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तालिबानी हुकूमत:आतंकी संगठन ISIS-खुरासान पर हवाई हमलों की तैयारी में ब्रिटेन, पेंटागन बोला- अफगानिस्तान में इनके 2 हजार आतंकियों की मौजूदगी के सबूत

काबुल3 महीने पहले

ब्रिटेन ने कहा है कि वह ISIS-K के ठिकानों पर कभी भी हमला कर सकता है। हाल ही में पेंटागन ने खुलासा किया है कि अफगानिस्तान में इस समय करीब 2 हजार ISIS खुरासान के लड़ाके मौजूद हैं। ब्रिटेन के वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल सर माइक विग्सटन ने सोमवार को बताया कि ब्रिटेन ISIS-K के खिलाफ कार्रवाई में शामिल हो सकता है।

उन्होंने काबुल एयरपोर्ट पर हुए हमले पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि इस दुख के समय में ब्रिटेन अपने गठबंधन सहयोगियों के साथ खड़ा है। हम इस आतंकी संगठन के खात्मे के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन सरकार के अफसरों ने एयर स्ट्राइक के लिए लॉजिस्टिक्स की जांच की है।

उन्होनें रॉयल एयर फोर्स (RAF) के लड़ाकू विमान के टारगेट, रिफ्यूलिंग और बेस की स्थिति का मुआयना किया है। विग्सटन ने बताया कि हम स्ट्राइक के जरिए, सेना भेजकर या किसी देश के इक्विपमेंट का प्रयोग करके आतंकी संगठन पर हमला कर सकते हैं।

काबुल एयरपोर्ट पर रखे 73 एयरक्राफ्ट्स को खराब कर गई अमेरिकी सेना
अमेरिकी सेना ने सोमवार रात को अफगानिस्तान छोड़ दिया। उसके जाते ही तालिबान ने काबुल एयरपोर्ट पर कब्जा कर लिया। लेकिन यहां रखे विमानों को तालिबान कभी इस्तेमाल नहीं कर पाएगा। ऐसा इसलिए, क्योंकि अमेरिकी सेना इन विमानों को निष्क्रिय कर गई है।

सेंट्रल कमांड के हेड जेनरल केनेथ मैकेंजी ने कहा कि 73 एयरक्राफ्ट जो हामिद करजई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर रखे हैं, उन्हें डिसेबल कर दिया गया है। मैकेंजी ने कहा- 'ये विमान अब कभी नहीं उड़ेंगे... इन्हें कभी कोई ऑपरेट नहीं कर पाएगा। हालांकि इनमें से ज्यादातर विमान मिशन के लिहाज से नहीं बनाए गए थे, लेकिन फिर भी इन्हें कभी कोई उड़ा नहीं सकेगा।'

मैकेंजी ने यह भी कहा कि अमेरिकी सेना करीब 70 माइन रेजिसटेंट ऐंबुश प्रोटेक्शन (MRAP) व्हीकल एयरपोर्ट पर छोड़ आई है। यह व्हीकल IED अटैक और दुश्मन के हमलों को झेल सकता है। एक व्हीकल की कीमत 10 लाख डॉलर तक होती है। सेना ने इन्हें भी डिसेबल कर दिया है।

चीन ने तालिबान से आतंकी समूहों से नाता तोड़ने को कहा
चीन ने तालिबान से आतंकी समूहों से नाता तोड़ने को कहा है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन कहा कि तालिबान को अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मान्यता के लिए अफगानिस्तान में समावेशी सरकार बनाना होगा। इस सरकार को अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त करने के लिए उदार नीतियों का पालन करना चाहिए।

वांग वेनबिन कहा कि अफगानिस्तान विदेशी सैन्य हस्तक्षेप से आजाद हो चुका है। अफगानिस्तान के लोग शांति और पुनर्निर्माण के लिए एक नई शुरुआत करने वाले हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या चीन तालिबान को मान्यता देने के लिए तैयार है? वांग ने कहा कि हमें उम्मीद है कि अफगानिस्तान एक खुली समावेशी और प्रतिनिधि सरकार बना सकता है। यह देश उदार और विवेकपूर्ण घरेलू और विदेशी नीतियों का पालन कर सभी प्रकार के आतंकवादी समूहों का मुकाबला कर सकता है।

वांग ने कहा कि चीन अफगानिस्तान की संप्रभुता का सम्मान करता है। वह उनके निजी मामलों मे दखल नहीं देगा और अफगानी लोगों के साथ दोस्ती को बनाए रखेगा। चीन अफगानिस्तान में शांति बहाल करने और अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बात करेगा।

5 हजार अफगानियों को शरण देगा कनाडा
कनाडा ने मंगलवार को कहा कि वह अमेरिका के सहयोग से निकाले गए करीब 5 हजार अफगानी नागरिकों को देश मे शरण देगा। यह शरणार्थी अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद निकाले गए थे। कनाडा के इमिग्रेशन मिनिस्टर मार्को मेंडिसीनो ने कहा कि हम अफगानी लोगों की मदद करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। कनाडा ने हाल ही में पुनर्वास प्रोग्राम की घोषणा की थी। इस प्रोग्राम के तहत इन शरणार्थियों को कनाडा मे बसाया जाएगा।

काबुल एयरपोर्ट पर खड़ा अमेरिकी सेना का एक MRAP व्हीकल।
काबुल एयरपोर्ट पर खड़ा अमेरिकी सेना का एक MRAP व्हीकल।

