जीने का फंडा...छोटी चीजों की बड़ी खासियत
Source: लवलीन धालीवाल Designation: लाइफस्टाइल जर्नलिस्ट
|
पिछले दिनों एक मेडिटेशन सेशन में हिस्सा लेने का मौका मिला। इसमें बहुत-सी चीजें जानी-सीखी। बातें छोटी-छोटी थी और ऐसा भी नहीं कि हम इन्हें जानते न हों, बस कभी गौर नहीं करते। इन्हें जिंदगी में आज़माते नहीं। छोटी बातों को थोड़ा सीरियसली ले लें तो जिंदगी कितनी खास लगने लगेगी, ऐसा मैंने इन चीजों को जिंदगी में उतार कर महसूस किया। बस जो जाना उसे बांट रही हूं... क्योंकि चाहती हूं कि आप भी छोटी चीजों की बड़ी खासियत महसूस कर सकें। यकीन मानिए थोड़ा-सा बदलाव, जिंदगी को थोड़ा-सा समझने की कोशिश और ये खुद ब खुद नई चीजें सिखाना शुरू कर देती है।
- कोर्स में जब मुझसे पूछा गया कि पिछले कुछ समय खुद में क्या इ प्रूवमेंट देखी और पर्सनेलिटी में क्या पॉजीटिव चेंज आए तो काफी मशक्कत करने के बाद भी दिमाग में कुछ खास नहीं आया। तब लगा ये वक्त अपने बारे में सोचने का है। कितने भी बिजी हों। कुछ पल अपने लिए निकालें। ऐसे पल जिसमें सिर्फआप हों, बेशक इसके लिए स्वार्थी बनना पड़े। फंडा पल्ले बांध लें कि रोज कुछ नया सीखना है... फिर वो नया एक शब्द ही क्यों न हो।
- जब ऐसे लोगों से मिलते हैं जो आपको प्रेरणा देते हैं तो उनसे मिलने वाली पॉजीटिव एनर्जी और अंदर आए पॉजीटिव बदलाव खुद महसूस होने लगते हैं। ऐसे लोगों से मिलने का समय जरूर निकालें जिनसे आपको प्रेरणा मिलती हो।
- कभी ऐसा सोचा है कि काम की वजह से कुछ चीजें पीछे छूट गई हैं। सोशल लाइफ कम हो गई है या दोस्तों से मिलना कम होता है। ऐसा है तो समय नया फ्रेम तैयार करने का है। फैमिली, जॉब, सोशल लाइफ, स्पीरिचुअल और हैल्थ व फिटनेस के फ्रे स तैयार करें और जिंदगी को इन फ्रे स में रखकर बांटे। ताकि किसी एक चीज को ज्यादा समय देने के चक्कर में दूसरी खुशी जिंदगी से गायब ही न हो जाए।
- ऐसी खुशी जो दिल से जुड़ी हो, अगर उसे महसूस किए काफी दिन हो गए हैं तो अपने आस-पास खेलते बच्चों को देखें। एक कोने में बैठ जाइए और वो मस्त होकर जो भी कर रहे हैं, उसे बारीकिसे देखिए। आप महसूस करेंगे कि खुशी किन छोटी-छोटी चीजों में है। बड़ी खुशियां पाने के चक्कर में अक्सर हम छोटी चीजों को ही नहीं अपनी इन खुशियों को नजरंदाज कर देते हैं।
- इस दौरान मैंने सबसे ज्यादा शब्दों की अहमियत को जाना। खुद एक अनुभव से महसूस किया कि शब्द बहुत कुछ बिगाड़ सकते हैं और सुधार भी। ये भी जाना कि चिल्लाने से चीजें बिगड़ती हैं, सुधरती नहीं। सिर्फ दिमाग खुला रखकर या सोच-समझकर बोलना ही काफी नहीं बल्कि गुस्से और उत्तेजना में सही शब्दों का इस्तेमाल करेंगे तो संबंधों के खराब होने की गुंजाइश ही पैदा नहीं रहेगी।
सेशन के दौरान ये भी जाना कि बेशक कितने भी मनमुटाव हों, फायदा सबको साथ लेकर चलने में है। इन चीजों पर गौर करके मुझे तो जिंदगी में कई पॉजीटिव बदलाव मिल रहे हैं। अब बारी आपकी है... फर्क पहले दिन से दिखेगा।