भास्कर अंडर-30Y कॉलम: देश के कॉर्पोरेट क्षेत्र में शीर्ष नेतृत्व का संकट कैसे दूर हो?

अमन शर्मा | Jul 23,2018 23:37 PM IST

दुनिया में नेतृत्व का संकट आया हुआ है और यह संकट सार्वजनिक मामलों, शैक्षणिक विश्व और नौकरशाही में है। व्यक्तियों में विभिन्न भूमिकाएं निभाने और लोगों से यह करवाने की क्षमता ऊंची उठाने की जरूरत है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर पाया गया है कि कई सीईओ जनरल मैनेजर के रवैये से ही बाहर नहीं आ सके हैं। एग्जीक्यूटिव शिक्षा की बहुत बड़ी आवश्यकता है और इससे निपटने के लिए हमें यह समझना होगा कि यह संकट है किस बारे में।

भास्कर संपादकीय: कांग्रेस को तय करनी होगी संघर्ष की लंबी राह

Bhaskar News | Jul 23,2018 23:19 PM IST

कांग्रेस कार्यसमिति की विस्तारित बैठक की अध्यक्षता करते हुए राहुल गांधी ने पार्टी को नफरत की बजाय प्रेम के हथियार से भाजपा का मुकाबला करने की सीख तो दी है लेकिन, सवाल यही है कि क्या कांग्रेस पार्टी उस संदेश की गहराई को समझने और देश को समझा पाने में सक्षम है? यह अच्छी बात है कि कांग्रेस पार्टी 2019 के चुनाव के लिए 2014 के मुकाबले ज्यादा जोर से कमर कस रही है और उसने अपनी दलगत सीमाओं को पहचानते हुए गठबंधन को रणनीति ही नहीं सिद्धांत के रूप में भी स्वीकार किया है। हिंदी क्षेत्र के उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे बड़े राज्यों में अपनी कमजोर स्थिति को देखते हुए पार्टी ने यह मान लिया है कि वह अधिकतम अपनी मौजूदा संख्या को तीन गुने तक ले जा सकती है।

सुराज के बुनियादी अधिकार पर जाने का वक्त: एम. वेंकैया नायडू का कॉलम

एम. वेंकैया नायडू | Jul 23,2018 23:10 PM IST

बीता सोमवार हमारे लिए बहुत खास था, क्योंकि यह हमारे दो प्रखर स्वतंत्रता सेनानियों बाल गंगाधर तिलक और चंद्रशेखर आजाद की जयंती का दिन था। यह हमारा पवित्र कर्तव्य है कि उन्हें याद करें और उनकी याद में श्रद्धा से सिर नवाएं। मातृभूमि के इन दो महान सपूतों का हम पर बहुत बड़ा कर्ज है, जिन्होंने देश को आज़ादी दिलाने के लक्ष्य हासिल करने की दिशा में असाधारण संकल्प व प्रतिबद्धता दिखाई।

कुमार विश्वास की व्यंग्य श्रृंखला: 2019 बताएगा कि किसे ‘नो’, किसे ‘कॉन्फिडेंस’ मिला

Bhaskar News | Jul 23,2018 07:18 AM IST

कल शाम गोपालदास नीरज जी की श्रद्धांजलि सभा से लौटते हुए हाजी साथ थे। नीरज जी की बड़ी याद आएगी! एक ‘तर्पण’ इनका भी बनता है तुम्हारी तरफ से। अनमने भाव से मैंने सिर्फ इतना कहा, इसमें भी कोई कहने वाली बात है। संभवतः हाजी मेरी मनःस्थिति भांप गए थे, सो बात को दूसरी तरफ़ ले गए, ये देखकर अच्छा लगा महाकवि, कि टेलीविज़न चैनलों ने नीरज जी पर ख़ूब चर्चा की, जबकि अविश्वास प्रस्ताव की ज़बर्दस्त खींच-तान चल रही थी। मैंने कहा, ये तो ज़रूरी था।