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रिकॉर्ड:देश के फॉरेक्स रिजर्व में आई वृद्धि, 534 अरब डॉलर के पार पहुंचा, 5 जून को पहली बार आधा ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंचा था आंकड़ा

मुंबई2 महीने पहले
आरबीआई रुपए को रेगुलेट करने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार को मॉनिटरी पॉलिसी संसाधन के रूप में भी इस्तेमाल करता है
  • जुलाई के अंतिम हफ्ते में फॉरेक्स रिजर्व में 12 अरब डॉलर की वृद्धि हुई है
  • उससे पहले के हफ्ते में फॉरेक्स रिजर्व 522 अरब डॉलर पर पहुंचा था
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देश का फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व (फॉरेक्स) 31 जुलाई को समाप्त हफ्ते में 534.5 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक उससे एक हफ्ते पहले यह 522 अरब डॉलर पर था। यानी जुलाई के अंतिम हफ्ते में इसमें करीबन 12 अरब डॉलर से ज्यादा की वृद्धि देखी गई है।

फॉरेन करेंसी असेट्स सबसे बड़ा कंपोनेंट है

आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक फॉरेक्स का 500 अरब डॉलर का आंकड़ा पहली बार 5 जून को समाप्त हफ्ते में पहुंचा था। उस हफ्ते में इसमें 8.22 अरब डॉलर की वृद्धि हुई थी। जिसके बाद यह 501.7 अरब डॉलर पर पहुंच गया था। पूरे रिजर्व में फॉरेन करेंसी असेट्स (एफसीए) सबसे बड़ा कंपोनेंट है। यह 10.34 अरब डॉलर बढ़कर 490.8 अरब डॉलर पर पहुंच गया है।

आर्थिक झटके से बचाता है सोने का रिजर्व

इस दौरान सोने का रिजर्व 1.5 अरब डॉलर बढ़कर 37.6 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। सोने जैसे बाहरी असेट्स, आईएमएफ के स्पेशल ड्राइंग राइट्स (एसडीआर) और विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियाँ (पूंजी बाजारों में प्रवाह, एफडीआई और एक्सटर्नल कमर्शियल उधारी) सरकार और केंद्रीय बैंक द्वारा नियंत्रित किया जाता है। दरअसल इसके पीछे कारण यह होता है कि किसी तरह के अगर आर्थिक झटके हों तो ये उसे सहने का काम करते हैं।

सरकार को किसी भी आर्थिक संकट की स्थिति में देश के आंतरिक और बाहरी वित्तीय मामलों का मैनेजमेंट करने में मदद करते हैं। आरबीआई रुपए को रेगुलेट करने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार को मॉनिटरी पॉलिसी संसाधन के रूप में भी इस्तेमाल करता है।

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