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रेवाड़ी/ रेवाड़ी के जवान हरि सिंह ने अपनी जान देकर लिया पुलवामा अटैक का बदला

Dainik Bhaskar | Feb 19, 2019, 01:20 AM IST
अस्पताल में भर्ती घायल।
-- पूरी ख़बर पढ़ें --

  • रात तक पत्नी और मां से छिपाई शहादत की बात
  • सेना ने कहा था- आपके असाधारण साहस और कौशल ने सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है

Dainik Bhaskar

Feb 19, 2019, 01:20 AM IST

रेवाड़ी (अजय भाटिया).जम्मू-कश्मीर के पिंगलेना में पुलवामा हमले के जिम्मेदार आतंकियों पर कार्रवाई के दौरान मेजर समेत 4 जवान शहीद हो गए। इनमें रेवाड़ी के राजगढ़ निवासी हरी सिंह राजपूत भी शामिल हैं। 26 वर्षीय हरी 2011 में बतौर ग्रेनेडियर भर्ती हुए थे। हाल ही में वे नायक पद पर प्रमोट हुए थे।

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हरि के पिता अगड़ी राम भी सेना से रिटायर्ड थे। 2 साल पहले ही उनका निधन हुआ था। हरि तीन बहनों के इकलौते भाई थे। उनकी दो साल पहले शादी हुई थी। परिवार में मां पिस्ता देवी, पत्नी राधा और 10 माह का बेटा लक्ष्य है। वे 28 दिसंबर को 1 माह की छुट्टी के बाद कश्मीर गए थे।

सुबह 6 बजे प्रशासनिक अधिकारियों ने पंचायत को सूचना दी। खबर से गांव इलाका गमगीन हो गया। ग्रामीणों ने कहा कि हमें गर्व है कि हरि ने पुलवामा के शहीदों का बदला लेते हुए जान गंवाई है। देर रात तक लोगों ने पत्नी और मां को जवान के घायल होने की बात बताई थी। मंगलवार को शव गांव लाया जाएगा।

लश्कर के दो आतंकियों को सर्च ऑपरेशन में धर दबोचा था :13 नवंबर 2018 को सर्च ऑपरेशन के दौरान टीम ने लश्कर-ए-तैयबा के दो आतंकवादियों को गिरफ्त में ले लिया था। टीम में ग्रेनेडियर हरि सिंह भी शामिल थे। इस बहादुरी के लिए कमांडिंग ऑफिसर कर्नल आरबी अलावेकर प्रशस्ति पत्र भेजा था। पत्र में लिखा कि यह उपलब्धि आपके असाधारण साहस और पेशेवर कौशल को प्रदर्शित करती है। आपने 20 ग्रेनेडियर परिवार के हर सदस्य का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है।

पत्नी से कहा था- अपना और बेटे का ख्याल रखना :हरि सिंह ने आखिरी बार रविवार की देर शाम 7.30 बजे अपनी पत्नी राधा से फोन पर बात की थी। हरि सिंह ने परिवार के साथ ही बेटे लक्ष्य का हालचाल पूछा। उन्होंने बेटे का ख्याल रखने की बात कहकर कहा कि आठ बजे बाद से ड्यूटी पर रहूंगा।

जुटने लगे लोग तो बेटी बोली- पापा जल्दी आ जाओ, कुछ हो गया है :शहीद के ससुर अनंतपाल ने कहा कि मुझे सुबह करीब 7 बजे सूचना मिली, तभी बेटी का फोन आया गया। रोते हुए उसने कहा कि पापा जल्दी आ जाओ। बाहर लोग जुट रहे हैं। कुछ हो गया है। हम झगड़ौली से राजगढ़ आ गए। बेटी को टीवी तक नहीं देखने दिया। देश के लिए शहादत पर हमें नाज है। मगर समझ नहीं आ रहा कि उसे क्या कहकर सांत्वना दूं। देर रात तक परिवार में किसी को मैंने शहादत की बात को पता नहीं चलने दिया।

हादसे में दुल्हन भी घायल हो गई।