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इलेक्शन खास / यह भारत का पहला वॉट्सएप लोकसभा चुनाव है...

  • बूथ लेवल तक एक ही संदेश है- वोटर का दिमाग हैक करने के लिए वॉट्सएप करो

Dainik Bhaskar

Apr 20, 2019, 09:25 AM IST

कावेरी बामजई. इस साल जनवरी में वॉट्सऐप ने एक साथ मैसेज फॉरवर्ड करने की लिमिट 20 से घटाकर 5 की तो वॉट्सऐपको सबसे पहले चुनावी हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने वाली भाजपा इससे कतई चिंतित नहीं थी, क्योंकि अब भी वह इसे पांच ग्रुपों (हर ग्रुप में 256 मेंबर हो सकते हैं) में भेजकर करीब 1280 लोगों तक एक बार में पहुंच सकती है। अगर यही संदेश उसके 10,000 कार्यकर्ता अागे बढ़ाते हैं तो यह एक करोड़ लोगों तक पहुंच सकता है।


इसलिए प्रदेश और जिले से लेकर बूथ तक 2019 का एक ही संदेश है- वोटर का दिमाग हैक करने के लिए वॉट्सऐप का इस्तेमाल करो। भाजपा के एक वरिष्ठ रणनीतिकार के मुताबिक वॉट्सऐपको ट्रेस नहीं किया जा सकता, इसे प्रमाणित नहीं किया जा सकता और यह किसी भी नेटवर्क को भेद सकता है। वॉट्सऐपके 20 करोड़ यूजर्स की वजह से एक साथ बहुत बड़े आधार तक पहुंचना आसान है। जो इस चुनाव को पहला वॉट्सऐपचुनाव बना रहा है।


कर्नाटक, मध्यप्रदेश और राजस्थान के चुनाव में भाजपा ने वॉट्सऐप के प्रभाव का बारीकी से मूल्यांकन किया। उकसाने वाली और निगेटिव न्यूज का प्रभाव सर्वाधिक है। इनमें एक बड़ा हिस्सा खासकर राहुल पर बने चुटकुलों का था, विशेषकर उन मौकों पर जब कांग्रेस कुछ नया करती हो। हाल ही में जब कांग्रेस ने न्यूनतम आय योजना की घोषणा की तो वॉट्सऐप पर फारवर्ड होने वाले संदेश इस योजना की शर्तों पर केंद्रित हो गए। उत्तर प्रदेश में पहले चरण के मतदान की पूर्व संध्या पर यह संदेश चला कि ‘मोदी को राेकने के लिए एकजुट हो रहे हैं देश के मुसलमान।’ इसके बाद इन संदेशों में दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम गठबंधन की बात होने लगी और कहा जाने लगा कि किस तरह से 35 करोड़ मुस्लिम न तो शिया-सुन्नी में बंटे हैं और न ही देवबंदी-बरेलवी में। गुजरात के समय से मोदी को देख रहे राजनीतिक विश्लेषक अरविंद बोसमिया कहते हैं कि वह किसी भी नवीनतम, सबसे नई और सबसे अच्छी चीज को तत्काल अपना लेते हैं।

मोदी के वोट बैंक का एक बड़ा हिस्सा इंटरनेट और स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वालों का है। इसमें वॉट्सऐप राय बनाने और वोट जुटाने का प्रमुख साधन है। यह ग्रुप आरएसएस से नहीं, बल्कि मुस्लिम विरोध से प्रेरित हैं। मोदी को जितना तथाकथित सेक्यूलर कोसते हैं, यह उनको उतना ही सपोर्ट करने लगता है। कांग्रेस भी पूर्व अभिनेत्री दिव्या स्पंदना के जरिए इस खेल में आ गई है। अब चाहे भाजपा का घोषणापत्र जारी होते ही उसकी पैरोडी बनाना हो या भाजपा के मेरठ के लोकसभा प्रत्याशी की आवाज ‘कमल, कमल, कमल....’ के साथ हिटलर का फुटेज जोड़ना, वह इसे तेजी से करती है। एक वरिष्ठ कांग्रेसी रणनीतिकार बताते हैं कि वॉट्सऐपने इस चुनाव में फेसबुक के समान महत्व हासिल कर लिया है। हैकिंग के जरिए लोगों की व्यक्तिगत जानकारी चुराने से अब हर सेगमेंट उपलब्ध है और टारगेटेड मार्केटिंग के अवसर भी। लेकिन, इसकी दिक्कत भी है, यह एक प्रतिध्वनि चैंबर में बदल जाता है। एआई फर्म मंथन के सीईओ अतुल जालान कहते हैं कि वॉट्सऐपको मैसेज भेजने के जरिया तो बनाए रखना चाहिए पर हमें इस पर संवाद नहीं करना चाहिए। अगर इस पर मुझे कुछ ऐसा मिलता है जिससे मैं सहमत हूं तो यह मेरे विश्वास को मजबूत करता है। अगर कुछ ऐसा मिलता है, जिससे मैं असहमत हूं तो यह मेरे विश्वास को और भी मजबूत करता है। शायद, वॉट्सऐपहमें विचारों के बुलबुले में गहरा धकेल रहा है।

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