है दुनिया वही, इक तारा न जाने कहां खो गया...
Source: लवलीन धालीवाल Designation: लाइफस्टाइल जर्नलिस्ट
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12 दिसंबर 2012 यानी वो दिन जब दुनिया खत्म हो जाएगी, ऐसी अफवाहें हैं। उधर, अमेरिका में सुपर सैंडी सुपर पावर को प्रलय के ट्रेलर दिखा भी रहा है। कुछ-कुछ 2012 फिल्म के दृश्यों जैसा...सबसे पहले बिजली कट जाती है, बेघर से घूमते लोग, खाने-पीने की चीजें नहीं। बार-बार नाम बदलते रहते हैं और तबाही के छोटे-छोटे ट्रेलर दुनिया के कई कोनों में दिखाई देते रहते हैं। पता नहीं इसे कुदरत के इशारे कहें या कुछ और, पर पीछे रह जाती हैं त्रास के ग्रास बने लोगों की यादें। खैर, दुनिया वहीं है और बेशक लोग आते-जाते रहें वो ऐसे ही चलती रहेगी। लेकिन यहां हम बात कर रहे हैं दुनिया को रोशन करने वाले उन सितारों की जो गुम होते जा रहे हैं। ये भी किसी युग के अंत से कम तो नहीं। कभी हमारे चेहरे की हंसी बनकर, कभी संजीदगी से जिन्होंने जीने के हज़ारों पाठ सिखाए... वो श स अचानक ही अलविदा कह गए। ऐसा शायद ही कभी हुआ हो कि इतने कम समय में इतनी सारी बड़ी श िसयतें दुनिया छोड़कर चली गई हों। जाते साल के साथ अलविदा कहने वालों की लिस्ट लंबी हो रही है। यश चोपड़ा लगातार कहते रहे कि ये उनकी आखिरी फिल्म है लेकिन इस तरह से आखिरी होगी, ये किसी ने सोचा नहीं था। पर कुदरत इशारे देती रहती है। यश चोपड़ा अपनी फिल्म रिलीज किए बिना ही चले गए तो जसपाल भट््टी अपनी फिल्म रिलीज होने से एक दिन पहले। कुछ लोगों से रिश्ता स्क्रीन का होता है और कुछ से दिल का। जसपाल भट्टी थे ही ऐसे। जिससे मिलते दिल का रिश्ता जोड़ते चले जाते। बॉलीवुड के चाहने वालों के लिए ये साल या पिछला एक साल बेहद सदमे से भरा रहा... राजेश खन्ना, दारा सिंह, देव आनंद, ए के हंगल, सिनेमेटोग्राफर अशोक मेहता, अचला सचदेव, गजल गायक मेहंदी हसन, जगजीत सिंह, डायरेक्टर-प्रोड्यूसर राजकंवर। और अब यश चोपड़ा, जसपाल भट्टी...
ये इत्तेफाक ही है कि जितने भी लोग अलविदा कह गए उनमें से ज्यादातर की जड़े पंजाब से जुड़ी रही। अमृतसर में जन्में जसपाल भट्टी इस रीजन की जान थे तो यश चोपड़ा का पंजाब से गहरा नाता रहा। राजेश खन्ना और दारा सिंह का जन्म अमृतसर में हुआ तो देव आनंद गुरदासपुर से थे। जगजीत सिंह का जन्म रोपड़ में हुआ और पढ़ाई जालंधर में। ये भी कॉमन है कि इनमें से ज्यादातर ने साल के अंत या मानसून के दिनों में अलविदा कहा। जाने वालों में और भी कई बड़े नाम हंै, सफेद क्रांति के जनक वर्गेस कुरियन हो या नील आर्मस्ट्रॉन्ग। ऐसा श िसयत कि जब तक चांद रहेगा उनका नाम रहेगा। दुनिया को नई नज़र देने वाले और बड़े बदलावों के पीछे के इन पिलर्स की कोई रिप्लेसमेंट नहीं। बस, गुजरते दिनों के साथ ये और, और याद आते रहेंगे। हम इतना ही कर सकते हैं कि... जिंदादिली के इन सच्चे बादशाहों को दिल से सच्ची श्रृद्धांजलि।