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एक दर्जन से अधिक ट्रेनों में जाेड़े जाएंगे अतिरिक्त काेच

एक वर्ष पहले
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यात्रियाें की भीड़ काे देखते हुए दुर्गापूजा से छठ तक एक दर्जन से अधिक ट्रेनाें में अतिरिक्त काेच लगाए जाएंगे। एेसा उन ट्रेनाें में किया जाएगा, जिनमें 24 से कम काेच हैं। ट्रेनाें में काेचाें की संख्या बढ़ाने के लिए रेलवे अब हेड अाॅन जेनरेशन सिस्टम का भी इस्तेमाल कर रहा है। राजेंद्रनगर-नर्इ दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस में सफलतापूर्वक प्रयाेग के बाद इस तकनीक का इस्तेमाल दूसरी ट्रेनाें में भी किया जा रहा है। यह तकनीक पर्यावरण बचाने में भी कारगर है।

क्या है हेड अाॅन जेनरेशन सिस्टम
अभी ज्यादातर ट्रेनों में दो जेनरेटर कोच होते हैं। इनमें से एक से डिब्बों में बिजली सप्लाई की जाती है और दूसरे को रिजर्व रखा जाता है। अब ट्रेनाें में एक ही जनरेटर कोच ट्रेन रहेगा। एक जेनरेटर कोच की जगह स्लीपर कोच लगाया जाएगा। इससे ट्रेन की लंबाई बढ़ाए बिना ही एक कोच बढ़ेगा। पूर्व मध्य रेल की एलएचबी कोच से परिचालित होने वाली 10 जोड़ी ट्रेनों के रैक में इस सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है। इससे रेलवे को प्रत्येक महीने एक करोड़ रुपए के डीजल की बचत होगी। यह सिस्टम उन्हीं ट्रेनों में लागू किया गया है, जो विद्युत इंजन से ही चलती हैं।

इन ट्रेनाें में लगा है यह सिस्टम
12309/10 राजधानी एक्सप्रेस

12393/94 संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस

13257/58 जनसाधारण एक्सप्रेस

13238/13239/13240 पटना-कोटा

12397/12398 महाबोधि एक्सप्रेस

13307/08 सतलज एक्सप्रेस

12553/54 वैशाली सुपरफास्ट

15279/80 पुरबिया एक्सप्रेस

12567/68 राज्यरानी एक्सप्रेस

13205/06 जनहित एक्सप्रेस

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