डीबी ओरिजिनल / 11 गांव ऐसे जहां हर घर में एक दिव्यांग; फ्लोराइड युक्त पानी से हाथ-पैर टेढ़े हो रहे, आंखों की रोशनी जा रही

गांव में लगे हुए हैंडपंप को सील कर दिया गया है।

  • उत्तर प्रदेश के इन गांवों में पेयजल बेचने वाली कंपनियों की चांदी, रोजाना 2 लाख रु.की कमाई
  • गांव के लोग 20 साल से इसे अभिशाप मान रहे थे, एक सर्वे में फ्लोराइड युक्त पानी की वजह पता चली
  • आरओ प्लांट 1 रुपए प्रतिलीटर बेच रहा पानी

Dainik Bhaskar

Aug 20, 2019, 12:21 PM IST

पचगई खेड़ा (उत्तर प्रदेश). आगरा से करीब20 किमी दूर ग्वालियर रोड पर बरौली अहीर ब्लॉक के 11 गांवों की 75% आबादी फ्लोराइड से दूषित पानी पीने को मजबूर है। दूषित पानी की वजह से इन गांवों के हर घर में कोई न कोई दिव्यांग है। किसी के पैर तो किसी के हाथ टेढ़े हो गए हैं। कुछ बच्चों की तो आंखों की रोशनी भी चली गई है। प्रशासन हैंडपंपों पर लाल निशान लगाकर अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ चुका है। पीने का पानी बेचने वाली कंपनियां हर दिन इन गांवों से दो लाख रुपए से ज्यादा की कमाई कर रही हैं।

पचगई खेड़ा गांव में सूरजभान मजदूरी का काम करते हैं। कभी काम मिलता है, कभी नहीं। सूरजभान को एक बेटा और एक बेटी है। घर का खर्च चलाने के लिए पत्नी भी मजदूरी करती थी। बड़ी बेटी मंजू 10 साल की है, लेकिन उसके पैर टेढ़े हो गए हैं। सूरजभान बताते हैं कि 4 साल की उम्र से उसके पैर टेढ़े होने शुरू हो गए थे। मां को भी अब पैरों में दर्द रहता है। इससे उसका काम भी छूट गया। अस्पताल जाओ तो डॉक्टर तेल मालिश करने का सुझाव देते हैं। इतना पैसा नहीं है कि प्राइवेट इलाज किया जा सके और आरओ का पानी पिया जा सके। अब बेटी के ब्याह की चिंता है।

पट्टी पचगई के रहने वाले राजेंद्र बताते हैं कि दूषित पानी पीने की वजह से जोड़ों में दर्द रहता है। आंखें कमजोर हो गई हैं। डॉक्टर को दिखाया तो उसने बताया कि इसका कोई इलाज नहीं है। भतीजी की आंखों की तो रोशनी ही चली गई है।

20 से ज्यादा परिवार पलायन कर चुके
पचगई खेड़ा गांव के ही रहने वाले राजीव बताते हैं कि दूषित पानी की वजह से तीन गांव के 20 से ज्यादा परिवार यहां से पलायन कर गए हैं। राजीव के मुताबिक, खराब पानी की वजह से गांव की लड़के-लड़कियों की शादी में भी दिक्कतें आ रही हैं।

2018 में शुद्ध पेयजल के लिए आवंटित हुआ बजट
प्रधान राधेश्याम कुशवाहा बताते हैं कि 2018 में गांव में साफ पानी के लिए 4.18 करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे। हालांकि, काम के नाम पर फरवरी 2019 में सिर्फ 200 फीट गहरा एक बोरिंग किया गया है। यह भी बंद पड़ा है। 2022 में यह प्रोजेक्ट पूरा होना है। राधेश्याम कहते हैं कि साफ पानी के लिए लगभग साढ़े तीन साल पहले एक आरओ प्लांट लगाया गया था।

एक गांव में आरओ प्लांट, बाकी गांवों में बाहर से सप्लाई
पचगई गांव के आरओ प्लांट से एक गांव की आधी आबादी यानी लगभग 2000 परिवार पानी लेते हैं। बाकी गांवों में बाहर की आरओ कंपनियां पानी सप्लाई करती हैं। समाजसेवी नरेश पारस के मुताबिक, 11 गांवों में कुल 26,700 की आबादी है। इसमें 12 हजार की आबादी के लिए आरओ का पानी उपलब्ध है। 20 लीटर का एक कंटेनर 20 रुपए का मिलता है, जिससे आरओ कंपनियों को लाखों रुपए का मुनाफा हो रहा है।

अभिशाप मानकर जी रहे थे गांव वाले
यहां पानी के प्राकृतिक स्रोत के रूप में 5 तालाब थे। आज वे नाले में तब्दील हो गए हैं। कुएं खत्म हो गए हैं। यहां पानी में फ्लोराइड की समस्या 20 साल से ज्यादा समय से है। अभी तक गांव वाले इसे अभिशाप मानकर अपना जीवन काट रहे थे, लेकिन बीच में एक सर्वे हुआ तो पता चला कि पानी में फ्लोराइड है। नरेश पारस ने बताया कि इसके लिए हमने केन्द्रीय बाल आयोग और मानवाधिकार आयोग को पत्र भी लिखा है। बाल आयोग ने संज्ञान लेते हुए सीएमओ आगरा और उत्तर प्रदेश बाल आयोग को नोटिस भेजकर 20 दिन में इसकी रिपोर्ट भेजने को कहा है।

पाइपलाइन से पेयजल आपूर्ति की तैयारी
आगरा के जिलाधिकारी एनजी रवि कुमार 20 साल से यह समस्या होने की बात से इनकार करते हैं। उन्होंने बताया कि पिछले 10 साल से यह समस्या है। हमने शासन को प्रस्ताव बना कर भेजा था, जिसका पैसा भी आ गया है। हम पाइपलाइन से पीने के पानी की सप्लाई करेंगे। इसकी पूरी व्यवस्था हो गई है। जल्द ही हम गांव की यह समस्या सुलझाएंगे।

पेयजल संकट के चलते कई परिवार गांव छोड़कर जा चुके हैं।
फ्लोराइड युक्त पानी से हाथ-पैर टेढ़े हो रहे हैं।
गांव की दीवारों पर जगह-जगह बोरिंग का पानी न पीने की हिदायत लिखी हुई है।
गांव के ज्यादातर लोग आरओ का पानी खरीदकर पीने को मजबूर है।
फ्लोराइड युक्त पानी के असर से युवक के पैर टेढ़े हो गए।
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