तालिबान ने किया आजादी का ऐलान
तालिबान के अल्टीमेटम (31 अगस्त) से पहले ही अमेरिकी सेना ने अफगानिस्तान छोड़ दिया। रात करीब 12 बजे काबुल एयरपोर्ट से सेना का आखिरी दल रवाना हुआ। इसके साथ ही अमेरिकी सेना के यहां 20 साल चले संघर्ष का अंत हो गया। इधर, अमेरिकी सेना की विदाई हुई और उधर तालिबान ने अफगानिस्तान की आजादी का ऐलान कर दिया। तालिबान ने कहा है कि इस जंग में हमारी जीत हुई है। यह घुसपैठियों के लिए एक सबक है।

तालिबान ने कहा- हम अमेरिका समेत सभी के साथ अच्छे रिश्ते चाहते हैं
काबुल एयरपोर्ट पर मीडिया से बात करते हुए तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने कहा, ‘यह ऐतिहासिक मौका है और हमारा मुल्क अब आजाद है। मैं सभी अफगानियों को जीत की बधाई देता हूं। हम अमेरिका समेत पूरी दुनिया के साथ अच्‍छे रिश्‍ते कायम करना चाहते हैं।’

अमेरिकी सेना ने तय समय से 24 घंटे पहले ही अफगानिस्तान छोड़ा
तालिबान के साथ हुए समझौते के तहत अमेरिका को 31 अगस्त तक पूरी तरह अफगानिस्तान को छोड़ देना था। लेकिन अमेरिका चौबीस घंटे पहले ही अफगानिस्तान से निकल गया। जैसे ही अमेरिका के चार सैन्य परिवहन विमानों सी-17 ने काबुल एयरपोर्ट से उड़ान भरी, तालिबान के लड़ाकों ने जश्न में फायरिंग शुरू कर दी। यहां पूरी खबर पढ़ें...

अमेरिकी सेना की रवानगी के बाद काबुल एयरपोर्ट पर गश्त करता तालिबान लड़ाका। दूसरी ओर आसमान में तालिबान की आतिशबाजी।
अमेरिकी सेना की रवानगी के बाद काबुल एयरपोर्ट पर गश्त करता तालिबान लड़ाका। दूसरी ओर आसमान में तालिबान की आतिशबाजी।

काबुल एयरपोर्ट अब किसी के कंट्रोल में नहीं
अमेरिकी विमानों ने अफगानिस्तान का एयरस्पेस छोड़ा भी नहीं था कि तालिबान ने अफगानिस्तान के अमेरिका मुक्त होने की घोषणा कर दी। इसी बीच नोटैम (नोटिस टू एयरमैन) ने आपात संदेश जारी कर कहा कि काबुल एयरपोर्ट अब किसी के नियंत्रण में नहीं है और यहां कोई एयर ट्रैफिक कंट्रोल भी नहीं है। इसका मतलब ये है कि किसी विमान का यहां से उड़ना या उतरना सुरक्षित नहीं है।

वहीं तालिबान का कहना है कि उसके स्पेशल फोर्स बदरी 313 ने काबुल हवाई अड्डे की सुरक्षा की कमान संभाल ली है। उधर जनरल मैकेंजी ने अमेरिका में अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की पूरी तरह वापसी की घोषणा कर दी। जनरल मैकेंजी ने ये भी बताया कि अफगानिस्तान छोड़ने की कोशिश कर रहे कुछ अमेरिकी नागरिक अभी अफगानिस्तान में ही रह गए हैं।

ट्रम्प ने कहा- सैन्य अभियान की ऐसी दुर्गति कभी नहीं हुई
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अफगानिस्तान से सैन्य वापसी के तरीके पर मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडेन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, ‘इतिहास में कभी भी सैन्य अभियान का ऐसा अंजाम नहीं हुआ। वहां से हमारे सभी सैन्य साजो-सामान और हथियार वापस लाने की अमेरिका को मांग करनी चाहिए। इस पर हमारे अरबों डॉलर खर्च हुए हैं। ऐसा न हो तो कम से कम हमें उन्हें बम गिराकर नष्ट करना चाहिए।’

अमेरिकी हथियारों और अमेरिकी यूनिफॉर्म में काबुल एयरपोर्ट पर तैनात तालिबानी लड़ाके।
अमेरिकी हथियारों और अमेरिकी यूनिफॉर्म में काबुल एयरपोर्ट पर तैनात तालिबानी लड़ाके।

कल तालिबान ने हजारा समुदाय के 14 लोगों की हत्या की
अफगानिस्तान के अखबार इतलेआत रोज ने दावा किया है कि दायकुंदी प्रांत के खदीर जिले में तालिबान ने कुल 14 लोगों को मारा है, जिनमें 2 आम नागरिक हैं। वहीं हजारा मामलों पर नजर रखने वाले एक कार्यकर्ता का कहना है कि हम स्वतंत्र तौर पर पीड़ितों से बात नहीं कर सके हैं लेकिन स्थानीय मीडिया ने 14 लोगों के मारे जाने की खबर प्रकाशित की है।

हजारा समुदाय से जुड़े कार्यकर्ताओं का दावा है कि हजारा बहुल जिले दायकुंदी में तालिबान ने नजीबा लाइब्रेरी और कंप्यूटर लैब में तोड़फोड़ और लूटपाट की है। हजारा पत्रकार बशीर अहंग के मुताबिक इस लाइब्रेरी में स्थानीय हजारा लड़कियां और लड़के पढ़ाई करते थे।

पंजशीर पर तालिबान ने हमला किया
पंजशीर में अहमद मसूद से जुड़े सूत्रों ने दावा किया है कि तालिबान ने कई तरफ से हमला बोला है। पंजशीर के लड़ाके भी उनका जवाब दे रहे हैं। इससे पहले तालिबानी सूत्रों ने कहा था कि पंजशीर में कई गुट तालिबान के समर्थन में आ रहे हैं। पंजशीर पर हमले की पुष्टि कई सूत्र कर रहे हैं।

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