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तालिबान की हकीकत:महिलाओं के लिए बनाए गए मंत्रालय में उनकी ही एंट्री पर बैन, सिर्फ पुरुष कर्मचारियों को काम करने की मंजूरी

काबुल2 महीने पहले

तालिबान महिलाओं को उनके हक देने के वादे करके दुनिया की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश कर रहा है। इसका एक और सबूत गुरुवार को सामने आया। तालिबान ने महिलाओं के बनाए मंत्रालय में उनकी ही एंट्री पर रोक लगा दी। ‘मिनिस्ट्री ऑफ वुमन अफेयर’ काबुल में है और इसमें सिर्फ पुरुष कर्मचारियों को ही जाने की मंजूरी दी गई है।

तालिबान हुकूमत के ऐलान के वक्त और उसके बाद कई बार प्रवक्ताओं ने साफ कहा था कि महिलाओं को कैबिनेट में भले ही जगह न दी गई हो, लेकिन मंत्रालयों में वो पहले की तरह काम करती रहेंगी, हालांकि उन्हें लिबास वही पहनना होगा जो तालिबान अपनी गाइडलाइन्स में देगा।

रूस की एजेंसी का खुलासा
महिलाओं के मंत्रालय में महिला कर्मचारियों के जाने पर रोक का खुलासा रूस की न्यूज एजेंसी स्पूतनिक ने किया है। एक रिपोर्ट में एजेंसी ने कहा- महिला मंत्रालय में गुरुवार को चार कर्मचारी जाना चाहती थीं। इनके पास अपने आईडी कार्ड भी मौजूद थे और ये बुर्के में थीं। इसके बावजूद उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया। इस मंत्रालय में सिर्फ पुरुष कर्मचारियों को जाने दिया जा रहा है।

इस घटना के बाद महिला कर्मचारियों ने गुस्से का इजहार किया और दो महिला कर्मचारियों ने वहां मौजूद तालिबान के लोगों के सामने विरोध प्रदर्शन किया। बाद में उन्हें बदसलूकी करके वहां से हटा दिया गया।

काबुल की एक सड़क पर तैनात तालिबान।
काबुल की एक सड़क पर तैनात तालिबान।

तालिबान का वादा
तालिबान ने 15 अगस्त को काबुल पर कब्जे के साथ ही पूरे अफगानिस्तान पर हुकूमत कायम कर ली थी। इसके बाद पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में ही तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने साफ कर दिया था कि शरिया के हिसाब से महिलाओं को शिक्षा और रोजगार का हक दिया जाएगा। इसके बाद हुकूमत का ऐलान हुआ और फिर यही बात दोहरा दी गई। मुजाहिद ने पिछले दिनों एक इंटरव्यू में भी कहा था- इस्लाम और शरिया के मुताबिक, जिन मंत्रालयों में महिलाओं को काम करने की इजाजत दी जा सकती है, वहां वे जरूर काम कर सकेंगी। हम उनके अधिकारों का सम्मान करेंगे। वे कॉलेज में भी पढ़ सकेंगी।

प्रदर्शन जारी
तालिबान ने महिलाओं को लेकर अपना कोई वादा पूरा नहीं किया है। काबुल को छोड़कर मुल्क के बाकी हिस्सों में उनके स्कूल और कॉलेज तक नहीं खुले हैं। जहां खुले हैं वहां लड़के और लड़कियों की क्लास या तो अलग-अलग हैं या फिर बीच में पर्दा लगाकर पार्टिशन किया गया है।

इन तमाम घटनाओं के बाद हेरात शहर में सबसे पहले महिलाओं ने प्रदर्शन किए थे। तब तालिबान ने उनके साथ मीडिया के सामने ही मारपीट की थी। इसके बाद काबुल में कई दिन तक इस तरह के प्रदर्शन हुए थे, लेकिन इन्हें दबा दिया गया था। गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र के कुछ अफसरों ने काबुल में तालिबान के होम मिनिस्टर सिराजुद्दीन हक्कानी से मुलाकात की थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तालिबान को बता दिया गया है कि मानवीय सहायता पाने के लिए तालिबान को अपने वादे पूरे करने होंगे।

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