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अमेरिकी विदेश मंत्री का इंटरव्यू:एंटनी ब्लिंकन बोले- अशरफ गनी के देश छोड़ने में मदद नहीं की, उन्होंने कहा था कि आखिरी सांस तक लड़ेंगे

काबुल3 महीने पहले

15 अगस्त को काबुल पर कब्जे के साथ ही तालिबान ने करीब-करीब पूरे अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया था। इसी दिन अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी देश छोड़कर चले गए। अब ये खुलासा हुआ है कि गनी ने काबुल छोड़ने से एक दिन पहले अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन से बातचीत की थी। हालांकि ब्लिंकन ने कहा है कि गनी से एक मीटिंग को लेकर चर्चा हुई थी और उन्होंने कहा था कि तालिबान के खिलाफ आखिरी सांस तक लड़ेंगे।

ब्लिंकन ने अफगानिस्तान के टोलो न्यूज चैनल का एक इंटरव्यू में कई अहम मुद्दों पर बातचीत की। उन्होंने कहा- तालिबान वादे निभाता है तो हम उसके साथ काम कर सकते हैं। पढ़िए टोलो न्यूज के सवाल और उन पर अमेरिकी विदेश मंत्री के जवाब...

सवाल: अफगानिस्तान में 20 साल रहने के बाद अमेरिका को क्या मिला?
जवाब:
इसका जवाब वक्त के साथ मिलेगा, लेकिन शुरुआती मिशन काफी हद तक सफल था। अमेरिका का अफगानिस्तान जाने का मुख्य उद्देश्य अल-कायदा को खत्म करना था। हम ओसामा बिन लादेन जैसे खतरनाक आतंकवादी को खत्म करने में कामयाब रहे। वो अफगानिस्तान ही नहीं, बल्कि दुनिया के लिए एक नासूर था। हमने उस नासूर को खत्म करने में कामयाबी हासिल की।

सवाल: तालिबान हुकूमत को लेकर अमेरिका की क्या सोच है?
जवाब:
अमेरिका अफगानिस्तान के लोगों के लिए प्रतिबद्ध है। फिलहाल, हम देखेंगे कि नई सरकार अफगानिस्तान के प्रति अपनी प्रतिबद्धताओं और वादों को पूरा करती है या नहीं। हम तालिबान की अंतरिम सरकार के साथ काम करने को तैयार हैं, लेकिन पहले उन्हें वादे पूरे करने होंगे। नई सरकार आतंकवाद, मानवाधिकार और अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर कितनी गंभीर है, यह देखना बाकी है।

सवाल: काबुल में एक लोकतांत्रिक सरकार के पतन पर क्या कहेंगे?
जवाब:
अफगानिस्तान सुरक्षा बलों और लोगों ने साहस, बहादुरी और जबरदस्त बलिदान के साथ काम किया, लेकिन एक चुनी हुई सरकार के इस तरह से भागने से एक झटके में सब कुछ खत्म हो गया। अमेरिका ने ISIS-K जैसे आतंकी संगठन के खतरों के बीच भी लगभग एक लाख पच्चीस हजार लोगों को बहुत ही कम समय में कठिन हालात में अफगानिस्तान से सुरक्षित निकाला।

सवाल: क्या अमेरिका ने पूर्व राष्ट्रपति गनी को काबुल से बाहर निकालने में मदद की?
जवाब:
नहीं, सवाल ही नहीं उठता।

सवाल: क्या गनी ने देश छोड़ने से पहले अमेरिका से बातचीत की थी?
जवाब:
नहीं, राष्ट्रपति गनी के देश छोड़ने से एक दिन पहले हमारी फोन पर बातचीत हुई थी। हमने फोन पर दोहा में हुई मीटिंग को लेकर चर्चा की। गनी ने मुझसे कहा था कि वो तालिबान के खिलाफ आखिरी सांस तक जंग लड़ेंगे। उन्होंने किन हालात में देश छोड़ने का निर्णय लिया। मुझे इसकी जानकारी नहीं है। अमेरिका ने उनके भागने में कोई मदद नहीं की है।

सवाल: गनी अपने साथ लाखों डॉलर कैश ले गए। क्या आप इसके बारे में जानते हैं?
जवाब:
मुझे इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। मैं जो जानता हूं, वो यह है कि उन्होंने देश छोड़ दिया और बहुत ही कम समय में अफगानी सुरक्षाबल और सरकार ने तालिबान के सामने हथियार डाल दिए।

सवाल: तालिबान सरकार की मान्यता को लेकर अमेरिका का क्या रुख होगा?
जवाब:
हम अभी इंतजार करेंगे। यह तालिबान सरकार के काम पर निर्भर करेगा। तालिबान का कहना है कि वह दुनिया से समर्थन चाहता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि तालिबान जो कह रहा है, वादे कर रहा है, उन्हें पूरा करता है या नहीं। इसमें लोगों के दूसरे देशों में आने-जाने पर रोक, आतंकवाद, महिलाओं, लड़कियों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर नई सरकार का रुख उनका भविष्य तय करेगा। अमेरिका कूटनीतिक तरीके से सभी मामलों पर नजर रखेगा।

सवाल: क्या अमेरिका पंजशीर और अन्य तालिबान विरोधी नेताओं के संपर्क में था?
जवाब:
हमारा ध्यान अभी अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ काम करने पर है। अफगानिस्तान की नई सरकार से दुनिया को उम्मीदें हैं। देखना यह है कि इन उम्मीदों को पूरा करने में तालिबान सरकार कितनी सफल होती है।