सर्पदंश / सांप काटने के सबसे ज्यादा मामले नंगे पैर चलने वालों में, देर हो जाए तो एंटी वेनम से भी जान नहीं बचती

  • पहचान : सर्प द्वारा गड़ाए गए दांतों से दो छेद बन जाते हैं, तेज दर्द उठता है और प्यास लगती है
  • बचाव :जहर चूसकर निकालना, झाड़फूक जैसे नुस्खे न आजमाएं,प्रभावित स्थान पर कपड़ा बांधें ताकि जहर फैलने से रोका जा सके

Dainik Bhaskar

Sep 12, 2019, 01:21 PM IST

हेल्थ डेस्क. बारिश में सांप के बिलों में पानी भर जाता है तो वे बाहर आकर सुरक्षित स्थान खोजते हैं। ऐसे में कई बार वे हमारे घरों में घुसकर पनाह पाते हैं। ऐसे हालात में सर्पदंश की घटनाएं बढ़ जाती हैं। सांप खुद के लिए खतरा महसूस करते हैं, तभी किसी को डंसते हैं। इनकी कुछ प्रजातियां ही विष वमन करती हैं जिससे व्यक्ति की मौत हो जाती है। लेकिन हमारी धारणा यही है कि सभी सर्प जहरीले होते हैं। सांप ने डंसा है यानी मौत निश्चित है। वैज्ञानिकों के अनुसार भारत में सर्प की 240 प्रकार की प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें से 30 फीसदी ही विषैले होते हैं।

कोई लापरवाही न बरतें

  1. डॉक्टर्स का कहना है कि सर्पदंश के मामले में लापरवाही न बरतें और तुरंत नजदीकी अस्पताल या डिस्पेंसरी के आपातकालीन वार्ड में पीड़ित का इलाज कराएं। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) की 2004 में जारी रिपोर्ट के अनुसार लोगों में जागरूकता आने के कारण दुनिया में सर्पदंश से मरने वालों की संख्या में कमी आई है। वहीं, 'मिलियन डेथ स्टडी' के अनुसार भारत में प्रति वर्ष लगभग 45000 लोगों की मौत सर्प दंश के कारण हो जाती है। इसका मतलब है लोगों में अभी जागरूगता की कमी है। खासकर ग्रामीण इलाकों में समय पर उपचार न मिलना तो प्रमुख कारण है ही, पारंपरिक तरीके से सर्प दंश का इलाज कराना भी इन मौतों को बढ़ा रहा है।

     


     

  2. इंजेक्शन साथ ले जाएं

    सर्पदंश के मामले में (चाहे सर्प जहरीला हो या न हो) स्नेक एंटी वेनम नामक इंजेक्शन बहुत प्रभावी होता है। यह दवाई शरीर में पहुंचते ही जहर से मुकाबला कर उसके प्रभाव को खत्म करने लगती है। सर्पदंश के मामलों में मरीज को अस्पताल ले जाते समय यह इंजेक्शन खरीदकर साथ ले जाएं। हो सकता है कि अस्पताल में यह इंजेक्शन उस समय उपलब्ध न हो। ऐसी स्थिति में मरीज की जान को खतरा बढ़ता जाता है। कई बार मरीज को अस्पताल लाने में काफी देरी हो जाती है, उस स्थिति में यह इंजेक्शन अपना प्रभाव नहीं दिखा सकता है।

     

     

  3. सांप काटने पर क्या करें

    प्राथमिक उपचार में सर्प दंश वाले स्थान को डेटॉल व गर्म पानी से साफ करें। डेटॉल न हो तो साबुन धोएं फिर घाव के आसपास कुछ दूरी पर कसकर पट्‌टी बांध दें। इसके तुरंत बाद पीड़ित को अस्पताल ले जाएं। याद रखें, पारंपरिक उपचार जैसे कि जहर चूसकर निकालना, झाड़फूक जैसे नुस्खे न आजमाएं। ऐसे मामलों में हर्बल दवाओं का उपयोग न करें। सर्पदंश वाले शरीर के उस भाग को हिलाएं-डुलाएं नहीं। सूजन आने पर घाव के आसपास कसकर कपड़ा बांध देने से जहर शरीर में नहीं फैलेगा। घटना के बाद सर्प को पकड़ने की कोशिश न करें, उसे जाने दें। पेरासिटामाल देना ऐसे मामलों में गंभीर हो सकता है। चिकित्सा मिलने तक मरीज को बाईं ओर करवट से लिटाएं और उसके श्वसन पर ध्यान रखें।

