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मंटो/ विवादित लेखक की लाइफ को बखूबी दिखाती है फिल्म, नवाजुद्दीन की एक्टिंग में दम



Dainik Bhaskar

Sep 24, 2018, 05:41 PM IST
क्रिटिक रेटिंग 4/5
 
स्टार कास्ट नवाजुद्दीन सिद्दीकी,रसिका दुग्गल,ताहिर राज भसीन,ऋषि कपूर,दानिश हुसैन
डायरेक्टर


नंदिता दास

प्रोड्यूसर    नंदिता दास, विक्रांत बत्रा, नम्रता गोयल,अजित अंधारे
 
संगीतकार  रफ्तार, स्नेहा खानविलकर 
गीतकार  दिबाकर बैनर्जी,रफ्तार
गायक   शंकर महादेवन, रेखा भारद्वाज, राशिद खान
जॉनर बायोपिक

 

कहानी: इसके पहले भी कई बार विवादित लेखक सआदत हसन मंटो पर फिल्म बनाई गई हैं लेकिन, नंदिता दास की फिल्म इस सब्जेक्ट से न्याय करती है। दास ने मंटो के उस जीवन काल का चित्रण किया है जब भारत स्वतंत्र हो गया था और भारत- पाकिस्तान के विभाजन के चलते देश की स्थिति ठीक नहीं थी, लोग परेशान थे। उस समय एक कवि और लेखक अपने दोस्तों और करियर को बॉम्बे में छोड़कर पाकिस्तान में बसने का फैसला करता है। लेकिन, बाद में इस फैसले पर अफसोस करता है।

 

डायरेक्शन: डायरेक्टर ने 40 के दशक के बॉम्बे का असाधारण चित्रण किया है। सिनेमेटोग्राफर कार्तिक विजय की मदद से बॉम्बे को ऐसा दिखाया गया है कि लगता है कि उसी समय में जाकर शूटिंग की गई हो। मंटो अपने दोस्तों एक्टर श्याम चड्ढा (ताहिर भसीन), विवादित लेखक इस्मत चुगताई (राजश्री देशपांडे) और अशोक कुमार (भानू उदय सिंह) के साथ खुश है। फिल्म में मंटो की पार्टीशन के बाद बॉम्बे से लाहौर तक की यात्रा को दिखाया गया है। लाहौर आने के बाद उनकी लाइफ में बड़े परिवर्तन आते हैं। अंत में वे 42 की उम्र में गरीबी और शराब के कारण मर जाते हैं। उनके काम को अश्लील कहा जाता है, इसके लिए वो कोर्ट में अपनी पैरवी करते हैं। 

 

एक्टिंग: नवाजुद्दीन ने मंटो के किरदार में जान डाल दी है, उन्हें देखना अच्छा लगता है। वे लकी हैं कि उन्हें इस रोल को करने मौका मिला और उन्होंने इसे बखूबी निभाया। ताहिर भसीन का काम शानदार है। रसिका दुग्गल जो मंटो की बीवी बनी हैं, प्रभावित नहीं कर पाती। दास ने इस कहानी में मंटो के अच्छे काम को भी दिखाया है। ऋषि कपूर प्रोड्यूसर बने हैं, परेश रावल निर्दयी दलाल, जावेद अख्तर न्यूजपेपर के एडिटर और रणवीर शौरी और दिव्या दत्ता मंटो का हिस्सा हैं। 

 

म्यूजिक: फिल्म का म्यूजिक जिसे स्नेहा खानविल्कर और रफ्तार ने कंपोज किया है, फिल्म के मूड को सूट करता है। जद्दन बाई की गजल जिसे ईला अरुण ने गाया है, शानदार है। 

 

देखें या नहीं: जो लोग मंटो और उनके काम को जानते हैं उन्हें ये फिल्म जरूर देखनी चाहिए। इसे इसलिए भी देखा जाना चाहिए क्योंकि ये एक प्रगतिशील लेखक की दुखद कहानी को दिखाती है जो समाज में अपनी जगह ढूंढने के लिए संघर्ष कर रहा है। इसे नवाजुद्दीन की परफॉर्मेंस के लिए भी देखना चाहिए।    

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