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ग्रंथ साहिब की वाणी का एक-एक शब्द महत्वपूर्ण : स्वामी कृष्णानंद

6 वर्ष पहले
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श्रीश्री1008 सतगुरु बंदी छोड़ घीसा संत महाराज की वाणी के अखंड पाठ का संपूर्ण भोग मंगलवार को लगाया गया। इस अवसर पर स्वामी कृष्णानंद महाराज ने प्रवचन करते हुए कहा कि ग्रंथ साहिब की वाणी का एक एक शब्द इतना महत्वपूर्ण है। अगर उसे हृदय में धारण किया जाए तो संसार के मोह बंधन से बाहर होकर परमपिता परमात्मा के दर्शन हो जाएंगे। वाणी को सुनने का लाभ तभी मिलता है, जब उसका मनन करके धारण किया जाए। महाराज ने भी इस वाणी को अपने हृदय में धारण किया हुआ है। यदि आपको किसी भी प्रकार का ज्ञान है तो उसका लाभ आपको तभी मिलेगा, जब आप उसका उपयोग करेंगे, अन्यथा उस ज्ञान का कोई महत्व नहीं रह जाता। स्वामी कृष्णानंद महाराज ने उदाहरण के साथ समझाया, ‘ज्ञान कथै, करनी कै फीके, गुड़ बिना पुड़ै हुए नहीं मीठे। खाली बात कथो मत कोई, दूध बिना घृत नहीं होई।

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार दूध से घी निकलता है और दूध को बिना मथे छोड़ दिया जाए तो वह फट जाता है, खट्टा हो जाता है और उसमें बदबू आने लगती है, उसी प्रकार इस जीव को सतगुरु रूपी वाणी मिलती है और सतगुरु की बताई विधि द्वारा मंथन करके साहेब को जान सकते हैं। शब्द दूध, घृत राम रस, कोई साध बिलोवन हार, दादु अमृत काढले, गुरु मुख गहै विचार। यह वाणी अति गहरी है, इसे कोई हंस ही समझ सकता है। सभी महान संतों ने शब्द की ही महिमा बताई है, जैसे कि गुरु नानकदेव जी ने अपनी वाणी में बताया है कि ‘शब्द धरती, शब्द आकाश, शब्द शब्द भया प्रकाश। सारी सृष्टि शब्द पाछै, कह नानक घट घट आछै।’ नानक जी सारांश में बना दिया कि धरती, आकाश, प्रकाश, सृष्टि सब कुछ शब्द से ही बना है। ये शब्द क्या है, इसको कोई बिरला ही संत जानता है। महाराज श्री हरिहरानंद जी शब्द स्वरूपा संत थे। उन्होंने अपने कुछ शिष्यों को इसका अभ्यास कराया था।

स्वामी कृष्णानंद महाराज।

घीसा संत महाराज की वाणी के अखंड पाठ के दौरान प्रवचन सुनते श्रद्धालु।

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