भारत वि पाकिस्तान
1952-53 (भारत)
भारत और पाकिस्तान के बीच पहली टेस्ट सिरीज 52-53 में खेली गई थी। पाकिस्तान ने अब्दुल कारदार के नेतृत्व में एक ताकतवर टीम यहां भेजी थी। उसे दौरे की शुरुआत में ही तेज गेंदबाज खान मोहम्मद के घायल होने से एक झटका लगा। मेहमान टीम भारतीय स्पिनरों का ठीक से सामना नहीं कर सकी। वीनु मांकड़ और गुलाम अहमद ने चार टेस्ट मैचों की सिरीज में 37 विकेट लिए, वहीं विजय हजारे और पॉली उमरीगर ने ढेरों रन बनाए। मांकड़ ने नई दिल् ली में खेले गए पहले टेस्ट मैच में 131 रन देकर 13 विकेट लिए। पाक ने लखनऊ में खेले गए दूसरे मैच में शानदार जीत दर्ज कर वापसी की। उनकी ओर से तेज गेंदबाज फजल महमूद ने 94 रन देकर 12 विकेट लिए। बंबई में खेले गए तीसरे टेस्ट मैच में लाला अमरनाथ ने अपनी गेंदबाजी के दम पर टीम को जीत की राह दिखाई। बारिश के कारण 4 था टेस्ट मैच नहीं खेला गया। इस तरह यह सिरीज भारत ने 2-1 से जीत ली।
1954-55 (पाकिस्तान)
प्रथम टेस्ट सिरीज में हार का बदला लेने का मौका पाक को जल्द मिला। 54-55 में भारतीय टीम पाक के पहले दौरे में पहुंची। लेकिन दोनों टीमों ने पूरी सिरीज में एक दूसरे पर हावी होने का प्रयास नहीं किया। इस पूरी सिरीज में पाक कुछ ज्यादा ही नकारात्मक रहा। ढाका में खेले गए पहले टेस्ट में उसने 1.8 के औसत से रन बनाए तो पेशावर में खेले गए चौंथे टेस्ट मैच में पाक ने 100 ओवर बल्लेबाजी कर सिर्फ 129 रन बनाए। इस तरह यह पांच टेस्ट मैचों की सिरीज 0-0 से बराबर रही।
1960-61 (भारत)
इसके छह साल बाद पाक टीम भारत आई तो नतीजा वही रहा। इस सिरीज पर राजनीतिक और प्रतिष्ठा का दबाव था। नतीजतन दोनों में से किसी टीम ने जीत का प्रयास नहीं किया। इस पूरी सिरीज के पांचों टेस्ट मैच ड्रॉ रहे। बंबई में खेले गए पहले टेस्ट मैच में पाक ने हनीफ मोहम्मद और सईद अहमद के शतकों की मदद से अच्छी शुरुआत की। जवाब में भारत ने 2 दिन से अधिक बल्लेबाजी करने के बाद भी 449 रन ही बनाए। दोनों टीमों का खेल बेहद उबाऊ था। पूरी सिरीज में पाक ने प्रत्येक 100 गेंदों में 35 रन बनाए तो भारत ने 39। इन 25 दिनों के खेल में सिर्फ 11 दिन ही स्कोर 200 से अधिक गया।
1978-79 (पाकिस्तान)
भारत-पाक के बीच चौंथी टेस्ट सिरीज 18 साल के बाद खेली गई। पाकिस्तान पहुंची भारतीय टीम को जोरदार स्वागत हुआ। पूरी सिरीज में तनाव का क्षण तब आया जब बिशनसिंह बेदी ने अंतिम एक दिवसीय मैच का बहिष्कार कर दिया। वे सरफराज नवाज द्वारा लगातार फेंकी जा रही शार्ट पिच गेंदों को वाइड न करार दिए जाने से खफा थे। हालांकि उस समय भारत जीत के काफी करीब था। पाकिस्तान टेस्ट सिरीज सिर्फ इसलिए जीतने में कामयाब रहा क्योंकि निर्णायक अवसरों पर भारतीय बल्लेबाजी बेहद कमजोर साबित हुई। पाकिस्तान की ओर से जहीर अब्बास ने पांच पारियों में 583 रन बनाए। उनके साथ जावेद मियांदाद, मुश्ताक मोहम्मद और आसिफ इकबाल ने भी अच्छा योगदान दिया। सरफराज नवाज और इमरान खान ने सिरीज में 31 विकेट लिए। भारत तीन में से किसी भी मैच में पाक को आल आउट नहीं कर सका। सुनील गावस्कर एकमात्र सफल भारतीय बल्लेबाज रहे। उन्होंने 89,8,5,97,111,137 की शानदार पारियां खेलीं। पाक ने तीन टेस्ट मैचों की यह सिरीज 2-0 और तीन वन डे मैचों की सिरीज 2-1 से जीत ली।
