बी-अलर्ट / प्रेग्नेंसी में माइग्रेन होने पर पेनकिलर नहीं, पेरासिटामोल खाना सबसे सुरक्षित

Dainik Bhaskar

Dec 12, 2018, 05:44 PM IST

हेल्थ डेस्क. अगर मां बनने वाली हैं और माइग्रेन की शिकायत है तो पेनकिलर लेने से बचें। प्रेग्नेंसी में माइग्रेन और अन्य किसी भी तरह का सिरदर्द होने पर पेरासिटामोल लेना चाहिए क्योंकि पेन किलर से बच्चे को नुकसान पहुंच सकता है। बच्चे में जन्मजात विकृति आने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए दर्द निवारक दवाइयां न लें। न्यूरोलॉजिस्ट दिनेश खंडेलवाल के मुताबिक माइग्रेन की स्थिति में पैरासिटामोल लेने के साथ योगा करें और हेल्दी फूड खाएं। सबसे जरूरी बात ऐसी स्थिति में बिना डॉक्टर कोई दवा न लें।

बच्चे को डिसऑर्डर से बचाव के लिए क्या-क्या करें 

  1. दवाओं में बदलाव हैं जरूरी

    न्यूरोलॉजिस्ट दिनेश खंडेलवाल के अनुसार, सिर दर्द के साथ दौरे आने पर सुरक्षित दवाइयां लेनी चाहिए। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाएं न लें। माइग्रेन के अलावा मिर्गी, मल्टीपल स्कोलोरोसिस, कमजोर मसल्स, लकवा और माइनर अटैक जैसे न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर होते हैं। इन डिसऑर्डर से ग्रसित महिलाओं को बिना डॉक्टर की सलाह कंसीव नहीं करना चाहिए। अगर कंसीव कर लिया है, न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर भी है। प्रेग्नेंसी के शुरूआती तीन महीनों में बच्चे के आर्गन्स बनते है। इस पीरियड में दवाइयां बदलना जरूरी है।  बच्चे को किसी तरह के न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर से बचाने के लिए अतिरिक्त फोलिक एसिड देना चाहिए। कंसीव करने के बाद शुरूआती दो महीने में बच्चे की सोनोग्राफी करवाएं। सोनोग्राफी में बच्चे में किसी तरह का डिफेक्ट डायग्नोस होने पर डॉक्टरी सलाह लें।  प्रेग्नेंसी में दौरे आने पर सीटी स्कैन से बचें। सीटी स्कैन के दौरान निकलने वाला रेडिएशन बच्चे को नुकसान पहुंचाता है। कई बार पेशेंट्स यह नहीं बताते कि वह प्रेग्नेट हैं। डॉक्टर उन्हें सीटी स्कैन लिख देते हैं। इसलिए डॉक्टर को प्रेग्नेंसी के बारे में जरूर बताएं। ताकि सीटी स्कैन वाली जांच से दूर रखा जा सके। मां और बच्चे को नुकसान पहुंचाने वाली दवाइयां न लिखें।  प्रेग्नेंसी में क्लोटिंग का खतरा बढ़ जाता है। लंबे समय तक एक जगह बैठे रहने से पैरों की नसों में डीवीटी (डीप वेन थ्रम्बोसिस) हो जाती है। पानी और विटामिंस की कमी से दिक्कत हो सकती है वहीं, विटामिन बी 12, फोलिक एसिड सप्लीमेंट्स की कमी से क्लोटिंग होने पर अचानक सिर दर्द, दौरे पड़ना और सुन्नपन आ सकता है। प्रेग्नेंसी और डिलीवरी से पहले महिलाओं का ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है।  ब्लड प्रेशर बढ़ने से दौरे आ सकते है। ब्लड प्रेशर की जांच करवाएं। आयरन और विटामिंस की कमी नहीं हो। इसके लिए हरे पत्तेदार सब्जियां और गुड प्रचुर मात्रा में खाएं। दवाइयां तुरंत नहीं बदलें। प्लान करके कंसीव करें। साधारण प्रेग्नेंसी में 100 में जन्मजात विकृति का रिस्क दो परसेंट तक ही रहता है। अनसेफ मेडिसिन लेने से रिस्क चार से दस परसेंट तक बढ़ सकती है। अचानक से दौरे आने पर अपनी मर्जी से दवाइयों में बदलाव नहीं करें। यह नुकसानदायक है। 

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