  4. बिना देर किए पीड़ित को अस्पताल ले जाएं

    विशेषज्ञों के मुताबिक, नंगे पैर चलने वालों को सर्पदंश ज्यादा हुआ है। सभी सर्पदंश के 80% केस में सर्प ने घुटने के नीचे या पैरों पर डंसा है। इससे बचने के लिए घुटने तक के गम शूज पहनकर सुरक्षा पा सकते हैं। सामान्य सर्पदंश में आपको कोई खतरा नहीं होता। दंश वाले स्थान पर सूजन आ जाती है। घबराहट होने लगती है, लेकिन यह घबराहट सर्पदंश से नहीं, बल्कि डर के कारण होती है। इसके विपरीत विषैला सर्प डंसता है तो पीड़ित व्यक्ति पर अलग ही लक्षण प्रकट होने लगते हैं। ज्यादातर लोगों को (ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को छोड़कर) विषैले तथा सामान्य सर्प की पहचान नहीं होती, इसलिए सर्पदंश के बाद व्यक्ति 50 प्रतिशत अधमरा तो डर के कारण ही हो जाता है। इसलिए किसी भी प्रकार के सर्प का दंश हो, बगैर एक पल की देरी किए पीड़ित को अस्पताल ले जाना चाहिए।

  5. कैसे पहचानें सांप ने काटा है

    सर्प द्वारा गड़ाए गए दांतों से दो छेद बन जाते हैं, जिनके आसपास सूजन आ जाती है। घाव के आसपास का भाग लाल हो जाता है। दंश वाले स्थान पर तेज दर्द उठता है। प्यास लगती है, पीड़ित को सांस लेने में तकलीफ होती है। उल्टी होती है या उल्टी होगी, ऐसा महसूस होता रहता है, मूर्छा आने लगती है। पसीना आता है, लार टपकने लगती है और दृष्टि धुंधली हो जाती है। चेहरे सहित पूरा शरीर सुन्न होने लगता है। पलकें लटक जाती हैं। हाइपर टेंशन के साथ ब्लड प्रेशर लो होने लगता है। जबर्दस्त थकान के साथ मांसपेशियां शिथिल हो जाती हैं। कमर-पीठ दर्द, रक्तस्राव होना इस बात का संकेत होता है कि गुर्दे काम करना बंद कर रहे हैं।

     

  6. यह काम जरूर करें

    पीड़ित को आश्वस्त करते रहें कि मौत का भय दिमाग से निकाल दो। डॉक्टर के पास जा रहे हैं, तुम्हें कुछ नहीं होगा। पीड़ित को शांत रखने का प्रयास करें, कहें कि ज्यादातर सर्प जहरीले नहीं होते। समझाएं कि मेडिकल साइंस में इसका कारगर इलाज मौजूद है। यदि पीड़ित को ढांढस नहीं बंधाया और व्यक्ति कमजोर दिल वाला हुआ तो डर के मारे हार्टफेल हो सकता है। पीड़ित को शांत रखें ताकि विष तेजी से शरीर में न फैले।
     

  7. यह बिल्कुल न करें

    प्राथमिक उपचार के नाम पर दंश पर कट न लगाएं, इससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। दंश वाले स्थान को मुंह लगाकर चूसने की क्रिया न करें। इससे आपके कीटाणु लार द्वारा पीड़ित को हानि पहुंचा सकते हैं। यह भ्रम है, इससे विष नहीं निकलता। बर्फ, अल्कोहल का उपयोग कतई न करें। यदि कोई टोने-टोटके वाला उपचार करने में समय गंवाता है तो समझ लेना चाहिए कि पीड़ित की जान अब नहीं बचेगी। इसलिए ऐसा करने से बचें।

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