भास्कर अंडर- 30Y कॉलम: संसाधनों की तुलना में खपत न घटाई तो हमारे वजूद पर संकट

नीरज झा | Aug 03,2018 00:09 AM IST

अर्थ ओवरशूट साल की एक ऐसी तारीख है, जिस दिन हम उस साल में पृथ्वी द्वारा उत्पन्न किए गए संसाधनों को उपभोग कर लेते हैं । 2000 के करीब यह पहली बार दर्ज किया गया था। जिसके बाद हर साल उत्पादन और खपत के हिसाब से अर्थ ओवरशूट डे का निर्धारण होने लगा। वर्ल्ड ओवरशूट डे की गणना ग्लोबल फुटप्रिंट नेटवर्क करता है। इसकी गणना चार स्तरों पर की जाती है। एक, हम सालभर में कितने संसाधन उपयोग करते हैं। दो, हम साल में किसी उत्पाद को कितनी कुशलता से बनाते हैं। तीन, उपभोग करने वाले हम कितने हैं और चार, पृथ्वी के पारिस्थितिक तंत्र को बनाए रखने के लिए हम किस प्रकार काम कर रहे हैं।

भास्कर संपादकीय: महंगाई और विकास दर में संतुलन का छोटा कदम

‌Bhaskar News | Aug 02,2018 23:36 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को दो महीने के भीतर लगातार दूसरी बार रेपो रेट में 25 बीपीएस की बढ़ोतरी करके उसे 6.5 करने का फैसला उम्मीदों के मुताबिक ही किया है। घरेलू मोर्चे पर उर्ध्वमुखी महंगाई, मानसून की लुका छिपी के बीच अच्छे खरीफ की घटती उम्मीदें, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल के उछलते दाम और बढ़ते व्यापारिक युद्ध के बीच केंद्रीय बैंक के पास इसके अलावा कोई उपाय भी नहीं था। हालांकि मुद्रा नीति समिति ने ब्याज दरें बढ़ाने का निर्णय जून के महीने की तरह सर्वसम्मति से नहीं लिया है। कम से कम एक सदस्य ने इसके विरुद्ध मत दिया।

महाभारत 2019: राहुल भाजपा मुक्त भारत की बात करेंगे तो मैं साथ नहीं, फैसले लेने में वे काफी स्लो: हार्दिक

अमित कुमार निरंजन | Aug 02,2018 17:45 PM IST

पाटीदार आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल इस महीने बेमियादी हड़ताल पर उतरने का एेलान कर चुके हैं। भास्कर संवाददाता अमित कुमार निरंजन ने उनसे कई मुद्दों पर बातचीत की। इसमें राहुल गांधी को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अगर राहुल भाजपा मुक्त भारत की बात करेंगे तो मैं साथ नहीं हूं। साथ ही उन्होंने राहुल को फैसले लेने में काफी स्लो भी बताया।

भास्कर संपादकीय: न्यायिक नियुक्ति में जरूरी है निष्पक्षता का पालन

Bhaskar News | Aug 01,2018 23:08 PM IST

न्यायिक नियुक्ति में निष्पक्षता और स्वायत्तता का सवाल भारतीय लोकतंत्र को निरंतर बेचैन किए हुए है और उसे जितना ही सुलझाने का प्रयास किया जाता है वह उतना ही उलझता जाता है। कार्यपालिका और न्यायपालिका के रिश्तों में इतना सौहार्द होना चाहिए कि न्यायपालिका की साख विवादित न हो। सर्वोच्च न्यायालय के कॉलेजियम से केंद्र सरकार ने शिकायत की है कि उच्च न्यायालयों की ओर से जो नाम भेजे जा रहे हैं उनमें भाई भतीजावाद, जातिवाद तो है ही समाज के वंचित तबके की उपेक्षा भी है।