मायावती ने आरोप लगाया है कि भीम आर्मी बीजेपी की ही टीम है।
    Last Updated: May 27, 17:42 PM
  • नई दिल्ली. मॉरीशस के पीएम प्रविंद कुमार जगन्नाथ ने शनिवार को नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। दोनों देशों के बीच डेलीगेशन लेवल की बातचीत हुई। इसके बाद 4 करार हुए। इनमें मॉरीशस को 3227 करोड़ रुपए (500 मिलियन डॉलर) का कर्ज देने का करार भी शामिल है। बाद में मोदी और जगन्नाथ ने ज्वाइंट स्टेटमेंट जारी किया। मोदी ने कहा, हमारी जड़ें उन लोगों और सोसाइटीज के जरिये जुड़ी हैं जिन्हें हमारी साझा विरासत पर गर्व है। डेवलपमेंट को लेकर दोनों देश कमिटेड... - न्यूज एजेंसी के मुताबिक मोदी ने कहा, 500 मिलियन डॉलर का करार विकास को लेकर दोनों देशों के कमिटमेंट को बताता है। भारत प्रोजेक्ट Trident के तहत मॉरीशस के NCG को अपनी क्षमता को बढ़ाने में मदद कर रहा है। - मोदी ने कहा, जगन्नाथ और मैं इस बात पर रजामंद हैं कि हम पर अपने तटों और EEZs की सामूहिक समुद्री सुरक्षा तय करने की जिम्मेदारी है। हिंद महासागर के खतरों से निपटने के लिए हमें प्रभावी मैनेजमेंट करने की जरूरत है।हम सम्मानित महसूस कर रहे हैं कि पीएम के तौर पर पद संभालने के बाद प्रविंद जगन्नाथ ने अपने पहले विदेशी दौरे के लिए भारत को चुना। - प्रविंद कुमार ने हैदराबाद हाउस में मोदी से मुलाकात की। बता दें कि मॉरीशस के पीएम 3 दिन के दौरे पर भारत आए हैं। वे शुक्रवार को नई दिल्ली पहुंचे। हमारे रिश्तों ने नया आयाम लिया: मॉरीशस के पीएम - प्रविंद कुमार ने कहा, पहले से ही दोस्ताना रहे भारत और मॉरीशस के संबंध ने मेरे पीएम बनने के बाद एक नया आयाम लिया है। हमने डिफेंस और सिक्युरिटी की फील्ड में एक मजबूत बाइलैट्रल कोऑपरेशन डेवलप किया है। ये 4 करार हुए - मॉरीशस को 500 मिलियन डॉलर का कर्ज देने का करार। - मॉरीशस में सिविल सर्विसेज कॉलेज बनाने का करार। - मैरीन साइंस और टैक्नोलॉजी की फील्ड में करार। - इंटरनेशनल सोलर अलायंस से जुड़ा करार। सुषमा से भी मिले जगन्नाथ - प्रविंद कुमार जगन्नाथ ने सुषमा स्वराज से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने ट्रेड और इन्वेस्टमेंट समेत कई क्षेत्रों में बाइलैट्रल कोऑपरेशन को लेकर चर्चा की। - शनिवार सुबह प्रविंद जगन्नाथ का राष्ट्रपति भवन में रस्मी स्वागत किया गया। मोदी और उनके कैबिनेट सहयोगियों ने उनका स्वागत किया। प्रविंद कुमार ने गार्ड ऑफ ऑनर का इंस्पेक्शन भी किया। इससे पहले उन्होंने राजघाट पर जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। - प्रविंद कुमार ने राजनाथ सिंह, सुरेश प्रभु और धमेंद्र प्रधान से भी मुलाकात की है। इनके भारत दौरे का शनिवार को दूसरा दिन है। प्रविंद कुमार ने इस साल जनवरी में ही पीएम पद संभाला था। यह इनका पहला विदेश दौरा है।
    Last Updated: May 27, 16:59 PM
  • श्रीनगर/नई दिल्ली. जम्मू-कश्मीर में शनिवार को सिक्युरिटी फोर्सेस ने 2 एनकाउंटर को अंजाम दिया। रामपुर सेक्टर में 6 आतंकियों को मार गिराया। वहीं, पुलवामा के त्राल में फोर्सेस ने 2 आतंकियों को ढेर कर दिया। त्राल के एनकाउंटर में हिज्बुल मुजाहिदीन का टॉप कमांडर सब्जार अहमद भट भी मारा गया। पिछले साल में जुलाई में आतंकी बुरहान वानी के एनकाउंटर में मारे जाने के बाद हिज्बुल मुजाहिदीन की कमान सब्जार अहमद भट ने संभाली थी। ऐसा कहा जाता है कि भट प्यार में नाकाम होने के बाद आतंकवादी बना था। सात प्वाइंट्स में जानिए सब्जार और वानी के बारे में... 