बादल साहब, कहां है आपका कानून का राज?

 
Source: ब्रज मोहन सिंह     Designation: पॉलिटिक्‍ल एडिटर दैनिक भास्‍कर
 
 
 
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http://unified.bhaskar.com/city_blogger_author_images/thumb_image/100160_thumb.jpg आदरणीय मुख्यमंत्री जी,

मुख्यमंत्री जी, विधान सभा चुनाव के समय आपने नारा दिया था, राज नहीं सेवा पंजाब की जनता ने आपकी बातों पर यकीन किया, आपकी सरकार बनाई। आपकी शख्सियत और आपके तजुर्बे को देखकर सबको ऐसा लगा भी कि पंजाब में कानून का राज स्थापित होगा, पंजाब एक बार फिर से भारत का सिरमौर राज्य बन जाएगा।

लेकिन पिछले कुछ हफ्तों की घटनाओं को देखकर ऐसा लगने लगा है कि पंजाब में कानून की धज्जियां उड़ रही है। पंजाब में अगर पुलिस है तो उसका खौफ ख़त्म होता जा रहा है। अमृतसर में एक पुलिस जवान अपनी बेटी की आबरू बचाने के लिए आगे आता है, तो उसकी ह्त्या कर दी जाती है। हत्यारा कोई और नहीं, अकाली दल का वर्कर निकलता है।

घटना के बाद हालांकि, पंजाब के डीजीपी सुमेध सिंह सैनी ने तत्परता दिखाई, आरोपियों को पकड़ भी लाए।सवाल यह उठता है कि यह घटना हुई ही क्यों?

किसी की क्या हिम्मत, जो मां-बेटियों की तरफ नजर उठाकर देखे, और इज्जत पर हाथ डालने की जुर्रत भी करे। लेकिन ऐसा सबकी नज़रों के सामने हो रहा है। असल में अभी फरीदकोट की घटना को पंजाब भूला भी नहीं था कि अमृतसर जैसी शर्मनाक और बेहद दुखद घटना पेश हो गई। फिर हर दिन एक के बाद एक वारदात। जनता क्या करे, किससे सुरक्षा मांगे?

अब देखिए जालंधर में सरेराह एक पत्रकार पर जानलेवा हमला किया गया। हमें यह ज्ञात नहीं कि पत्रकार पर हमला करने वाले लोग किस पार्टी से ताल्लुक रखते थे, लेकिन वे जिस भी पार्टी से थे, उनकी नजर में कानून का कोई मतलब नहीं था। इस पत्रकार का कसूर यही था कि वह मोटर साइकिल पर सवार तीन लडकों को बाजार से होकर गुजर रही लड़की को छेड़ने से रोक रहा था। ऐसा आरोप लगा कि आम लोगों ने उपद्रव करने वालों को पकड़ा, पुलिस ने ज्यादातर लोगों को जाने दिया। जिन लोगों को बिना सजा दिए भाग जाने दिया गया, वह कल और बडी वारदात गुजरेंगे।

मोहाली में एक शादी में शरीक होने गए पंजाबी गायक को बुरी तरह पीटा गया। गायक का कसूर यही था कि उसने गाने से मना कर दिया था। पंजाबी गायक अभी घायल अवस्था में अस्पताल में पड़ा है। सडकों पर कानून की धज्जियां उड़ाने वाले इन दिशाहीन युवाओं को दिशा देने की जरूरत है। हर दिन बढ़ रही अपराध की घटनाओं से ऐसा लग रहा है कि सरकार कानून- व्यवस्था संभालने में सक्षम नहीं है।

बादल साहब, ऐसा संदेश लोगों में क्यों जा रहा है कि पुलिस और कानून को काम नहीं करने दिया जा रहा है। और जो कानून को हाथ में लेकर गुंडागर्दी करते हैं, ऐसे लोग राज्य के हितेषी कतई नहीं हैं।
 
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