1979-80 (भारत)
भारत को अपनी हार बदला लेने के लिए अधिक इंतजार नहीं करना पड़ा। उसने साल भर बाद भारत खेलने आई पाक टीम को 6 टेस्ट मैचों की सिरीज में 2-0 से हराया। कपिल देव इस पूरी सिरीज में 32 विकेट लेकर सबसे सफल गेंदबाज बनकर उभरे। पाक को तेज गेंदबाज सरफराज नवाज की सेवाएं नहीं मिल सकीं तो पाक टीम में गहरे मतभेद थे। उन्होंने अंपायरिंग को लेकर सार्वजनिक तौर पर सवाल उठाए। पिछले दौरे में भारत पाक को एक बार भी आउट नहीं कर पाया था। इस बार उन्होंने 11 पारियोंे में 7 बार यह कर दिखाया। एशिया का ब्रेडमेन कहे जाने वाले जहीर अब्बास पूरी सिरीज में असफल रहे। भारत ने बंबई और मद्रास में खेले गए टेस्ट मैच जीतकर सिरीज आराम से 2-0 से अपने पक्ष में कर ली।
1982-83 (पाकिस्तान)
यह एकतरफा सिरीज थी। इसे पाकिस्तान ने 3-0 से अपने कब्जे में कर लिया। उन्होंने भारत ने कराची, हैदराबाद और फैसलाबाद में टेस्ट मैच जीते। इसके साथ ही मेजाबान ने वन डे सिरीज भी अपने नाम की। इमरान खान की टीम ने खेल के हर विभाग में जोरदार खेल दिखाया। जहीर अब्बास, मुदस्सर नजर और जावेद मियांदाद ने रनों का अंबार लगाया। मुदस्सर ने पूरी सिरीज में 761, अब्बास ने 659 और मियांदाद ने 594 बनाए। यह शीर्ष तीन बल्लेबाजों का किसी भी देश के खिलाफ रिकार्ड प्रदर्शन था। इमरान इस सिरीज में 200 विकेट लेने वाले पहले तेज गेंदबाज बने। 6 टेस्ट मैचों की यह सिरीज पाक ने 3-0 से जीत ली। वन डे सिरीज भी 3-1 से मेजबान के नाम रही।
1983-84 (भारत)
इस सिरीज के प्रारंभ होने के पहले तक भारत विश्व चैंपियन बन चुका था। हालांकि खराब मौसम के कारण तीन टेस्ट मैचों की सिरीज ड्रॉ रही। मेजबान ने दो वन ड मैचों की सिरीज 2-0 से जीती। इस सिरीज में एक वन डे नई दिल्ली के एथेलिट स्टेडियम में प्रधानमंत्री राहत कोष के लिए खेला गया। इसे एक लाख से अधिक दर्शकों ने देखा।
1984-85 (पाकिस्तान)
प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या होने के कारण भारत यह सिरीज बीच में ही छोड़कर आ गया। इस सिरीज में तीसरा टेस्ट और कराची में खेला जा रहा अंतिम वन डे बीच में ही स्थगित कर देना पड़ा। यह सिरीज खराब अंपायरिंग के कारण विवादों में रही। लाहौर टेस्ट के डॉ खत्म होने के बाद भारतीय टीम के कप्तान सुनील गावस्कर ने कहा था कि अंपायरों के पूरे प्रयास के बाद भी हम मैच ड्रॉ कराने में सफल रहे। यह किसी चमत्कार से कम नहीं। पाकिस्तान आने से पहले भारत को कुछ नजदीकी परिणाम की उम्मीद थी, लेकिन उसे यहां पता चला कि यहां पहले ही मैच का परिणाम तय कर लिया गया था। उनके इस बयान से खासा बवाल मचा। फैसलाबाद में खेले गए दूसरे टेस्ट मैच की गेंदपट्टी की भी जमकर आलोचना हुई। खुद शहर के मेयर ने ग्राउंड स्टॉफ को कोसा।
