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छत्तीसगढ़/ ओवर कॉन्फिडेंट रही भाजपा, चेहरे बदलने थे

 संदर्भ: भाजपा ने क्या गलती की: नई चुनौतियों को समझ नहीं पाई, पुरानी रणनीति हुई फेल 

Dainik Bhaskar

Dec 12, 2018, 01:08 PM IST

जगदीश उपासने 
वरिष्ठ पत्रकार 

छत्तीसगढ़ में भाजपा को जैसी अपमानजनक हार मिली है, उसकी वह हकदार नहीं थी। लेकिन अनेक विधायकों, मंत्रियों के खिलाफ शिकायतें थीं और जनता की धारणा बन गई थी कि फलां करप्ट है। उनको बदला जाना चाहिए था लेकिन नहीं बदला गया। उनकी जगह नए लोगों को, युवाओं को मौका देना था जो नहीं दिया गया। पार्टी को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा। दूसरा, पार्टी के लोग ओवर कॉन्फिडेंट रहे। उन्हाेंने इस बात पर ध्यान नहीं दिया कि जनता डायरेक्ट कनेक्ट रहती है। कार्यकर्ता की उपेक्षा भी एक बड़ा कारण है। जनसंघ के जमाने से पार्टी का काम करते आ रहे परंपरागत कार्यकर्ता की कुछ उपेक्षा हुई है। इसके कारण बहुत से लोगों ने काम नहीं किया। अनेक जगहों पर, अनेक नेताओं ने पेड वर्कर्स के जरिए

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काम चलाने की कोशिश की। पार्टियां पेड वर्कर्स से नहीं, आस्था और विश्वास से चलती हैं। इस चुनाव में कांग्रेस के पक्ष में कुछ भी नहीं था। वह सिर्फ एक विपक्ष के नाते संघर्ष कर रही थी। ऐसा भी नहीं है कि जनता भाजपा सरकार से ऊब गई थी। जनता अच्छा काम करने वाले को चाहती है। वह चाहती है कि उसके लिए काम करने वाली सरकार हो। भाजपा ने एक रणनीतिक गलती यह की कि उसने इस चुनाव में उसी रणनीति से काम किया जो पिछले चुनाव में थी। जबकि इस चुनाव में कांग्रेस के अध्यक्ष बदल गए थे। अपेक्षाकृत युवा अध्यक्ष थे। उनके कारण भाजपा के लिए जो नई चुनौतियां खड़ी हुई थीं उन्हें पार्टी ने ठीक से समझा नहीं। और उसका वो ठीक से मुकाबला नहीं कर पाए। कांग्रेस किसानों के नाम पर, दूसरे मुद्दों पर जो माहौल खड़ा करना चाहती थी उसमें सफल रही, भले ही उसमें तथ्य कम रहे हों। भाजपा उसे काउंटर नहीं कर पाई। वह यह नहीं बता पाई कि उसने इतना काम किया है। पंद्रह साल में भाजपा ने काम बहुत किया। यह बताना भी पड़ता है। राजस्थान में भाजपा को अगर सम्मानजनक सीटें मिलीं तो इसका कारण यह कि उन्होंने लाभार्थी योजना चलाई और घर-घर जाकर लोगों को यह बताया कि आपको हमारी तरफ से यह लाभ मिला है। छत्तीसगढ़ में भाजपा ने अपने काम नहीं बताए। बल्कि वे इस बात को लेकर आश्वस्त रहे कि जो काम वे करते आए हैं वही करते रहेंगे। आज का युवा बदल गया है। हर पांच साल में चीजें बदल जाती हैं। मुझे लगता है भाजपा ने इसको ठीक से समझा नहीं। उनको अंदाजा नहीं था कि राहुल गांधी के नेतृत्व में जो एक आक्रामक अभियान चल रहा है उनका मुकाबला अपने पुराने आंकड़ों से नहीं हो सकता। उसका जवाब भी आक्रामक तरीके से दिया जाना चाहिए था। इनको नए लोग लाने चाहिए थे। ढेर सारी सीटों पर कैंडीडेट बदलने चाहिए थे। ये वो नहीं कर पाए। पुराने कार्यकर्ताओं को महत्व दिया जाना चाहिए था। उनको जोड़ा जाना चाहिए था। जो लोग नाराज बैठे हैं उनको मनाया जाना चाहिए था, जो नहीं मनाया। कांग्रेस की चुनौती को हल्के में लिया। उनका मजाक उड़ाया। इसका उल्टा असर मतदाताओं पर हुआ। ये भाजपा की मेजर मिस्टेक्स थीं। यही कारण है कि उसे इतनी अपमानजनक हार का सामना करना पड़ा है जिसके वे हकदार नहीं थे। उनसे पिछले पंद्रह साल में कोई बहुत बड़ा अपराध हुआ हो ऐसा भी नहीं है। लेकिन समय बदल गया, इसको भाजपा नहीं पहचान पाई। वह नई चुनौतियों को नहीं पहचान पाई। उसकी पुरानी रणनीति, नए वातावरण में फेल हो गई।