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भास्कर इंटरव्यू:राजनीति मेरे बस की बात नहीं, इसलिए पॉलिटिक्स को अलविदा किया, आखिर यथार्थवादी होने में शर्म कैसी: शाह फैसल

श्रीनगरएक महीने पहलेलेखक: जफर इकबाल
  • कहते हैं, कश्मीर में चीजें हमेशा के लिए बदल चुकी हैं, अब जब मेरे पास उसे लौटाने की ताकत नहीं तो मुझे आगे नहीं जाना चाहिए और झूठे सपने भी नहीं दिखाना चाहिए
  • फैजल के मुताबिक, उन्हें क्राउड फंडिंग से 4.5 लाख रुपए मिले, जिससे कैंसर पेशेंट्स और पैलेट विक्टिम की मदद कर सके, उनमें से एक पैसा भी खुद पर खर्च नहीं किया
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पिछले साल जम्मू-कश्मीर से धारा 370 खत्म की गई तो कानून और सुरक्षा का हवाला देकर जिन कश्मीरी नेताओं को नजरबंद किया गया या फिर हिरासत में लिया गया, उनमें शाह फैसल भी शामिल थे। जुम्मा-जुम्मा कुछ ही दिन हुए थे फैसल को पॉलिटिक्स में आए। जेकेपीएम पार्टी बनाई थी उन्होंने। 370 हटने को एक साल पूरा हो गया है। और फैसल ने भी पॉलिटिक्स को अलविदा कह दिया है। वो कहते हैं कि राजनीति उनके बस की बात नहीं।

जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के समय शाह फैसल को हिरासत में ले लिया गया था, तब उनकी पत्नी ने रिलीज करने के लिए ये फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था।

सोमवार को जेकेपीएम पार्टी के प्रेसिडेंट पद से इस्तीफा दे दिया और कहा कि यथार्थवादी होने में शर्म कैसी? वो कहते हैं, वो आगे जाकर और लोगों को झूठे सपने नहीं दिखाना चाहते। वो खुद को भारत के संविधान की हद में रखना चाहते हैं। उनका ये भी मानना है कि जब से उन्होंने आईएएस ज्वाइन किया है, कई लोग उन्हें भारतीय कठपुतली समझते हैं। शाह फैसल ने भास्कर से मसला-ए-कश्मीर पर कुछ बातें की। उसी बातचीत के कुछ हिस्से...

पहला सवाल यही था कि अब जब उन्होंने राजनीति छोड़ दी है तो आगे क्या? क्या वो सिविल सर्विस में लौटेंगे या आगे की पढ़ाई करेंगे। शाह फैसल कहते हैं, मैं एक साल डिटेंशन में रहा। मैंने सोच लिया है कि आगे क्या करना है। मुझे समझ आ गया है कि इंकार करने से कोई फायदा नहीं।

वो कहते हैं, कश्मीर में चीजें हमेशा के लिए बदल चुकी हैं। अब जब मेरे पास उसे बदलने की ताकत नहीं तो मुझे आगे नहीं जाना चाहिए और झूठे सपने भी नहीं दिखाना चाहिए। और जब देखा जिनके लिए हम जेल में थे, वही लोग हमें गालियां दे रहे हैं, तो मैंने राजनीति छोड़ने का फैसला किया। हालांकि, फिलहाल वो नहीं जानते की कहां जाएंगे।

तस्वीर तब कि है जब फैसल रिहा होने के बाद अपने घर पहुंचे थे। फैसल ने 2019 में सर्विस छोड़कर पॉलिटिक्स ज्वाइन की थी। 2009 में उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा में पहला रैंक हासिल किया था।

370 हटाया गया तो एक इंटरव्यू में उन्हें कहा था कि कोई या तो कठपुतली बन जाएगा या फिर अलगाववादी। इसी इंटरव्यू में फैसल ने कहा था कि वो ये दोनों ही नहीं हैं।

वो कहते हैं कि वो जो करेंगे संविधान की हद में करेंगे। जब आईएएस बने तो लोग उन्हें भारतीय कठपुतली कहते थे। लेकिन उन्हें इस बात का कोई अफसोस नहीं। फैसल कह चुके हैं कि न तो मैं लोगों को ख्याली दुनिया दिखा सकता हूं, न ही एंटी नेशनल बन सकता हूं। वो कहते हैं, 1949 में देश इस बात पर सहमत था कि धारा 370 रहना चाहिए, 2019 में देश इस बात पर सहमत हो गया कि इसे हटा देना चाहिए। मैं कोई नहीं होता कि लोगों को इस भ्रम में रखूं कि मैं वापस सबकुछ लौटा लाऊंगा। मैं जानता हूं कि मेरे पास ऐसा करने की कुव्वत नहीं। इसलिए मैं पॉलिटिक्स छोड़ रहा हूं, क्योंकि मैं जान गया हूं कि ये मेरे बस का नहीं। तो फिर यथार्थवादी रहने में शर्म कैसी?

तस्वीर तब की है जब फैसल हॉवर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करते थे। उन्हें फुलब्राइट फैलोशिप मिली थी। उन्होंने एमबीबीएस किया है।

फैसल उन लोगों का शुक्रिया करना चाहते हैं जो उनके साथ खड़े रहे। कहते हैं, 4.5 लाख रुपए क्राउड फंडिंग से उन्हें मिले जिससे वो कैंसर पेशेंट्स और पैलेट विक्टिम की मदद कर सके। उन पैसों में से एक भी मैंने खुद पर खर्च नहीं किया। इसने मुझे काफी कुछ सिखाया है। लेकिन कुछ बातें होती हैं जो आपके लिए नहीं होती और हर एक को ये आजादी होनी चाहिए कि वो जो करना चाहे वो करे।

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