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बत्ती गुल मीटर चालू / अच्छा विषय, सही उद्देश्य लेकिन स्लो और बोरिंग है फिल्म

Dainik Bhaskar

Sep 24, 2018, 05:08 PM IST
क्रिटिक रेटिंग 2.5/5
स्टार कास्ट शाहिद कपूर, श्रद्धा कपूर, दिव्येन्दु शर्मा, यामी गौतम
डायरेक्टर श्री नारायण सिंह
प्रोड्यूसर भूषण कुमार, कृष्ण कुमार,नितिन चन्द्रचूड़,कुसुम अरोरा, निशांत पिट्टी
संगीतकार अनु मलिक, रोचक कोहली
गीतकार सिद्धार्थ-गरिमा, मनोज मुंतशिर
गायक राहत फ़तेह अली खान,अरिजीत सिंह, आतिफ असलम, मीका सिंह,प्रकृति कक्कड़,नक्श अजीज
जॉनर सोशल ड्रामा

बॉलीवुड डेस्क. डायरेक्टर श्री नारायण सिंह ने एक प्रासंगिक मुद्दे को उठाया है। बुनियादी सुविधाओं की कमी अभी भी देश के आधे से ज्यादा भाग को परेशान कर रही है और भ्रष्टाचार और उदासीनता इसे और भी ज्यादा बुरा बना दिया है। सिंह ने उत्तराखंड राज्य को चुना है, जहां लोग बिजली की कमी से परेशान है।

कहानी: फिल्म के तीन प्रमुख किरदार तीन दोस्त हैं। नौटी उर्फ ललिता (श्रृद्धा कपूर), सुंदर त्रिपाठी (दिव्येन्दु शर्मा), सुशील उर्फ एसके (शाहिद कपूर) उत्तराखंड के छोटे कस्बे में रहते हैं। नौटी, फैशन डिजाइनर है। सुंदर का खुद का बिजनेस है और एसके एक चालू किस्म का वकील है जो गलत तरीके से पैसा कमाता है। तीनों दोस्त एक-दूसरे के बेहद करीब हैं और ज्यादातर समय साथ ही बिताते हैं।

उनके कस्बे में दिन में ज्यादातर समय बिजली नहीं रहती, जिससे निराशा बढ़ती जाती है। त्रिपाठी फैक्टरी का सेटअप कर रहा होता है तभी उसे 54 लाख रुपए का बिजली बिल भेजा जाता है। परेशान और हताश होकर त्रिपाठी कुछ ऐसा करता है जिससे इलेक्ट्रिकल कंपनी का देशव्यापी विरोध होता है जिसका नेतृत्व एसके करता है।

फिल्म का उद्देश्यसही है लेकिन उस समय अमल नहीं किया गया। फिल्म 2 घंटे 55 मिनट लंबी है जो काफी स्लो और बोरिंग है। इस फिल्म की एडिटिंग खुद डायरेक्टर ने की है इसलिए फिल्म के फ्लो में काफी कमियां है। फिल्म काफी लंबी बन गई है। कहानी को एक घंटा खींचा गया है।

डायरेक्शन: शुरूआत में तीन दोस्तों नौटी, सुंदर और एसके को देखना अच्छा लगता है लेकिन थोड़ी देर के बाद बोरिंग लगने लगता है क्योंकि कहानी में हर छोटी-छोटी चीजों को इतना एक्सप्लेन किया है कि दर्शक परेशान हो जाते हैं। कल्पना करने के लिए कुछ भी नहीं छोड़ा जाता। फिल्म का स्क्रीनप्ले विपुल के रावल, सिद्धार्थ सिंह और गरिमा वहाल ने लिखा है। फिल्म में उत्तराखंड की लोकल लैंग्वेज के शब्दों को यूज बहुत ज्यादा किया गया है जो कि हजम नहीं होता।

एक्टिंग: शाहिद कपूर ने मनी माइंडेड वकील की भूमिका निभाई जो कि बाद में अपने कामों का पश्चाताप करता है। एक दो सीन को छोड़ दें तो उनका काम काफी अच्छा है। श्रृद्धा कपूर ने भी अच्छा काम किया है। उन्होंने छोटे कस्बे की लड़की के रोल में फिट होने के लिए अपनी बॉडी लैंग्वेज और पहनावे में कुछ चेंज किए हैं। दिव्येन्दु ने फिल्म में गुड बॉय का किरदार निभाया है। उनका काम भी अच्छा है। यामी गौतम के कैरेक्टर का नाम गुल्नार है जो कि डिफेंस की वकील बनी हैं।

देखें या नहीं: यह फिल्म रियल मुददे पर बनाई गई है। फिल्म निर्माताओं का इरादा नेक है लेकिन सही प्रेजेंटेशन के अभाव में उतनी प्रभावी नहीं है जितनी इसे होना चाहिए था।

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