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एक नजर में हरियाणा का जाट आरक्षण, जाने पूरा मामला

7 वर्ष पहले
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हरियाणा में शनिवार को जाट आरक्षण आंदोलन के सातवें दिन भी जमकर हिंसा हुई। - Dainik Bhaskar
हरियाणा में शनिवार को जाट आरक्षण आंदोलन के सातवें दिन भी जमकर हिंसा हुई।
रोहतक/पानीपत. ओबीसी कोटा मांग रही जाट कम्युनिटी का आंदोलन इतना बड़ा और हिंसक हो जाएगा, इसका हरियाणा की बीजेपी सरकार को अंदाजा नहीं था। दरअसल, पिछली हुड्डा सरकार का रिजर्वेशन देने का फैसला कोर्ट के आदेश पर कैंसल हो गया। इसी के बाद से जाट कम्युनिटी, खट्टर सरकार पर नया रास्ता तलाशने का दबाव बढ़ा रही थी। लेकिन सरकार को यह समझ नहीं आया कि वह जाटों को कैसे मनाए। एक सांसद के बयान से भड़के जाट नेता... कन्फ्यूजन में ही रही बीजेपी...

1. अदालती फैसले के बाद जाटों ने बनाया सरकार पर दबाव
- हरियाणा में 30 पर्सेंट आबादी रखने वाली जाट कम्युनिटी अपने लिए ओबीसी कैटेगरी में रिजर्वेशन चाहती है।
- हरियाणा में कांग्रेस की पिछली भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा सरकार ने 2012 में स्पेशल बैकवर्ड क्लास के तहत जाट, जट सिख, रोड, बिश्नोई और त्यागी कम्युनिटी को रिजर्वेशन दिया।
- यूपीए सरकार ने भी 2014 में हरियाणा समेत 9 राज्यों में जाटाें को ओबीसी में लाने का एलान किया।
- लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने जाटों को पिछ़ड़ा मानने से इनकार कर यूपीए सरकार का ऑर्डर कैंसल कर दिया।
- पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के भी एक ऑर्डर के बाद 19 सितंबर 2015 को खट्टर सरकार को भी जाटों सहित पांच जातियों को आरक्षण देने के नोटिफिकेशन को वापस लेना पड़ा। यह नोटिफिकेशन हुड्डा सरकार के वक्त जारी हुआ था।
- इसी के बाद से जाट कम्युनिटी खट्टर सरकार पर नया रास्ता तलाशने का दबाव बना रही थी।
2. बीजेपी सांसद के एक बयान ने जाट नेताओं को भड़काया
- जाट कम्युनिटी की मांगों के बीच कैथल से बीजेपी सांसद राजकुमार सैनी ने बयान दिया, ‘यदि सरकार दबाव में आकर जाटों को रिजर्वेशन देती है तो बीजेपी का कांग्रेस से भी बुरा हाल होगा। रेलवे ट्रैक सड़क जाम करने वाले नेताओं को शर्म आनी चाहिए। प्रदेश सरकार ऐसे लोगों पर मुकदमे दर्ज करे। ताकि उन्हें सबक मिले। जोर दिखाकर सरकार को झुकाया नहीं जा सकता।’
- इस बयान से जाट नेता भड़क गए। शनिवार को प्रदर्शनकारियों ने सैनी के घर पर हमला कर दिया।
- बाद में पार्टी ने सैनी को उनके बयान के लिए कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया।
3. आरक्षण की मांग तेज हुई तो बीजेपी कन्फ्यूजन में ही रही
- बीजेपी ने पहले अपने नेताओं के भड़काऊ बयानों की अनदेखी की। उन्हें शह मिली और जाटों में गुस्सा बढ़ता चला गया।
- मैसेज ये गया कि बीजेपी गैर-जाट पॉलिटिक्स कर रही है।
- आंदोलनकारियों से बातचीत में सरकार ने ‘पिक एंड चूज’ पॉलिसी अपनाई।
- सरकार ने शुक्रवार-शनिवार को भी यह होमवर्क नहीं किया कि जाटों को कैसे मनाया जाए। बातचीत कन्फ्यूजन में ही चलती रही।
- सरकार यह नहीं समझ पाई कि इस बार जाट आंदोलन किसी एक नेता या संगठन के हाथ में नहीं है। सभी धरनों के अलग-अलग मुखिया हैं।
- सरकार ने एक गुट को मनाया तो दूसरा नाराज हो गया।
- आंदोलनकारियों की स्ट्रैटजी समझने में इंटेलिजेंस एजेंसियां फेल रही। सीएम खट्टर खुद भी कोई ठोस फैसला नहीं ले पाए।
4. और आखिर में रोहतक से भड़की हिंसा
- आरक्षण की मांग को लेकर पांच दिन से जाट समुदाय राज्य में शांतिपूर्ण तरीके से चक्काजाम कर रहा था।
- गुरुवार से ही आंदोलन हिंसक होने लगा था।
- रिजर्वेशन के सपोर्ट में धरने पर बैठे वकीलों की एक गैर-जाट शख्स के साथ कहासुनी हुई और फिर पुलिस की मौजूदगी में जमकर कुर्सियां चलीं।
- ऐसी अफवाह उड़ी कि वकील और जाट आमने-सामने हो गए हैं।
- यहीं से हिंसा शुरू हुई। कई जगह व्हीकल्स को आग लगा दी गई।
आगे की स्लाइड्स में पढ़ें : इस मूवमेंट की जड़ें कहां है? और अब तक इसमें क्या-क्या हुआ...
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