1) बुरहान का उत्तराधिकारी था सब्जार - सब्जार बुरहान वानी का उत्तराधिकारी था। बुरहान को सिक्युरिटी फोर्सेस ने पिछले साल 8 जुलाई को मार गिराया था। - जम्मू-कश्मीर के डीजीपी एसपी वैद के मुताबिक, त्राल में शनिवार को हुए एनकाउंटर में 2 आतंकी मारे गए। इनमें बुरहान का उत्तराधिकारी सब्जार अहमद भट भी है। - एक पुलिस अफसर के मुताबिक, सिक्युरिटी फोर्सेस ने त्राल के सोइमो गांव में सर्च ऑपरेशन चलाया था। यहां हिज्बुल आतंकियों को छिपे होने की सूचना मिली थी।शुक्रवार रात को आर्मी पैट्रोलिंग पार्टी पर फायरिंग की थी। इसके बाद सर्चिंग शुरू की गई। (पूरी खबर यहां पढ़ें) 2) सबडॉन के नाम से जाना जाता था - सब्जार साउथ कश्मीर के त्राल का रहने वाला था। उसके पिता का नाम गुलाम हसन भट है। - सब्जार, बुरहान के बचपन का दोस्त और उसका बेहद भरोसेमंद था। ऐसा कहा जाता है कि सब्जार और वानी ने दो साल हिज्बुल में काम किया था। इसे कश्मीर में एक्टिव आतंकियों, लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) और हिज्बुल के आकाओं के बारे में पूरी जानकारी थी।यह अपने इलाके में सब डॉन के नाम से जाना जाता था। 3) कब बना था आतंकी - मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 25 साल का सब्जार पिछले साल जुलाई में बुरहान वानी के मारे जाने के बाद वह हिज्बुल के लिए काम कर रहे कश्मीरी युवाओं की अगुआई कर रहा था। - बीते साल 8 जुलाई को वानी के एनकाउंटर के बाद सब्जार को हिज्बुल का नया लोकल कमांडर बनाया गया था। उसे वानी के सुपुर्दे खाक के दौरान भी देखा गया था। हालांकि, हिज्बुल ने ऑफिशियल इसका एलान नहीं किया था। 4) सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर अशांति फैलाने का आइडिया सब्जार का ही था - ऐसा कहा जाता सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके घाटी में अशांति फैलाने के आइडिया का सब्जार का ही था। बता दें कि बुरहान और उसके साथियों के कई तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किए गए थे। - इन वीडियोज के जरिए ही बुरहान को कश्मीर के आम लोगों में पहचान मिली थी। इन फोटोज और वीडियो में सब्जार भी नजर आया था। - कुछ दिन पहले बुरहान वानी की 11 साथियों के साथ वाली एक फोटो वायरल हुई थी। इनमें से एक भट भी था। यह फोटो खुद भट ने सोशल मीडिया पर अपलोड की थी। 5) सिक्युरिटी फोर्सेस से राइफल छीनकर भागा था - ऐसा कहा जाता है कि सब्जार ने एक सिक्युरिटी जवान से हथियार छीनकर खुद को आतंकवादी बनने की बात साबित की थी। इसके बाद ही उसे हिज्बुल में जगह मिली थी। - सब्जार ने ऐसा उस वक्त किया था जब बुरहान की मौत के बाद कश्मीर में विरोध प्रदर्शन हो रहे थे। 6) भट पर 10 लाख रुपए का इनाम था इससे पहले मार्च में त्राल में सिक्युरिटी फोर्सेस ने घेर लिया था, लेकिन रात में अंधेरे का फायदा उठाकर वह वहां से निकल भागा। - इस दौरान स्थानीय लोगों ने भट को बचाने के लिए पत्थरबाजी भी की थी। उस पर 10 लाख का इनाम था। 7) कौन था बुरहान ? - 22 साल का बुरहान वानी 15 साल की उम्र में आतंकी बना था। पिछले कुछ महीनों से बुरहान साउथ कश्मीर में बहुत एक्टिव था। उसने यहां के कई पढ़े-लिखे यूथ्स को बरगला कर आतंकी बनाया था। - कश्मीरी यूथ को रिक्रूट करने के लिए वह फेसबुक-वॉट्सऐप पर वीडियो और फोटो पोस्ट करता था। इनमें वो हथियारों के साथ सिक्युरिटी फोर्सेस का मजाक उड़ाते हुए नजर आता था। - वानी को भड़काऊ स्पीच देने और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने में एक्सपर्ट माना जाता था। सिक्युरिटी फोर्सेस ने इसे 8 जुलाई को एक एनकाउंटर में मार गिराया था। - वानी की मौत के बाद कश्मीर में करीब 90 दिन तक विरोध-प्रदर्शन होते रहे थे।
    Last Updated: May 27, 16:14 PM

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