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अगुवानी पुल के पहुंच पथ को 4 किमी जमीन चिह्नित, दर तय होने पर किसानों से ली जाएगी

4 वर्ष पहले
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भास्कर टीम| भागलपुर/सुल्तानगंज

गंगा पर बन रहे अगुवानी पुल के पहुंच पथ के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में तेजी अा गई है। इसके लिए सुल्तानगंज प्रखंड के सात मौजा की जमीन का अधिग्रहण करना है। इनमें एक सरकारी और बाकी निजी है। जमीन चिह्नित कर ली गई है। इन मौजा में चार किलोमीटर लंबा पहुंच पथ बनना है। अभी देखा जा रहा है कि जमीन किस प्रकृति की है। यानी कृषि योग्य, व्यावसायिक या आवासीय जमीन है। इसकी रिपोर्ट जिला को बुधवार को देने के लिए कहा गया है। आवासीय जमीन की फोटोग्राफी भी की जाएगी। इसके बाद उसका मूल्यांकन होगा। दर तय होने के बाद अधिग्रहण कर मुआवजा दिया जाएगा। संभावना है कि माहभर के अंदर मूल्यांकन हो जाएगा। खगड़िया के अगुवानी घाट से भागलपुर के सुल्तानगंज के बीच गंगा पर करीब 3.25 किलोमीटर लंबा पुल और 21 किलोमीटर लंबा पहुंच पथ का निर्माण होना है। करीब 1700 करोड़ की लागत से पुल बन रहा है। खगड़िया की ओर जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने को है। जिला भू-अर्जन पदाधिकारी सुरेंद्र प्रसाद ने बताया कि जमीन की जांच की गई है। अब जल्द ही मूल्यांकन कर दर तय होगा। इसके बाद रैयतों को मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

3.25 किलोमीटर लंबा पुल खगड़िया के अगुवानी घाट से भागलपुर के सुल्तानगंज के बीच गंगा पर बनेगा

अगुवानी की ओर से निर्माणाधीन गंगा पुल।

जिले की टीम ने पहुंच पथ की जमीन का लिया जायजा
गुरुवार को जिलास्तरीय टीम सुल्तानगंज गई। अपर समाहर्ता राजेश कुमार झा राजा, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी सुरेंद्र प्रसाद, पुल निर्माण निगम के एसडीओ पमित शाही एवं एसपी सिंगला कंस्ट्रक्शन कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर संजय कुमार ने एप्रोच पथ के निर्माण स्थल का जायजा लिया। भू-अर्जन विभाग के अमीन चंद्रदेव सिंह से अधिग्रहण की जाने वाली जमीन के मैप की जानकारी ली। पुल निर्माण निगम के एसडीओ ने बताया कि सुल्तानगंज की ओर से गंगा किनारे से होकर तिलकपुर के रसीदपुर मौजा की जमीन तक पहुंच पथ बनेगा।

21 किलोमीटर लंबा पहुंच पथ का होना है निर्माण, 1700 करोड़ रुपए की लागत से बन रहा है पुल

भू-अर्जन के लिए नक्शे को समझते अपर समाहर्ता।

किस्म के निर्धारण के लिए बनी कमेटी
एप्रोच रोड के मिलान बिंदु पर एनएच के पूर्वी भाग में 600 फीट एवं पश्चिमी भाग में 400 फीट फीट जमीन चाहिए। सीओ शशिकांत कुमार ने बताया कि जमीन के किस्म निर्धारण के लिए कमेटी बनाई गई है। गंगा नदी के अंतिम छोर, जहां से एप्रोच पथ का निर्माण किया जाना है, वहां से लेकर जीरोमाइल तक की जमीन से संबंधित जानकारी अफसरों ने ली है।

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