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द्रविड़ भी शतक पूरा करने में नाकाम

पर्थ. सचिन तेंडुलकर(71) के बाद पर्थ टेस्ट के लक् की मैन राहुल द्रविड़ (93)भी शतक पूरा नहीं कर सके, जहां सचिन अंपायर के गलत निर्णय का शिकार बने। वहीं ऑस्ट्रेलिया टीम के साथ अंपायर द्वारा भी एक-एक बार बख्शे जाने के बाद द्रविड़ पार्ट टाइम बॉलर एंड्रयु साइमंड्स की गंेद पर गलत शाट खेल खुद नर्वस नाइंटी का शिकार बन गए। भारत के खेल के अंतिम सत्र में 5 विकेट पर 280 रन बना लिए हैं। अंतिम उम्मीद लक्ष्मण 26 और धोनी 2 पर अविजित।

ऑस्ट्रेलिया ने तीसरे सत्र में सचिन और गांगुली के विकेट लेकर जोरदार वापसी की। सचिन को 71 के निजी स्कोर पर ब्रेट ली ने एलबीडब्ल्यू करार दिया। वहीं गांगुली एक गलत शॉट ख्ेालकर जानसन का शिकार बने। अब सारा दारोमदार लक्ष्मण पर है। कुल मिलाकर विशाल स्कोर की भारतीय संभावनाओं को करारा आघात लगा।

भारत की शानदार बल्लेबाजी से उन सभी लोगों के मुह पर ताला लग गया होगा जो इसे दुनिया की सबसे तेज गेंदपट्टी बताकर उसे भयभीत करने में लगे थे। अच्छी शुरुआत के बाद दो विकेट गिरने के बाद क्रिज पर आए सचिन-द्रविड़ ने ऑस्ट्रेलिया की धुरंधर चौकड़ी को लंच और टी के बीच विकेटों के लिए तरसा दिया। सचिन ने जहां शुरुआत से ही जोरदार हाथ दिखाए, वहीं जमने के बाद द्रविड़ भी अपने लिटिल चैंपियन से पीछे नहीं रहे।

सचिन अपना 51 वां अर्धशतक 87 गेंदो में पुरा किया, वहीं द्रविड़ ने अपना 49 वां अर्धशतक 95 वें गेंदों में पुरा किया। यह इस मैदान में भारत की ओर से तीसरी और तीसरे विकेट के लिए पहली साझेदारी है।

भारतीय क्रिकेट के इन दो महान बल्लेबाजों के बीच यह 16 वीं शतकीय साझेदारी है। उन्होंने ग्रिनीज-हेंस और हैडन-लैंगर के विश्व रिकार्ड की बराबरी कर ली है। यहां जिक्र अनिवार्य है कि सचिन-द्रविड़ के अतिरिक्त दोनों जोड़ियां सलामी बल्लेबाजों की थी।

विवादास्पद सिडनी टेस्ट के दस दिन बाद भारत और ऑस्ट्रेलिया की टीमें बुधवार से पर्थ में एक बार फिर मैदान पर एक-दूसरे का सामना कर रहीं है । आज भारतीय कप्तान अनिल कुंबले ने टॉस जीता और दुनिया की सबसे तेज व उछाल वाली पर्थ के वाका मैदान की पिच पर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया ।

भारत की तरफ से वीरेंद्र सहवाग व वसीम जाफर की जोड़ी ने भारत की तरफ से ओपनिंग की । गौरतलब है कि भारतीय टीम मेजबानों को लगातार 17वें टेस्ट में जीत दर्ज करने से रोकने का प्रयास करेगी, लेकिन इसके लिए भारतीय बल्लेबाजों को दुनिया की सबसे तेज व उछाल वाली पर्थ के वाका मैदान की पिच पर अग्निपरीक्षा से गुजरना होगा।



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