उम्मीद है कि बोफोर्स प्रकरण के पटाक्षेप के बाद सरकार हथियार खरीदने की प्रक्रिया को स्वच्छ और पारदर्शी बनाने के साथ सरल भी बनाएगी।
भारतीय परम्परा में फिल्मी म्यूजिक अपनी शुद्धता लगातार खोता जा रहा है और अपनी बुनियाद से दूर खिसकता जा रहा है।
ईश्वर के खेत का कायदा कड़क है। बीज नीम का होगा तो फसल आम की उगेगी ही नहीं। परमात्मा कहता है फसल कभी झूठ नहीं बोलती।
नेपोलियन पर विजय का नशा कभी सिर चढ़कर नहीं बोला। जब वह स्कूल में पढ़ता था, कभी-कभी उसके पास पैसे नहीं होते थे। एक फलवाली उसे फल उधार देती थी।
परंपरा या उत्साह के नाम पर होने वाले ऐसे शक्ति प्रदर्शन जो वैधानिक सीमाओं को लांघते हों, पर फिर से विचार करने की जरूरत है।
यदि एंजेला मर्केल राजनीति में नहीं आतीं तो आज वे शायद किसी यूनिवर्सिटी में रसायन शास्त्र पढ़ा रही होतीं। क्वांटम केमिस्ट्री में डॉक्टरेट करने वाली..वव
बाहर से जितना दिखाई देता है वास्तव में मकान उतना ही नहीं होता। भीतर अपने अंत: कक्ष हैं। कुछ ऐसी व्यवस्थाएं हैं, जहां सिर्फ हम ही होते हैं और..
एक डाकू गुरुनानक के पास जाकर बोला- महाराज मैं अपने जीवन से तंग आ गया हूं। नानकजी ने उससे कहा- जो भी करो, उसे दूसरों से कहकर मन हलका कर लो।
पड़ोसी गले मिलना चाहता है तो स्वागत है, पर उसे बगल की छुरी का त्याग करना होगा। बातचीत का दिखावा करके पड़ोसी धर्म का निबाह नहीं हो सकता।
सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक बिंदेश्वर पाठक को मैला उठाने वाले लाखों लोगों का जीवन बदलने का श्रेय जाता है।
आपके बोलचाल का तरीका या हाव-भाव सामने वाले को यदि अनुकूल वातावरण देता है तो इसे पॉजिटिव स्ट्रोक्स कहा जाता है।
एक दिन लकड़हारे को एक घायल तोता दिखाई दिया। वह उसे घर ले आया और उसका उपचार किया। फिर किसी दिन पिंजरा खुला रह गया। तोता उड़ गया, लेकिन अंतत: वह..
आम जनता को इंतजार उस राम का है जो महंगाई के रावण को धराशायी करके उसके आततायी शासन से मुक्तिदिलाएं। तभी विजयादशमी सार्थक हो सकेगी।
शहीद भगतसिंह विचारों से भी क्रांतिकारी थे। महज 23 साल की उम्र में देश के लिए जान न्योछावर करने वाले भगतसिंह ने जेल के दौरान लिखी डायरियों में..
लंका के रावण का श्रीराम ने वध कर दिया, लेकिन अरूप रावण आज भी जीवित है। हर वर्ष उसे हम मारते हैं लेकिन वह फिर जिंदा हो जाता है।
आधुनिक जमाने के चूहों ने बिल्ली के गले में घंटी बांधने की नई तरकीब सोची। वे केमिस्ट की दुकान से नींद की गोलियां ले आए और..
काया तो यह देश छोड़कर चली जाएगी, लेकिन हमारी उन हजारों औरतों का क्या, जिनके साथ रोज बलात्कार होता है, उनके साथ छेड़छाड़ की जाती है, निर्वस्त्र करके
हमारे श्रम कानून पायलट जैसे केवल 10 फीसदी अभिजात्य श्रमिकों के हितों का ही संरक्षण करते हैं, जबकि ये 10 फीसदी श्रमिकों के प्रतिकूल हैं
विधानसभा चुनाव की वजह से महाराष्ट्र और हरियाणा में दिवाली थोड़ी जल्दी ही आ जाएगी। इन राज्यों के राजनीतिक दल इस बात से बहुत खुश हैं कि चुनाव नतीजों
ड्रैगन को चीनी ‘खतरे’ के तौर पर दिखाने का विचार बुनियादी रूप से ही गलत है। पश्चिम के ड्रैगन के उलट चीन का ड्रैगन बुराई की विध्वंसकारी ताकत का