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गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण नहीं रहे; पार्थिव देह डेढ़ घंटे स्ट्रेचर पर रखी रही, एंबुलेंस वाले ने 5 हजार रु. मांगे

एक वर्ष पहले
  • 77 साल के वशिष्ठ नारायण सिंह ने गुरुवार को पटना के पीएमसीएच में अंतिम सांस ली, एंबुलेंस के लिए 5 हजार रु. किराया मांगा गया
  • वशिष्ठ लंबे समय से सिजोफ्रेनिया से पीड़ित थे, उन्होंने आइंस्टीन के सापेक्षता सिद्धांत को चुनौती दी थी
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पटना. गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह (77) का गुरुवार को निधन हो गया। लंबे समय से बीमार वशिष्ठ नारायण ने पटना के पीएमसीएच में अंतिम सांस ली। वे काफी समय से सिजोफ्रेनिया बीमारी से पीड़ित थे। वशिष्ठ नारायण ने आइंस्टीन के सापेक्षता सिद्धांत को चुनौती दी थी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनके निधन पर शोक जताया। उन्होंने कहा-  सिंह का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ होगा।
 

  वशिष्ठ नारायण सिंह का पार्थिव शरीर अस्पताल परिसर में करीब 1.30 घंटे तक स्ट्रेचर पर रखा रहा। अस्पताल प्रशासन की तरफ से एंबुलेस नहीं मुहैया कराई गई। पार्थिव देह के साथ वशिष्ठ नारायण के भाई काफी देर तक अस्पताल के बाहर खड़े रहे।उन्होंने बताया कि एंबुलेंस वाले ने पार्थिव शरीर भोजपुर ले जाने के लिए 5 हजार रुपए मांगे। बाद में कलेक्टर कुमार रवि और कुछ नेता पहुंचे, जिसके बाद एंबुलेंस के उनके पैतृक आवास भोजपुर ले जाने की व्यवस्था हुई। वशिष्ठ नारायण सिंह के पार्थिव शरीर को भोजपुर ले जाने से पहले अंतिम दर्शन के लिए कुल्हड़िया कॉम्पलेक्स में रखा गया।   

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टीचर को भी टोक देते थे वरिष्ठ नारायण
वशिष्ठ नारायण शैक्षणिक जीवनकाल में बेहद कुशाग्र थे। पटना साइंस कॉलेज से पढ़ाई करने वाले वशिष्ठ गलत पढ़ाने पर गणित के अध्यापक को बीच में ही टोक दिया करते थे। इस बात की सूचना पर कॉलेज के प्रिंसिपल ने उन्हें बुला कर परीक्षा ली और उन्हें सही पाया। साइंस कॉलेज में पढ़ाई के दौरान कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जे कैली ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें अमेरिका ले गए।
 

नासा में भी किया काम
कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से ही उन्होंने पीएचडी की डिग्री ली और वॉशिंगटन विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर बन गए। नासा में भी काम किया। भारत लौटकर उन्होंने आईआईटी कानपुर, आईआईटी मुंबई और आईएसआई कोलकाता में नौकरी की।
 


 
 

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