राजदीप सरदेसाई का कॉलम: रफाल सौदा 2019 का बोफोर्स नहीं बन सकता

Bhaskar News | Sep 07,2018 00:48 AM IST

राहुल गांधी तब सिर्फ 17 साल के थे जब बोफोर्स घोटाले का पहली बार धमाका हुआ था। यह भ्रष्टाचार का ऐसा आरोप था, जो आगे जाकर उनके पिता राजीव गांधी की प्रतिष्ठा पर दाग लगाने के साथ अंतत: 1989 के चुनाव में कांग्रेस की हार का कारण बनने वाला था। अब तीन दशक के बाद लगता है कांग्रेस अध्यक्ष रफाल सौदे को 2019 के अपने चुनाव अभियान के केंद्र में रखकर अपने पिता के राजनीतिक पतन का बदला लेने पर तुले दिखाई देते हैं।

जीने की राह: सफल होने पर नाकामी का डर निकाल दें

Bhaskar News | Sep 07,2018 00:48 AM IST

हम सफलता को अपना और असफलता को दूसरे का घर मानकर चलते हैं। सफल हो जाते हैं तो लगता है अपने घर में रह रहे हैं, सबकुछ अपना है और जब सफलता से दूर रह जाते हैं तो वह असफलता ऐसी लगती है जैसे दूसरे का घर हो। न हम उसमें प्रवेश करें, न वह घर हम तक आए। असफलता या पराजय से हर आदमी बचना चाहता है। विचार करिएगा हार के पीछे तो हार होती ही है लेकिन, कभी-कभी जीत के पीछे भी हार होती है जिसे हम देख नहीं पाते। जिस सफल आदमी को आप देख रहे हैं या आपके जीवन में भी सफलता आई हो उसके पीछे कितनी कोशिशें रही होंगी। कितनी ही बार आप गिरे होंगे, उठे होंगे, चले होंगे, दौड़े होंगे..।

भास्कर संपादकीय: सुप्रीम कोर्ट की ऐतिहासिक पहल और अनुदार समाज

Bhaskar News | Sep 07,2018 00:23 AM IST

देश की सर्वोच्च अदालत ने आखिर समलैंगिकता के संदर्भ में एक ऐतिहासिक और उदार निर्णय दे ही दिया, जिसका एलजीबीटी ही नहीं उदारवादी लोकतांत्रिक समाज को लंबे समय से इंतजार था। इसके बावजूद सवाल यह है कि औपनिवेशिक गुलामी में बुरी तरह जकड़ा और उसी संदर्भ में अपने अतीत की व्याख्या करने पर आमादा समाज क्या उसे दिल से स्वीकार कर पाएगा? भारतीय दंड संहिता की धारा 377 पर सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यों की खंडपीठ ने इस फैसले में न सिर्फ अपने ही 2013 के फैसले को पलट दिया है बल्कि दिल्ली हाईकोर्ट के 2009 के निर्णय को भी स्वीकार कर लिया है।

जीने की राह कॉलम: नई भूल समझदारी का माध्यम होती है

पं. विजयशंकर मेहता | Sep 06,2018 01:16 AM IST

यदि सूरज उगने तक रोशनी का इंतजार न कर सकें तो रात में ही उजाले की संभावना जरूर खोजिएगा। जब आप रात में रोशनी टटोलने जाएंगे तो या तो जुगनू साथ आएंगे या चंद्रमा का सहयोग मिल जाएगा। वरना कृत्रिम प्रकाश पैदा करना पड़ेगा। लेकिन जो भी करना पड़ेगा, अंधेरे में ही करना पड़ेगा और अंधेरे में आप टकरा सकते हैं, भूल कर सकते हैं। ऋषि-मुनियों ने तो कहा है कि मनुष्य अंधकार के कारण ही भूल करता है। अंधकार एक तरह की बेहोशी है। यह जीवन में उतरी कि आप टकराए। लेकिन हम बात यह कर रहे हैं कि सुबह सूरज की रोशनी तक का इंतजार मत करिए, अंधेरे में भी प्रयास कीजिए।