हिंदी दिवस / स्वानंद किरकिरे बोले- जो स्टार्स अंग्रेजी पसंद करते थे, अब हिंदी में मैसेज करते हैं

  • हिंदी दिवस परसर्वश्रेष्ठ लेखन के लिए दो बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से नवाजे जा चुके स्वानंदकिरकिरे और कविआलोक श्रीवास्तव से खासबातचीत
  • स्वानंदबोले-जॉब के लिए अंग्रेजी सीखनेमें कोई बुराई नहीं, लेकिन हिंदी को न छोड़ें
  • आलोक के मुताबिक-सबसे बड़ा खतरा उन्हीं लोगों से है, जो मानते हैं कि हिंदी खत्म हो रही है

अक्षय बाजपेयी

Sep 14, 2019, 01:00 PM IST

डीबी ओरिजिनल डेस्क. आज (14 सितंबर) हिंदी दिवस है। 14 सितंबर 1949 को ही संविधान सभा ने एक मत से हिंदी को भारत की राजभाषा बनाने का निर्णय लिया था। इसके बाद राष्ट्रभाषा प्रचार समिति (वर्धा) के अनुरोध पर वर्ष 1953 से पूरे भारत में 14 सितंबर को हर साल हिंदी दिवस मनाया जाने लगा। बीते सालों में जिस तेजी से आम लोगों तक इंटरनेट पहुंचा है, उसी तेजी से हिंदी भी बढ़ रही है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2016 में डिजिटल माध्यम से हिंदी समाचार पढ़ने वालों की संख्या 5.5 करोड़ थी, 2021 तक इसका बढ़कर 14.4 करोड़ होने का अनुमान है। इन्हीं सब तथ्यों के साथ हमने मौजूदा परिदृश्य में हिंदी को लेकर गीतकार, पार्श्वगायक, लेखक और सर्वश्रेष्ठ लेखन के लिए दो बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से नवाजे जा चुके स्वानन्द किरकिरे और अपनी दिलकश रचनाओं से हिन्दी-उर्दू के पाठकों के बीच खास मुकाम बनाने वाले कवि पत्रकार आलोक श्रीवास्तव से बातचीत की। दोनों विशेषज्ञों ने कहा कि इस सोशल मीडिया के दौर में हिंदी की लोकप्रियता बढ़ रही है। पेश हैं उनसे बातचीत के मुख्य अंश।

अब बॉलीवुड के बड़े-बड़े स्टार्स भी हिंदी में मैसेज करते हैं


एक तरफ तो लोग चिंतित होते हैं कि हिंदी की हालत खराब हो रही है और उसमें अंग्रेजी की घाल्5मेलहो रही है और दूसरी तरफ हिंदी की जगह हिंग्लिश जुबान बोली जा रही है। मुझे लगता है कि भाषाएं जो होती हैं वो अलग-अलग दौर से गुजरती हैं और इसी कारण उन भाषाओं में नए-नए शब्द जुड़ते हैं। मौजूदा दौर की बात करें तो सोशल मीडिया ने हिंदी को लोकप्रिय बनाया है। जब से गूगल इनपुट टूल जैसी चीजें आई हैं और हिंदी के फॉन्ट्स आए हैं, तब से हिंदी में लिखने का चलन भी बहुत बढ़ गया है। अब हिंदी, अंग्रेजी में नहीं लिखी जाती बल्कि देवनागिरी में लिखी जाती है।

मुझे लगता है कि हिंदी की लोकप्रियता बढ़ी ही है। मैं बॉलीवुड के बड़े-बड़े स्टार्स को आज हिंदी में लिखता हुआ देखता हूं। ये देखकर आश्चर्य होता है कि जो लोग सिर्फ अंग्रेजी में लिखा करते थे वो अब हिंदी में लिखने लगे हैं और ये बहुत अच्छी बात है। हमें हिंदी को लेकर चिंता नहीं करनी चाहिए। हिंदी अपने आप को बचाना जानती है। हिंदी को इस वक्त कोई खतरा नहीं है। हिंदी को खतरा सिर्फ इसी बात से है कि हमारी जो युवा पीढ़ी है उसने हिंदी पढ़ना छोड़ दिया है।

हिंदी को लेकर पालकों में शर्मिंदगी है। उनके बच्चे को हिंदी नहीं आती तो वे इस पर घमंड करते हैं। यही मुझे सबसे ज्यादा डरावना लगता है। किसी को जॉब के लिए अंग्रेजी सीखना है तो सीखे, इसमें कोई बुराई नहीं लेकिन हिंदी को न छोड़ें। हिंदी हिंदुस्तानियों की जुबान है। पालकों को हिंदी के बारे में अपना अभिमान जगाने की जरूरत है ताकि हमारी युवा पीढ़ी हिंदी आने पर शर्म नहीं बल्कि गर्वमहसूस करे।

लोग अपनी बात कविता, गज, शेर-शायरी के जरिए कहना पसंद करते हैं


अपनी दिलकश रचनाओं से हिन्दी-उर्दू के पाठकों के बीच खास मुकाम बनाने वाले कवि-पत्रकार आलोक श्रीवास्तव का कहना है कि, हाल ही में मेरी पुस्तक 'आमीन' का पांचवा संस्करण आया है, जो देवनागिरी यानी हिंदी में है। वे लोग जो कहते हैं कि हिंदी समाप्त हो रही है, खत्म हो रही है दरअस्ल वे ही हिंदी के सबसे बड़े शत्रु हैं। हिंदी हमारी सनातन सभ्यता की सबसे ताकतवर भाषा है। हमारीलोकभाषा है। हमारे देश की भाषा है और अब दुनिया की सबसे ज्यादा बोली जाने वाली 5 भाषाओं में शामिल है, फिर मैं ये कैसे मान लूं कि मेरी हिंदी खत्म हो रही है। सोशल मीडिया ने भी हिंदी की लोकप्रियता बढ़ाई है क्योंकि यहां कोई भी अपने विचार अपनी स्वतंत्रता से व्यक्त कर सकता है।

पहले अखबार, पत्रिकाओं में संपादक की पसंद और नापसंद से ही कुछ छप पाता था। अन्य कोई दूसरा प्लेटफॉर्म नहीं था लेकिन अब फेसबुक, ट्वीटर से लेकर तमाम ऐसे सोशल मीडिया के माध्यम विकसित हो चुके हैं, जहां आप अपने विचार व्यक्त कर सकते हैं। इसी सुविधा के चलते हिंदी की लोकप्रियता भी बढ़ी है क्योंकि हमारे देश में लोग अक्सर किसी कविता, गजल या शेर-शायरी से अपनी बात कहना पसंद करते हैं, हालांकि सोशल मीडिया का साहित्य, साहित्य नहीं है। मैं इसे आशुलेखन से अधिक नहीं मानता। हिंदी को सबसे बड़ा खतरा उन्हीं लोगों से है, जो यह मानते हैं कि हिंदी खत्म हो रही है।

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