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पंजे को पस्त करके खिला कमल

शिमला / मुंबई. गुजरात के बाद लगातार दूसरा धमाका करते हुए भाजपा ने हिमाचल प्रदेश में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी को करारी शिकस्त दी है। भाजपा नेता प्रेम कुमार धूमल रविवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।

सभी 68 सीटों के नतीजे आ चुके हैं जिनमें भाजपा ने 41 सीटें जीतकर विधानसभा में पूर्ण बहुमत हासिल कर ली है। सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के 23 सीटों पर जीत मिली है । बहुजन समाज पार्टी ने एक सीट जीती है जबकि निर्दलीय उम्मीदवारों ने तीन सीटों पर जीत हासिल की है।

भाजपा नेता और मुख्यमंत्री पद के दावेदार प्रेम कुमार धूमल ने 26 हजार वोटों से बामसान विधानसभा क्षेत्र से जीत दर्ज की। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह शिमला जिले के रोहरु सीट से अपने निकटतम उम्मीदवार भाजपा के खुश्ीराम को 14 हजार 137 वोटों से हरा दिया।

हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए मतगणना शुक्रवार सुबह से शुरू हुई। मतगणना के लिये 41 केन्द्र बनाये गए । लगभग पांच हजार अधिकारियों को मतगणना के लिए तैनात किया गया है। मतगणना के लिए 68 पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए है।

राज्य के 65 विधानसभा चुनाव क्षेत्रों में 19 दिसम्बर को तथा किन्नौन ,लाहुल स्पीती और भरमौर जनजातीय क्षेत्रों में 14 नवंबर को दो चरणों में मतदान हुआ था।

धूमल रविवार को लेंगे शपथ :
भाजपा नेता और मुख्यमंत्री पद के दावेदार प्रेम कुमार धूमल ने बामसान विधानसभा सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार कर्नल (रि.) बीसी लगवाल को करीब 26,000 वोटों से हराया। शनिवार को धूमल को भाजपा विधायक दल का नेता चुने जाने की संभावना है। धूमल रविवार को राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। लोकसभा में विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने शुक्रवार को नई दिल्ली में यह जानकारी दी।

छठवीं बार सीएम बनने से रह गए :
कांग्रेस ने यह चुनाव बुजुर्ग नेता वीरभद्र सिंह (73) के नेतृत्व में लड़ा था। भाजपा की जीत से उनका छठवीं बार मुख्यमंत्री बनने का सपना कम से कम इस बार अधूरा रह गया। मार्क्‍सवादी नेता ज्योति बसु के बाद मुख्यमंत्री के पद पर देश में सबसे लंबा कार्यकाल वीरभद्र सिंह का ही रहा है। सिंह 1983, 1985, 1993, 1998 और 2003 में प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। 1998 में वे मात्र नौ दिनों तक इस पद पर रहे। हालांकि सिंह रोहरु सीट 14,000 से अधिक वोटों से जीत गए हैं।

वीरभद्र की सरकार में मंत्री राजकिशन गौर (कृषि), रामलाल ठाकुर (वन) और कुलदीप कुमार (उद्योग) को पराजय का मुंह देखना पड़ा है।

‘यह जीत केवल हिमाचल व गुजरात तक ही सीमित नहीं है, बल्कि लोकसभा चुनाव का ट्रेलर है। संदेश साफ है कि केंद्र में यूपीए सरकार, खासकर कांग्रेस का काउंटडाउन शुरू हो गया है’।- सुषमा स्वराज, भाजपा नेता

‘हिमाचल व गुजरात में जीत के बाद मुझे मतदाताओं के इस फैसले पर विश्वास हो गया है कि केवल भाजपा ही एक अच्छी सरकार दे सकती है’। -राजनाथ सिंह, अध्यक्ष, भाजपा

‘कांग्रेस से जनता का भरोसा उठ चुका है’।-प्रकाश जावड़ेकर, प्रवक्ता, भाजपा

‘हिमाचल प्रदेश सेमीफायनल की तरह था, जिसे जीतकर हम फायनल में पहुंच चुके हैं। हमें विश्वास है कि (लोकसभा चुनाव में) कांग्रेस की हार होगी’।- एम वेंकैया नायडू, उपाध्यक्ष, भाजपा

‘हिमाचल व गुजरात के नतीजे बदलाव की प्रक्रिया की शुरुआत के परिचायक हैं। इस प्रक्रिया का असर राष्ट्रीय स्तर तक होगा’।- लालकृष्ण आडवाणी, भाजपा नेता

‘ये चुनाव नतीजे एनडीए की नीतियों के हक में जनता का फैसला है। जनता ने हिप्र में कांग्रेस का कुप्रशासन नकार दिया है’।- प्रकाश सिंह बादल, मुख्यमंत्री, पंजाब

‘गुजरात के नतीजों और हिप्र की हार को आपस में जोड़कर देखना गलत होगा। लोकतंत्र में परिवर्तन होते रहते हैं और हमें जनता के फैसले को स्वीकार करना होगा। हिप्र में हार का मुख्य कारण सत्ता विरोधी लहर है’।- आनंद शर्मा, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता व विदेश राज्य मंत्री

‘हम हिप्र में हार से निराश हैं, लेकिन ये नतीजे सत्ता विरोधी लहर के विशेष हिमाचली ब्रांड के अनुरूप हैं। राज्य में कांग्रेस और भाजपा की एक के बाद एक सरकारें बनने की परंपरा रही है’।- अभिषेक मनु ¨सघवी, प्रवक्ता, कांग्रेस



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