1986-87 (भारत)
एक बार फिर 11 लगातार ड्रॉ के बाद पाकिस्तान ने बेंगलूरू में खेले गए अंतिम टेस्ट मैच में नाटकीय जीत दर्ज की। मनिन्दर शानदार गेंदबाजी(7-27) के कारण पाक टीम सिर्फ 116 पर ढेर हो गई। जवाब में भारत 145 और 221 रन ही बनाकर मैच 16 रन से हार गया। सुनील गावस्कर ने 96 रन की पारी खेलकर भारत को लगभग जीत के करीब ही पहुंचा दिया था। हालांकि भारत दूसरे और चौंथे टेस्ट मैच में जीत की स्थिति में था लेकिन मेहमान टीम के नकारात्मक खेल और धीमी गेंदबाजी के कारण यह संभव नहीं हो पाया। हालांकि वन डे में पाकिस्तान ने शानदार 5-1 से जीत दर्ज की।
1989-90 (पाकिस्तान)
इस सिरीज में पहली बार तटस्थ अंपायर रखे गए। जॉन हैंपशायर और जॉन होल्डर ने चारों टेस्ट मैचों में अंपायरिंग की। चार टेस्ट मैचों की यह सिरीज ड्रॉ रही। पाकिस्तान दो टेस्ट मैचों में जीत की स्थिति में था, लेकिन वह अवसरों को भुना नहीं पाया। भारत के लिए सिरीज का ड्रॉ रहना किसी जीत से कम नहीं था। संजय मांजरेकर ने 94.83 के औसत से 569 रन बनाकर सबका ध्यान खींचा। उनके साथ सिद्धू और अजहर ने भी जोरदार बल्लेबाजी की। इसी सिरीज से 16 साल के किशोर खिलाड़ी सचिन तेंडुलकर ने क्रिकेट की दुनिया में कदम रखा। वन डे सिरीज का रोमांच दर्शकों और खराब मौसम ने छीन लिया। कराची में भारतीय खिलाड़ियों पर हुए दर्शकों के हमले की घटना ने भारत और पाक के बीच संबंध खराब कर दिए।
1997-98 (पाकिस्तान)
राजनीतिक कारणों से भारत ने बाद के 8 सालों में पाक का दौरा नहीं किया। हालांकि तटस्थ स्थलों में दोनों टीमें वन डे में आमने सामने होती रहीं। इन स्थलों में शारजाह प्रमुख था। भारत ने तीन वन डे मैचों की सिरीज खेलने के लिए पाक पहुंचने से एक सप्ताह पहले ही टोरंटों में 4-1 से शानदार जीत दर्ज कर पाक पहुंचा था। सईद अनवर के नेतृत्व में पाक ने उस हार बदला लेते हुए भारत को 2-1 से मात दी। हालांकि यह सिरीज भी विवादों से अछूती नहीं रही। कराची में दर्शकांे ने भारतीय खिलाड़ियाों पर पत्थर फेंके। यहां पाक को हार का मुह देखना पड़ा। हालांकि लाहौर में एजाज अहमद के शानदार शतक की मदद से पाक ने सिरीज पर कब्जा जमाया। पाक ने 3 वन डे की यह सिरीज 2-1 से जीती।
1998-99 (भारत)
यह सिरीज 9 साल बाद भारत-पाक के बीच खेली जा रही प्रथम टेस्ट सिरीज थी। पाक 12 साल बाद भारत के दौरे पर आया था। इससे पहले पाक का भारत दौरा कट्टरपंथियों के उत्पात के कारण टल गया था। 1998 में दोनों देशों ने परमाणु परिक्षण कर लिए थे। इससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया था। इस टेस्ट सिरीज में सिर्फ 2 टेस्ट मैच ही खेले गए। चेन्नई में खेले गए पहले टेस्ट में पाक ने 12 रनों से रोचक जीत दर्ज की। दिल्ली में हुए दूसरे टेस्ट मैच में भारत ने कुंबले के एक पारी में 10 विकेटों के करिश्में के कारण 212 रनों से विशाल जीत दर्ज की।
