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हिमाचल में नहीं चलता पैसे का खेल

शिमला. देश के कई राज्यों के मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में भले ही पैसे की बदौलत सत्ता पाने का खेल चल रहा हो परंतु अभी इस चलन से हिमाचल लगभग अछूता ही है। यहां मतदाता उम्मीदवार की आर्थिक हैसियत नहीं बल्कि उसकी छवि और पार्टी देखकर ही वोट देते हैं। आंकड़े बताते हैं कि चुनाव के दौरान उम्मीदवार निर्धारित राशि से आधा भी खर्च नहीं करते। वर्ष 2003 के विधानसभा चुनाव में 31 सीटों पर अपने प्रतिद्वंद्वियों से कम खर्च करने वाले उम्मीदवार ही जीतें हैं।

डेढ लाख से भी कम खर्च मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री प्रेमकुमार धूमल, रंगीलाराम राव, कुलदीप कुमार, सुधीर शर्मा, सतपाल सत्ती, वीरेंद्र कंवर, रघवीर ठाकुर, सुभाष मंगलेट, महेंद्र सिंह और सोहन लाल (कुसुम्पटी) ऐसे नेता हैं जो पिछले चुनाव में डेढ़ लाख से भी कम खर्च कर जीते थे।

80 फीसदी का खर्च 3 लाख से कम राज्य निर्वाचन आयोग में उम्मीदवारों की ओर से दिए गए चुनाव खर्च पर विश्वास करें तो 2003 के विधानसभा चुनाव में 80 फीसदी उम्मीदवारों ने तीन लाख से भी कम खर्च किया।

3.63 लाख से ज्यादा कोई नहीं चुनाव आयोग ने विधानसभा चुनाव के लिए 7.50 लाख रुपए अधिकतम खर्च निर्धारित किया है। पिछले विधानसभा चुनाव में शाहपुर से मेजर विजय सिंह मनकोटिया ने सबसे ज्यादा 3,63,808 रुपए चुनावी खर्च बताया है, जो निर्धारित राशि के आधे से भी कम है।

31 सीटों पर जीते कम खर्च वाले प्रदेश विधानसभा की 31 सीटों पर ऐसे उम्मीदवार चुनाव जीते हैं जिन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वियों से कम खर्च किया था। इनमें रोहड़ू, चौपाल, ठियोग, कसुम्पटी, नालागढ़, रेणुका, शिलाई, पांवटा साहिब, नाहन, घुमारवीं, हमीरपुर, नादौनता, गगरेट, चिंतपूर्णी, कुटलैहड़, नूरपुर, गुलेर, परागपुर, थूरल, जोगेंद्रनगर और मंडी आदि मुख्य विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं।

रघवीर जीते 98 हजार में चुनाव रघवीर ठाकुर लाहौल-स्पीति से 97,874 रुपए खर्च कर ही चुनाव जीत गए। जबकि प्रतिद्वंद्वी भाजपा के युवराज बोद्ध ने 3,34,475 और हिम लोकतांत्रिक मोर्चा उम्मीदवार रामलाल मारकंडेय ने 1,20,364 रुपए खर्च किए थे।





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