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निवेश/ बाजार की गिरावट में मिलेंगे खरीदारी के मौके: देवेन आर चोकसी

Dainik Bhaskar | Feb 20, 2019, 02:01 PM IST
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Dainik Bhaskar

Feb 20, 2019, 02:01 PM IST

पिछले हफ्ते शेयर बाजार के सूचकांकों ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया। निफ्टी में 2.9% और सेंसेक्स में 3.0 गिरावट रही। रिजर्व बैंक गवर्नर शक्तिकांत दास ने नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (एनबीएफसी) की समस्या से पल्ला झाड़ लिया। उन्होंने निकट भविष्य में एसेट क्वालिटी रिव्यू की संभावना से भी इनकार किया। कहा कि बाजार शायद इस कदम से सहमत न हो। पिछले एक साल में बैंकों के फंसे कर्ज (एनपीए) की मात्रा में खासी कमी आई है। ऐसा लगता है बैंकिंग सेक्टर का बुरा वक्त अब निकल चुका है।

वहीं, पिछले हफ्ते अंतरराष्ट्रीय बाजारों का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा। अमेरिका में डो जोंस 3.1%, एसएंडपी 500 इंडेक्स 2.5% और नास्डैक 2.4% बढ़त के साथ बंद हुए। यूरोप में ब्रिटेन का एफटीएसई 2.3%., जर्मनी का डैक्स 3.6% और फ्रांस का कैक-40 इंडेक्स 3.8% बढ़कर बंद हुए।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कांग्रेस द्वारा पारित खर्च और सीमा सुरक्षा विधेयक पर शुक्रवार को हस्ताक्षर कर दिए। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव सारा सैंडर्स ने बताया राष्ट्रपति ने मंजूरी संघीय सरकार के एक और आंशिक बंद (पार्शियल शटडाउन) के लिए निर्धारित आधी रात की समय-सीमा से कुछ घंटे पहले दी गई। 33,300 करोड़ अमेरिकी डॉलर का यह विधेयक संघीय सरकार को सितंबर अंत तक खर्च करने की अनुमति देता है।
एनबीएफसी सेक्टर : बाजार में ऐसी व्यवस्था बन चुकी है जहां एनबीएफसी मार्केट के दायरे से बाहर शेयर गिरवी रखकर कर्ज देती हैं। इसका परिणाम यह है कि इनके द्वारा गिरवी रखे शेयरों की संख्या दी गई कर्ज की राशि से दोगुनी हो गई है। बाजार में कमजोरी का माहौल बनने पर जब ऐसे शेयरों की बिकवाली होती है तब एनबीएफसी भी अपने पास गिरवी रखे शेयर बेचती है। इससे उस शेयर की कीमत में और गिरावट आती है। इस समस्या से निपटने के लिए रिजर्व बैंक और सेबी को शेयर गिरवी रखकर कर्ज लेने की व्यवस्था को मार्केट के प्लेटफॉर्म पर लाना चाहिए। एक ऐसा प्लेटफॉर्म जहां कर्ज लेने वाला सीधे फाइनेंसर से मिल सके। इससे कर्ज लेने वाला दो कर्जदाताओं के बीच नहीं फंस पाएगा। इससे मार्केट का पूरा सिस्टम प्रभावी बनेगा। साथ ही बंधक शेयरों की बिकवाली से सूचकांकों के नीचे आने का डर भी कम होगा।

फार्मास्यूटिकल सेक्टर : दवा निर्माण के क्षेत्र में तेज रफ्तार से मंजूरी मिलने से प्रतिस्पर्धा तेज होने को लेकर डर बढ़ा है। दिसंबर तिमाही में अमेरिकी दवा नियामक एफडीए ने सबसे अधिक 246 मंजूरियां दी हैं। इसका कीमतों पर दबाव पड़ने से तीसरी तिमाही में सेक्टर की ग्रोथ फ्लैट रही है। कुछ बड़ी भारतीय फार्मा कंपनियों के खिलाफ यूएसएफडीए की आपत्तियाों के बाद फार्मा सेक्टर के शेयरों पर दबाव दिख रहा है।

आगे देखें तो एसयूयूटीआई के जरिए सरकार को विभिन्न कंपनियों में अपने शेयर बेचकर 5,100 करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद है। इससे से सरकार को अपनी बैलेंस शीट को काफी हद तक सुधारने में मदद मिलेगी। एनएसई निफ्टी में मंगलवार को लगातार आठवें दिन गिरावट देखने को मिली। फिलहाल बाजार में नकदी की प्रवाह ऐसा बना हुआ है जिसमें निवेशकों को खरीदारी के कई मौके मिल सकते हैं।

देवेन आर. चोकसी, एमडी, केआर चोकसी इन्वेस्टमेंट

(ये लेखक के निजी विचार हैं। इनके आधार पर निवेश से नुकसान के लिए दैनिक भास्कर जिम्मेदार नहीं होगा।)