महाभारत 2019: 66 साल में 17% ही बढ़े 12वीं पास सांसद, मौजूदा सांसदों में भी पांच कभी स्कूल नहीं गए

Bhaskar News | Aug 14,2018 07:20 AM IST

पिछले 66 सालों में लोकसभा सदस्यों के शैक्षणिक स्तर में काफी सुधार हुआ है। इसके बावजूद आज भी 25% सांसद ऐसे हैं जो 12वीं से कम पढ़े-लिखे हैं। पहली लोकसभा में जहां ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट और डॉक्टरेट सांसद 58% थे। वहीं मौजूदा लोकसभा में ये 17% बढ़कर 75% हो गए हैं। नॉन-मैट्रिक सांसदों की बात करें तो पहली लाेकसभा में ये सबसे ज्यादा 112 थे। हालांकि, अभी भी 69 सांसद नॉन-मैट्रिक हैं। वहीं, मौजूदा पांच सांसद कभी स्कूल नहीं गए, पर पढ़ना-लिखना जानते हैं। एक निरक्षर हैं।

भास्कर अंडर-30Y कॉलम: क्या सीमावर्ती क्षेत्रों के बाहर आर्मी कैंटीन की जरूरत है?

दिवाकर झुरानी | Aug 14,2018 00:17 AM IST

एक संसदीय पेनल में हाल ही में कहा कि भारत का रक्षा बजट 2018-19 में जीडीपी का 1.6 फीसदी है, जो ऐतिहासिक रूप से न्यूनतम है। इसके पहले इतना कम रक्षा खर्च 1962 में था। मौजूदा बजट आवंटन 2.95 लाख करोड़ रुपए का है, जिसमें से एक-तिहाई भी पूंजीगत खर्च नहीं है यानी उपकरणों, आधुनिकीकरण आदि पर नकद खर्च। ज्यादातर रक्षा बजट वेतन और सेना के दैनिक रखरखाव में खर्च हो जाता है।

भास्कर अंडर-30Y कॉलम: रेलवे के मिशन सत्यनिष्ठा की हर क्षेत्र में आवश्यकता

नरपत चारण | Aug 14,2018 00:13 AM IST

पिछले दिनों भारतीय रेलवे ने रेल कर्मचारियों में कार्य के दौरान नैतिकता और सत्यनिष्ठा के उच्च स्तर बनाए रखने के उद्‌देश्य से ‘मिशन सत्यनिष्ठा’ लॉन्च किया। यह किसी सरकारी संगठन द्वारा आयोजित किया गया इस तरह का पहला कार्यक्रम था। आंतरिक संसाधनों द्वारा आंतरिक शासन में सत्यनिष्ठा लाने की यह सराहनीय पहल हैं।

भास्कर संपादकीय: महाराष्ट्र में एटीएस के छापों के बाद शांति को लेकर चिंता

Bhaskar News | Aug 13,2018 23:54 PM IST

महाराष्ट्र में आतंकवाद विरोधी दस्ते (एटीएस) के छापे में सनातन संस्था से सहानुभूति रखने वाले सतारा से संबद्ध गोवंश रक्षा समिति के सदस्यों की गिरफ्तारी और उनके पास से पिस्तौल, देशी बम और जिलेटिन की छड़ें बरामद होने के बाद चिंता व्याप्त हो गई है। एक दौर में साम्यवादी विचारों के प्रभाव में इस देश में श्रीकाकुलम और नक्सलबाड़ी में उग्र वामपंथी आंदोलन पनपा और आज भी माओवादियों के रूप में उसके अवशेष छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र में मिल रहे हैं। मौजूदा घटना से साबित हो रहा है कि दक्षिणपंथी विचारों के अतिवाद में यकीन करने वाले उसी राह पर है। कोई भी संस्था या संगठन हथियार तब उठाता है जब उसे लगता है कि वह शांतिपूर्ण तरीके से लोगों को अपने विचारों से सहमत नहीं कर सकता। इसलिए उन्हें अपने विचारों को तेजी से फैलाने के लिए उग्रवाद का रास्ता ज्यादा कारगर लगता है।