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‘शेम बेंसन, शेम बकनर!’

सिडनी.ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध सिडनी क्रिकेट ग्राउंड में भारत के खिलाफ दूसरे टेस्ट मैच में एक बार फिर अंपायरों ने अपने ‘खेल’ से भद्रजनों के खेल क्रिकेट को शर्मसार कर दिया। मैच के पांचवें दिन रविवार को अंपायर मार्क बेंसन और स्टीव बकनर पहले दिन की ‘गलतियों’ को ‘जानबूझकर’ दोहराते नजर आए। भारत यह मैच ड्रॉ कराने की स्थिति में था, तब उसके विरुद्ध एक नहीं तीन ‘संदेहास्पद’ फैसले करके अंपायरों ने ऑस्ट्रेलिया के पक्ष में ‘कलंकित’ जीत दर्ज करा

इस हार से टीम इंडिया 4 टेस्ट मैचों की सीरीज में न सिर्फ 2-0 से पिछड़ गई, बल्कि सीरीज जीतने के सभी अवसर गंवा चुकी है। मेजबान टीम अपने खेल कौशल के बजाए अंपायरों के ‘दोस्ताना व्यवहार’ के दम पर लगातार 16 टेस्ट जीतने के अपने ही रिकार्ड की बराबरी करने में सफल रही। गावसकर ने की कड़ी निंदा :

अंपायरों के ‘धृतराष्ट्र’ की तरह पक्षपातपूर्ण निर्णयों से इंटरनेशनल क्रिकेट कौंसिल (आईसीसी) की क्रिकेट कमेटी के चेयरमैन सुनील गावसकर भी चुप नहीं रह सके। मैच की कामेंट्री कर रहे गावसकर ने खेद प्रकट करते हुए दोनों ही अंपायरों के गलत निर्णय को क्रिकेट के लिए बेहद ही शर्मनाक करार दिया। पोंटिंग से पूछकर गलत निर्णय देने पर उन्होंने अंपायर बेंसन की कड़ी निंदा की। गावसकर ने कहा, ‘सॉरी बेंसन! आपने सरासर गलती की है।’ गावसकर काफी अपसेट थे। उन्होंने कहा, ‘अंपायर किसी खिलाड़ी से पूछकर कैसे निर्णय दे सकता है। उन्होंने तीसरे अंपायर से मदद क्यों नहीं ली।’

सब जानते हैं कैसे हारा भारत:

सिडनी ग्राउंड में मेजबान के खिलाफ भारत 122 रनों से हारा, लेकिन इस हार की वजह को कप्तान अनिल कुंबले की प्रतिक्रिया से समझा जा सकता है। कुंबले ने कहा, ‘हर कोई यह जानता है कि हम क्यों हारे।’ पोंटिंग ने भी खेल भावना का परिचय नहीं दिया। इस पर कुंबले ने कहा, ‘खिलाड़ियों को ईमानदार होना चाहिए, लेकिन यहां मैदान में ऐसा नहीं हुआ।’

अंपायरों के शर्मनाक निर्णय :

सौरव गांगुली (51) और राहुल द्रविड़ (38) संभलकर खेल रहे थे। अंपायर बकनर ने एंड्रयू सायमंड्स की गेंद पर द्रविड़ को कैच आउट करार दिया, जबकि गेंद उनके पैड से लगकर विकेटकीपर एडम गिलक्रिस्ट के ग्लव्ज में समाई थी।

इसी तरह गांगुली को गलत निर्णय का शिकार होना पड़ा। ब्रेट ली की गेंद पर गांगुली को कैच आउट करार दिया गया, जबकि माइकल क्लार्क ने कैच लपकने की कोशिश की थी और उनके हाथ से गेंद जमीन पर टकरा गई थी। अंपायर मार्क बेंसन ने साथी अंपायर स्टीव बकनर या तीसरे अंपायर की मदद लेने की बजाय ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पोंटिंग से पूछकर उंगुली उठा दी। पोंटिंग ने खेल भावना का ख्याल नहीं रखा और जानबूझकर आउट का इशारा कर अंपायर को गुमराह किया। आरपी सिंह को भी अंपायरों ने संदिग्ध निर्णय से आउट किया।

खेल भावना को नुकसान:कंगारू खिलाड़ियों ने न केवल कई मौकों पर खेल भावना को नुकसान पहुंचाया बल्कि भारतीय खिलाड़ियों पर नस्लीय टिप्पणी करने के आरोप लगाकर उनकी एकाग्रता भंग करने का प्रयास भी किया।

ढीला है आईसीसी :

अंपायरों के गलत निर्णय को लेकर अक्सर विवादों में उलझती रही आईसीसी ऐसे मामले में ढीला रुख अपनाती है। यही नहीं, आईसीसी के मुख्य कार्यकारी मैलकम स्पीड ने रविवार को भी अंपायरों का पक्ष लिया है। इससे अंपायर ‘निरंकुश’ होने लगते हैं।

अंपायरों ने क्रिकेट को नीचा दिखाया है। इस टेस्ट मैच को अंपायरों के गलत निर्णय के लिए याद किया जाएगा। पोंटिंग ने खेल भावना का भी परिचय नहीं दिया।

- सैयद किरमानी, पूर्व विकेटकीपर, भारत

बीसीसीआई को अंपायरों के खिलाफ शिकायत दर्ज करानी चाहिए। आईसीसी को यह मामला हल्के में नहीं लेना चाहिए। -यशपाल शर्मा, पूर्व क्रिकेटर, भारत

यह सरासर बेईमानी नजर आती है। अंपायरों से इस तरह की भूल की उम्मीद नहीं की जा सकती।- राजीव शुक्ल, उपाध्यक्ष, बीसीसीआई

बेंसन ने साथी अंपायर या तीसरे अंपायर से मदद न लेकर भारी गलती की है। उन्हें माफ कैसे किया जा सकता है।

-मंसूर अली खान पटौदी, पूर्व कप्तान, भारत

अंपायरों को अपनी और क्रिकेट की गरिमा को इस तरह ठेस नहीं पहुंचानी चाहिए। संदेह की स्थिति में थर्ड अंपायर का उपयोग न करके भी अंपायरों ने गलत किया है।

-कपिल , देवपूर्व कप्तान, भारत





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