1998-99 (भारत)
पाकिस्तान और भारत के बीच इस सिरीज का तीसरा टेस्ट मैच एशियन चैंपियनशिप के लिए खेला गया। इसमें पाक पहले दिन 26 रन पर 6 विकेट गंवार चुका था। यहां से वापसी करते हुए उसने यह मैच 46 रन से जीता। जवागल श्रीनाथ ने इस मैच में अपने कैरियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 142 रन देकर 13 विकेट हासिल किए। इसके बाद पाकिस्तान ने शरारतपूर्ण ढंग से भारत को चैंपियनशिप से बाहर कर दिया और बाद में लंका को हराकर चैंपियनशिप जीत ली।
2003-04 (पाकिस्तान)
ऑस्ट्रेलिया में जोरदार प्रदर्शन करके पाक भारतीय टीम फील गुड फैक्टर के साथ पाकिस्तान पहुंची। 15 साल बाद पाक पहुंची सौरव सेना का वहां जोरदार स्वागत किया गया। किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए भारतीय टीम की सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। सुरक्षा कारणों से बार-बार कई टीमों के पाक आने से इंकार के बाद पीसीबी दिवालिया स्थिति में पहुंच गया था। पांच वन डे मैचांे की बेहद रोचक सिरीज भारत ने 3-2 से अपने नाम कर ली। इसके बाद टेस्ट सिरीज में भी उसने यादगार जीत दर्ज की। मुल्तान में खेले गए पहले टेस्ट मैच में वीरेंद्र सहवाग तिहरा शतक बनाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज बने। इसके बाद भारत ने एक दिन रहते मैच विशाल अंतर से जीत लिया। मेजबान ने उमर गुल के शानदार प्रदर्शन के चलते लाहौर टेस्ट जीतकर सिरीज मंे वापसी की। रावलपिंडी में भारत ने राहुल द्रविड़ की 270 रनों की यादगार पारी खेलकर मैच एक पारी और 131 रनों से जीतकर सिरीज पर 2-1 से कब्जा जमाया। यह कितनी ऐतिहासिक थी। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इससे पहले भारत ने कभी पाक में टेस्ट मैच तक नहीं जीता था।
2004-05 (भारत)
पाकिस्तान को अपने ही मैदानों में मिली शर्मनाक हार का बदला चुकाने का मौका जल्दी ही मिला। इस साल के अंत तक पाक टीम भारत के दौरे पर आई। तीन टेस्ट मैचों की सिरीज का मोहाली में खेला गया पहला मैच पाकिस्तान ने कमरान अकमल की शानदार बल्लेबाजी के कारण बचाया, जिसे वह बिलकुल हारने की स्थिति में थे। कोलकाता में खेला गया दूसरा मैच राहुल द्रविड़ की दोनों पारियों में खेली गई शतकीय पारियों और कुंबले के 7 विकेट के कारण भारत ने आसानी से जीता। बंेगलूरु में खेला गया तीसरा टेस्ट मैच भारतीय बल्लेबाजों ने अति सुरक्षात्मक रवैये के कारण गंवाया। इस तरह यह सिरीज 1-1 से बराकर कर ली। वन डे सिरीज में भी भारत 2-0 से बढ़त बनाने के बाद 4-2 से हार गया। पाक के लिए शाहिद आफरीदी और नावेद उल हसन ने निर्णायक भूमिका निभाई।