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उनकी यह जगह कोई नहीं ले सकता...

Dainik Bhaskar

Jul 14, 2018, 02:28 AM IST

आज का यह आखिरी कॉलम इन चुनिंदा शब्दों के साथ बाकी जगह को खाली छोड़ते हुए कल्पेश को समर्पित है।

55 वर्षीय याग्निक प्रखर वक्ता औ 55 वर्षीय याग्निक प्रखर वक्ता औ
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कल्पेशजी नहीं रहे। 12 जुलाई की रात दस बजे से दो बजे के बीच सांसों से जद्दोजहद करते हुए वे हमसे विदा हो गए। ‘असंभव के विरुद्ध’ पाठकों के लिए कॉलम था। परंतु भास्कर में असंभव के विरुद्ध जो नियमित आप देखते और पढ़ते हैं, वह कल्पेश का पैशन और जिद थी। ‘महाभारत-2019’ पूरे एक साल उनका इस वर्ष का सबसे बड़ा मिशन था। कल्पेश की मुस्कुराहट, उनकी दृढ़ता और जर्नलिज्म के प्रति उनके जुनून को भास्कर में हमारे साथी उसी तरह जिएंगे, जैसा उन्होंने जिया। हमारी यादों में और स्मृतियों में वे सदैव जीवित रहेंगे। कल्पेश को अंतरात्मा से याद करते हुए नमन।
आज का यह आखिरी कॉलम इन चुनिंदा शब्दों के साथ बाकी जगह को खाली छोड़ते हुए कल्पेश को समर्पित है। क्योंकि कल्पेश की जगह कोई नहीं ले सकता। इसलिए उनकी यह जगह आज उन्हीं के नाम…
-सुधीर अग्रवाल, एमडी, दैनिक भास्कर समूह

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