छत्तीसगढ़ / मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के प्रमुख सचिव रहे अमन सिंह ने दिया इस्तीफा

मुख्यमंत्री रमन सिंह के साथ मौजूद अमन सिंह (फाइल फोटो)

  • रमन के रणनीतिक सलाहकार और छत्तीसगढ़ की ब्यूरोक्रेसी में नंबर एक की पोजिशन में रहे
  • प्रदेश में संचार क्रांति, गरीब परिवारों और युवाओं को मोबाइल वितरण उनकी योजना का हिस्सा

Dainik Bhaskar

Dec 12, 2018, 05:21 PM IST

रायपुर.छत्तीसगढ़ में सरकार बदलने का असर दिखने लगा है। इस्तीफों के दौर के साथ ही तबादलों की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। विधानसभा चुनावों के दौरान विपक्ष के निशाने पर रहे मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के प्रमुख सचिव अमन सिंह ने मंगलवार रात अपने पद से इस्तीफा दे दिया। प्रदेश की नौकरशाही में नंबर एक की पोजीशन पर रहे अमन सिंह रमन के रणनीतिक सलाहकार भी थे। प्रदेश में संचार क्रांति, गरीब परिवारों और युवाओं को मोबाइल वितरण भी उनकी ही योजना का हिस्सा है।इससे पहले मंगलवार को मुख्यमंत्री के सलाहकार और स्टेट प्लानिंग कमीशन के डिप्टी चेयरमैन सुनील कुमार ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

रमन सिंह के लिए दे दिया था आईअारएस से इस्तीफा

  1. अमन सिंह करीब 15 सालों से सीएम सेक्रेटिएट के प्रमुख बने हुए थे। भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) से रमन सिंह की खातिर इस्तीफा देने वाले अमन सिंह ने रणनीतिक मोर्चे पर न सिर्फ अहम किरदार निभाया, बल्कि उपसमिति और मध्यस्थ की तैनाती कर मुख्यमंत्री को राजनीतिक मोर्चे पर सुरक्षित कर दिया। सख्त रुख दिखाना है या नरम रुख, मुख्यमंत्री की स्क्रिप्ट अमन के हाथ में तैयार मिलती। 

  2. सुकमा कलेक्टर के अपहरण के दौरान निभाई थी महत्वपूर्ण भूमिका

    नक्सलियों ने सुकमा जिला कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनन  का अपहरण कर लिया था। उनके मोबाइल पर अाईजी इंटेलीजेंस का मैसेज अाया। उस समय अमन सिंह हेलिकॉप्टर में मुख्यमंत्री रमन सिंह और मुख्य सचिव के साथ मौजूद थे। अमन सिंह ने फौरन डीजीपी, प्रमुख गृह सचिव और आईजी (इंटेलिजेंस) को सीएम निवास पर आपात बैठक के लिए बुला लिया। 

  3. रातोरात अमन ने राजनैतिक और रणनीतिक मोर्चेबंदी की सर्वदलीय बैठक का खाका बुना, मध्यस्थों का चयन किया और मुख्यमंत्री को कैबिनेट की उपसमिति गठित करने का सुझाव दिया। अगले दिन सर्वदलीय बैठक हुई, जिसमें अपील जारी करने का सुझाव आया तो ड्राफ्ट अमन के पास तैयार था। 

  4. रमन सिंह के लिए हमेशा खास

    अमन  सिंह की अहमियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि  संसद की 60वीं सालगिरह के मौके पर दिल्ली पहुंचे मुख्यमंत्री रमन सिंह बंधक प्रकरण पर रिपोर्ट देने के लिए संघ के सह सरकार्यवाह सुरेश सोनी से मिलने गए तो वे साथ थे। अमूमन संघ के वरिष्ठ नेताओं के साथ होने वाली मुलाकातों में कोई नौकरशाह शामिल नहीं होते। 

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