मुस्कुराहट के देवता को नम आंखों का सलाम

 
Source: ननु जोगिंदर सिंह     Designation: पत्रकार
 
 
 
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http://unified.bhaskar.com/city_blogger_author_images/thumb_image/100103_thumb.gif ब्लैक एंड व्हाइट टीवी पर सुबह-सुबह उल्टा-पुल्टा देखने के लिए छुट्टी वाले दिन सोने का मोह भी छोड़ देना। एक सरदार जी नेताओं का खूब मजाक बनाते थे। सबके फेवरेट थे। ममा ने बताया कि इन्हें सिर्फ कॉमेडियन मत समझना, ये इंजीनियर हैं। धीरे-धीरे बड़े हुए तो उनको समाज की हर बुराई पर चोट करते देखा। चाहे प्याज महंगे होने का मसला हो या पंजाब में नशों की गंभीर स्थिति। अब उनके ही शहर में नम आंखों से विदाई दी। हर ओर उन्हीं का चर्चा है।
एक नाराजगी और अफसोस भी है। आखिर क्या जरूरत थी इतनी रात को सफर करने की। हमने ऐसे शख्स को खो दिया जो खूबसूरत शब्दों के साथ अपनी बात कहने की कला जानता था। उनकी टिप्पणियां किसी को नाराज नहीं होने देतीं। कॉमेडी में वल्गैरिटी नहीं बल्कि समाज के प्रति जागरूकता फैलाने का मकसद था। दिन भर एक ही बात सुनाई दी कि आम लोगों का आदमी चला गया।
याद आ रहा है सालों पुराना वह दिन जब सुखना लेक में क्रिकेट की खबर अखबारों में पढ़ी। उस वाकये ने इतना असर डाला कि चंडीगढ़ प्रशासन ने तुरंत लेक को साफ कराया। उस समय देश भर को सुखना की स्थिति का पता लगा। उनके प्रयास का प्रभाव इतना था कि जब डल लेक के लिए उन्होंने कहा कि मैं वहां पर भी क्रिकेट खेलूंगा तो घबराए प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई कर दी। माहौल ठीक है कि जरिए पुलिस पर चोट तो की लेकिन कई मजबूरियां भी दिखा दीं। उनका दायरा सिटी ब्यूटीफुल से बहुत आगे था। हंसी की फुहारों के बीच चोट करने का माद्दा शायद ही किसी अन्य पंजाबी हास्य कलाकार में हो। ऐसे कलाकार को दिल से सलाम . . . .
 
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