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खरबूजे के बीजों से कमा सकते हैं 77 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर, अनुदान भी मिलेगा

4 वर्ष पहले
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गर्मी के दिनों में किसान खरबूजे की खेती कर सफेद बीजों से चांदी काट सकते हैं। खरबूजों के बीजों से किसान प्रति हेक्टेयर 77 हजार रुपए तक कमा सकता है। मार्च से मई तक तीन महीने में फसल लेकर फिर अगली फसल (खरीफ) यानी सोयाबीन, कपास, धान सहित अन्य फसलों के लिए अपना खेत जून से जुलाई के बीच तैयार कर फसल बो सकता है।

किसानों ने रबी सीजन की फसलें खेतों से निकाल ली है। खेत खाली पड़े हैं और अब जून में बारिश होने के बाद बाेवनी होगी। चार महीने खेत खाली पड़े हैं और किसान खरबूज-तरबूज की खेती कर लाभ कमा सकता है। गर्मी के दिनों में खरबूज-तरबूज खूब बिकेंगे और खाली पड़ी जमीन का उपयोग भी हो जाएगा। मल्चिंग के साथ तरबूज खरबूज की खेती करें तो किसान अधिक मुनाफा कमा सकता है। मलचिंग विधि से खरबूजा बोने से खरपतवार पैदा नहीं होता, पैदावार अच्छी होती है व फसल टूटने के दस दिन तक खराब नहीं होती। इससे 140 से 160 क्विंटल खरबूजा-तरबूज प्रति एकड़ निकलता है।

सोयाबीन, कपास, धान सहित अन्य खरीफ फसलों की बुआई जून से जुलाई तक कर सकते हैं
खरबूजे की उन्नत किस्में
पूसा शरबती (एस-445)- फल गोल, मध्यम आकार व छिलका हल्के गुलाबी रंग लिए होता है। छिलका जालीदार, गूदा मोटा एवं नारंगी रंग का होता है। एक बेल पर 3-4 फल लगते हैं।

पूसा मधुरस- फल गोल, चपटे, गहरे हरे रंग के धारीयुक्त होते है। गूदा रस से भरा हुआ एवं नारंगी रंग का होता है। फल का औसत वजन 700 ग्राम होता है और एक बेल पर 5 फल तक लगते हैं।

हरा मधु: फल का औसत भार एक किलो और फलों पर हरे रंग की धारियां पाई जाती है । फल पकने पर हल्के पीले पड़ जाते है। गूदा हल्का हरा, 2-3 सेमी मोटा व रसीला होता है।

आई.वी.एम.एम.-3 : फल धारीदार एवं पकने पर हल्के पीले रंग के होते हैं। फल काफी मीठे एवं गूदा नारंगी रंग का होता है। फलका औसत वजन 500 से 600 ग्राम होता है।

पंजाब सुनहरी - इस किस्म की लता मध्यम लंबाई की, फल गोलाकार एवं पकने पर हल्का पीले रंग का,गूदा नारंगी रंग का तथा रसदार होता है।

वो सबकुछ जो आप जानना चाहते हैं
जलवायु और मिट्‌टी- खरबूजे की खेती के लिए गर्म एवं शुष्क जलवायु उत्तम होती है। उचित जल निकास और जीवांश युक्त बलुई मिट्टी या दोमट मिट्टी इसके लिए सर्वोत्तम पाई गई है।

खाद और उर्वरक - 8-10 टन प्रति एकड़ कम्पोस्ट खाद डालें। 55 किलो यूरिया, 58 किलोग्राम डीएपी और 40 किलो म्यूरेट आफ पोटाश डालें।

एक हेक्टेयर में खरबूज की खेती पर लगने वाला खर्च
1000 रु. पांच किलो बीज

3000 रु. खेत तैयारी, बोवनी और ,खाद

3000 रु. कीटनाशक का उपयोग

6000 रु. तुड़ाई पर 30 मजदूरों की जरूरत

बुआई - मार्च में बुआई शुरू हो जाती है। 1.5-2.0 मीटर की दूरी पर 30 से 40 सेमी चौड़ी नालियां बनाते हैं। बीज की बुआई नाली के किनारों (मेड़ों) पर 50-60 से.मी. की दूरी पर करते हैं।

तुड़ाई - बोवनी के सवा से ढाई महीने में खरबूजे की फसल तैयार हो जाती है। फल अंतिम छोर से पकना शुरू करता है जिससे फल का रंग बदल जाता है।

13000 रु. कुल खर्च

आय का गणित
6 क्विंटल बीज उत्पादन

15000 रु. क्विं. बिकता है

90000 रु. आय

शुद्ध मुनाफा : 77000 रु. प्रति हेक्टेयर

हाथरस यूपी जाता है बीज
नीमच के रामपुरा में खरबूजे के बीजों की खरीदी बड़े पैमाने पर होती व यहां से बीज यूपी के हाथरस भेजा जाता है। करीब डेढ़ हजार हेक्टेयर में किसान खरबूजे की खेती कर रहे हैं। किसान रामपुरा में बीज बेचते हैं और व्यापारी हाथरस पहुंचाते हैं। कई किसान तो सीधे हाथरस के व्यापारियों को भी अपनी उपज बेच रहे हैं। हाथरस में एक क्विंटल बीजों के 15 हजार किसानों को मिल जाते हैं।

35 फीसदी मिलेगा अनुदान
ग्रीष्मकालीन खरबूज की बुआई पर 0.200 हेक्टेयर में निर्धारित इकाई लागत 10 हजार रुपए 35 फीसदी अनुदान या 3500 रुपए अनुदान मिलता है। जबलपुर, नरसिंहपुर, बालाघाट, छिंदवाड़ा, मंडला, हिंडौरी, होशंगाबाद, हरदा, बैतूल, उज्जैन, खंडवा, खरगोन, ग्वालियर, भिंड, मुरैना, शिवपुरी, श्योपुर, पन्ना, सतना और शहडोल जिले शामिल है।

तापमान और सिंचाई - फसल में 5 दिन के अंतराल पर सिंचाई करते रहना चाहिए। बीज के जमाव और पौधों के बढ़ने के लिए 22-26 डिग्री सेल्सियस तापमान अच्छा होता है।

निंदाई-गुड़ाई : बेल लगने के बाद से लेकर पहले 25 दिनों तक खरपतवार फसल को ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं। पौधे की बढ़वार रूक जाती है।

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